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पाकिस्तान के खिलाफ भारत को हासिल हुई अबतक की सबसे बड़ी फतह, पाकिस्तान और चीन में हड़कंप !

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नई दिल्ली : इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद इस दुनिया की सबसे शातिशाली खुफिया एजेंसी मानी जाती है. मोसाद के बारे में कहा जाता है कि उसके अंडरकवर जवान कोवर्ट ऑप्रेशन चलाकर अपने देश के दुश्मनों ओर आतंकियों को सफाया कर देते हैं. इसी की तर्ज पर अब पाकिस्तान में आतंकियों के खिलाफ कोवर्ट ऑप्रेशन चलाने और उनका काम तमाम करने के लिए भारत और अमेरिका के बीच भी सहमति बन चुकी है.


आतंकियों के खात्मे के लिए कोवर्ट ऑप्रेशन !

ये खबर सामने आते ही पाकिस्तानी मीडिया में हड़कंप मच गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पाकिस्तान के साथ-साथ उसके दोस्त चीन तक भी ये खबर पहुच चुकी है. जिसके बाद से दोनों ही के होश फाख्ता हैं. दरअसल पाकिस्तान को पता है कि भारत, पाकिस्तान के किसी भी हिस्से में कोवर्ट ऑप्रेशन चलाने में सक्षम है.

यदि भारत ने पाकिस्तान में किसी आतंकी को मारने के लिए कोवर्ट ऑप्रेशन चलाया तो फिर उसे चीन भी नहीं बचा पायेगा. ख़बरों के मुताबिक़ इसी के चलते पाकिस्तान ने दाउद जैसे आतंकियों को गुप्त जगहों पर छिपा दिया है और साथ ही भारत के मोस्ट-वांटेड आतंकी हाफिज सईद को भी नजरबंद किया हुआ है.


चीन को रूस की खरी-खरी !

वहीँ पाकिस्तान की सहायता करने के लिए चीन कूटनीतिक और राजनीतिक चालें चल रहा है. पाकिस्तान की सहायता के लिए चीन ने रूस से समर्थन प्राप्त करने के प्रयास भी किये लेकिन रूस की और से साफ़ कर दिया गया कि वो केवल अफगानिस्तान में शांति स्थापना के मुद्दे पर ही शामिल होगा. भारत-रूस के संबंधों पर असर पड़ें, ऐसे किसी भी मुद्दे में वो खुद को शामिल ही नहीं करेगा.

पाक आतंकियों को लेकर बेहद सख्त हैं अजीत डोभाल !

अभी हाल ही में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और यूएस के डिफेंस सेक्रेटरी जनरल जेम्स मैटिस के बीच में पाकिस्तान में आतंकी कैम्पों के खात्मे और पाकिस्तानी आतंकियों को लेकर चीन के रवैय्ये पर अहम् चर्चा हुई थी. हालांकि पाकिस्तान ने अपने खिलाफ संभावित कार्रवाई से बचने के लिए अमेरिका के सामने भारत के साथ मध्यस्थता की पेशकश की थी, जिसके बाद अमेरिका ने ये प्रस्ताव भारत के सामने भी रखा था लेकिन भारत ने अमेरिका के इस प्रस्ताव को किनारे करते हुए पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ कार्यवाही करने के अपने इरादे स्पष्ट कर दिए.

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और यूएस के डिफेंस सेक्रेटरी की मीटिंग के बाद खबर ये भी आयी कि अमेरिका ने चीन को कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए साफ़ कर दिया है कि चीन के वीटो के बावजूद पाकिस्तानी आतंकी ज्यादा नहीं जियेंगे. भारत को अमेरिका और रूस का साथ मिलने के पीछे एक वजह ये भी है कि ये दोनों ही देश अच्छी तरह से जानते हैं कि एशिया-पैसेफिक क्षेत्र में भारत की मजबूत स्थिति से ही दुनिया में शांति और स्थिरता बनी रह सकती है.


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