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भारतीय वायुसेना के लिए मोदी ने किया ऐसा काम, दुनियाभर में मची खलबली, पाकिस्तान, चीन सन्न

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नई दिल्ली : सेना के हाथ मजबूत करने के लिए पीएम मोदी के हाथ एक और बड़ी सफलता लग चुकी है. भारतीय वायुसेना की ताकत कई गुना तक बढ़ाने के लिए भारत और फ्रांस के बीच राफेल लड़ाकू विमान सौदा पूरा हो चुका है. भारतीय इतिहास में इस समझौते को स्वर्णिम अक्षरों से लिखा जाएगा.


भारत आ रहा है दुनिया का सबसे खतरनाक फाइटर जेट ‘राफेल’

बता दें कि राफेल लड़ाकू विमान परमाणु हथियारों को अपने साथ ले जा सकता है, ये इतना आधुनिक है कि वायुसेना की शक्तियों को कई गुणा तक बढ़ा देगा. दुनिया के सबसे खतरनाक लड़ाकू विमानों में से एक राफेल जेट दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में माहिर है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि दुश्मन के रडार को चकमा देते हुए ये भीषण हमला करता है. दुश्मन को कुछ पता चले कि बम कहाँ से गिरा है, उससे पहले ही राफेल रफूचक्कर हो जाता है. इतना आधुनिक जेट तो चीन के पास भी नहीं है, इसीलिए भारत की इस डील के बाद कई देश सोचने पर मजबूर हो चुके हैं.

राफेल लड़ाकू विमान में ट्विन इंजन होते हैं. राफेल फ्रेंच भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है ‘तूफान‘. राफेल हवा से हवा व् हवा से जमीन दोनों में मार करने में सक्षम है, इसके अलावा एंटी शिप, अटैक ग्राउंड सपोर्ट और परमाणु हथियार ढोने व् इनका अटैक रोकने जैसे कार्यों में भी सक्षम है. बता दें कि सीरिया में दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन आईएसआईएस के ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए फ्रांस भी राफेल जेट का ही इस्तमाल कर रहा है.

बेहद खतरनाक मिसाइलों से लैस होगा जेट

राफेल हवा से हवा में मार करने वाली बीवीआर मिसाइल से भी लैस होगा, बीवीआर मिसाइल की माकर क्षमता 150 किलोमीटर है, जो किसी भी दुश्मन देश में तबाही मचा सकती है. पिछले 20 साल में लड़ाकू विमानों का भारत और फ्रांस का यह पहला सौदा है. सबसे ख़ास बात ये भी है कि मोदी सरकार आने के बाद हुए इस सौदे में एक पैसे का भी भर्ष्टाचार नहीं हुआ है.

राफेल के जो दाम फ्रांस की डसाल्ट एविएशन कंपनी ने कोट किए थे, उससे 4500 करोड़ रुपयों कम में ये डील फाइनल हुई है, यानि मोदी सरकार कुल सौदे की कीमत को 4500 करोड़ रुपये कम करवाने में सफल हुई है. भारत के साथ हुए सौदे के तहत एक राफेल जेट की कीमत 1504 करोड़ रुपये है. राफेल जेट बनाने वाली कंपनी डसाल्ट ने दावा किया है कि राफेल जेट अपने वजन से ढाई गुना ज्यादा वजन के पेलोड के साथ उड़ान भर सकता है. इसके अलावा राफेल के दोनों पंखों में दो-दो यानी कुल चार मिसाइल फिट की जा सकती हैं. राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई तक जा सकता है और इसकी ईंधन क्षमता 4700 किलोग्राम है.


थर-थर कांपे चीन व् पाकिस्तान

एक और बेहद अहम् बात जो इसे ख़ास बनाती है, वो ये है कि राफेल जेट उड़ान के दौरान ही ऑक्सीजन बनाने की प्रक्रिया से लैस है, जिससे इसे ऑक्सीजन की जरूरत नहीं होती. भारत की फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की डील पूरी होने के बाद से पाकिस्तान के साथ-साथ चीन भी सकते में आ गया है. राफेल लड़ाकू विमान इतने शक्तिशाली व् तेज हैं कि पाकिस्तान में घुसकर जब ये तबाही मचाएंगे तो पाकिस्तान के पास इसे रोकने के लिए कोई उपाय नहीं होगा.

इस डील के पूरा होते ही चीन इस कदर बौखला गया है कि उसने अपने कहा है कि उसके पास राफेल का जवाब ‘क्वांटम रडार’ है, जो राफेल जेट का पता लगा सकता है, हालांकि जानकारों के मुताबिक़ ये केवल एक कोरी बकवास है. इसी बात से साफ़ जाहिर होता है कि चीन को भारत की लगातार बढ़ रही शक्तियों का खौफ सताने लगा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान फ़्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने का ऐलान किया था. इस दौरान दोनों देशों ने गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट डील के लिए समझौता भी किया था. डील के मुताबिक पहले 18 राफेल जेट पूरी तरह से उड़ान के लिए तैयार कंडीशन में सीधे फ़्रांस से आएंगे. जबकि बाकी के राफेल लड़ाकू विमानों को भारत में ही टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से बनाया जाएगा. एक और अहम् बात ये है कि एमएमआरसीए डील की तर्ज पर इस डील में भी 50 प्रतिशत ओफ़्सेट क्लॉज़ का प्रावधान रखा गया है, जिसके मुताबिक़ फ्रांस को कॉन्ट्रैक्ट राशि का आधा पैसा भारत में ही निवेश करना पड़ेगा.

बताया जा रहा है कि डसाल्ट एविएशन 36 राफेल लड़ाकू विमानों को उसी कनफिगरेशन में सौंपेगी, जैसा मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट ट्रायल के दौरान टेस्ट किया गया था. एमएमआरसीए परिक्षण में राफेल जेट ने यूरोफाइटर टाइफून, अमेरिकी कंपनी बोइंग के एफ/ए 18 सुपर होर्नेट, अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन के एफ-16, रूस के मिग-36 और स्वीडन के ग्रिपेन लड़ाकू विमानों को भी पीछे छोड़ दिया था.


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