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अभी-अभी : स्विट्जरलैंड ने खोला कालेधन का सबसे बड़ा राज, सोनिया-राहुल समेत हिल गया पूरा विपक्ष

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नई दिल्ली : पीएम मोदी ने देश की जनता से वादा किया था कि वो देश-विदेश दोनों ही जगहों से कालाधन वापस लाएंगे. देश में छिपे काले धन को ख़त्म करने के लिए उन्होंने नोटबंदी जैसा क्रांतिकारी कदम भी उठाया था. अभी-अभी आयी एक बेहद महत्वपूर्ण खबर के मुताबिक़ अब विदेश में मौजूद कालाधन रद्दी होने जा रहा है. स्विट्जरलैंड ने कालेधन का सबसे बड़ा राज अब खोल दिया है.

पीएम मोदी के हाथ बड़ी कामयाबी

दरअसल स्विट्जरलैंड ने भारत के साथ-साथ 40 अन्य देशों के साथ बैंकिंग सूचनाओं के स्वचालित आदान-प्रदान की व्यवस्था को आखिरकार मंजूरी दे दी है. 2019 के वसंत से इन देशों के बीच वित्तीय सूचनाओं का स्वचालित तरीके से आदान-प्रदान शुरू हो जाएगा. यानी स्विस बैंकों में किस भारतीय के कितने पैसे हैं, ये बात अब भारत सरकार से छुपी नहीं रहेगी.

आयकर विभाग ऐसे लोगों की जानकारियां मिलते ही उनसे पूछताछ की जा सकेगी, जिसके बाद स्विस बैंकों में मौजूद अपने पैसे का उन्हें स्पष्टीकरण देना होगा वरना सरकार ऐसे लोगों पर भारी जुर्माना लगा कर कालाधन वसूल करेगी.

स्विटरजरलैंड की संघीय परिषद ने स्वचालित जानकारियों के आदान-प्रदान की मंजूरी दी है, इसका मतलब ये है कि अब इसके लिए किसी तरह की जनमत की जरूरत नहीं है और अब इसके लागू होने में कोई रुकावट भी नहीं आएगी. इस बेहद अहम् फैसले से देश से बाहर काला धन जमा करने पर अंकुश लग सकेगा. आयकर विभाग की आँखों से कुछ भी छिपा नहीं रहेगा.

कुछ शर्तों का करना होगा पालन

सूचनाओं के स्वत: आदान -प्रदान के शुरू होने की तिथि के बारे स्विटरजरलैंड की संघीय परिषद भारत सरकार को जानकारी देगी. हालांकि इसके लिए भारत समेत अन्य देशों को भी कुछ नियमों का पालन करना होगा. जिसमे सबसे अहम् है गोपनीयता बनाये रखने का नियम. यानी भारत सरकार को स्विस बैंकों में कालेधन वालों की जानकारी तो होगी लेकिन उन नामों का खुलासा वो सामान्य जनता के बीच तब तक नहीं कर सकते, जब तक सरकार के पास उनके खिलाफ पुख्ता सबूत ना हो और अदालतें उन्हें कसूरवार ना ठहरा दें.


इसी के साथ एक और अहम् नियम के मुताबिक़ भारत सरकार को इन सूचनाओं की हिफाजत भी करनी होगी ताकि ऐसी जानकारियां गलत हाथों में ना पड़ जाएँ. क्योंकि ऐसा होने पर स्विस बैंकों में जायज पैसे जमा करने वालों पर भी ख़तरा मंडराने लगेगा. जानकारियां यदि लीक हो गयी तो अपराधी तत्व इनका गलत इस्तमाल भी कर सकते हैं.

कोई छोटी-मोटी नहीं बल्कि भारत के लिए ये बड़ी कामयाबी

स्विटरजरलैंड सरकार ने स्पष्ट किया है कि सूचना का स्वतः आदान-प्रदान शुरू करने से पहले वो ये चेक करेगी कि भारत तथा अन्य सभी देश गोपनीयता एवं सूचनाओं की हिफाजत के नियमों के अनुपालन के लिए तैयार हैं या नहीं. मार्च महीने में स्विट्जरलैंड सरकार ने चेतावनी भी दी थी कि यदि कालेधन की सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान की प्रस्तावित व्यवस्था के तहत गोपनीयता की शर्त को भंग किया गया तो वो सूचना देने के काम को निलंबित भी कर सकता है.

स्विट्जरलैंड के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय मामलों के विभाग एसआईएफ ने एक बयान जारी करते हुए बताया भी था कि उनकी घरेलू वित्तीय संस्थाओं ने पहली बार इस साल आंकड़े एकत्रित करना शुरू भी कर दिया है ताकि अन्य देशों के साथ उन्हें साझा किया जा सके.

एसआईएफ ने बताया था कि पहले ये सुनिश्चित किया जाएगा कि जानकारियां गलत हाथों में ना पड़ें या उनका दुरुपयोग ना हो. पीएम मोदी की पहल पर दुनिया के कई देशों के सामूहिक दबाव के चलते इतिहास में पहली बार स्विट्जरलैंड जैसा देश झुकने पर विवश हुआ है. नेताओं व् व्यापारियों का अपने देशों में लूट करके कालेधन को स्विस बैंकों में छिपा देने का दशकों से चला आ रहा सिलसिला अब सदा-सदा के लिए ख़त्म हो जाएगा.

देश का पैसा वापस देश में आएगा तब दुनिया को अहसास होगा कि भारत कोई गरीब देश नहीं बल्कि दुनिया के सबसे अमीर देशों में से एक है.


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