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कोका-कोला के सीईओ ने मोदी और भारत के बारे में दी ऐसी रिपोर्ट, जिसे देख विपक्ष में मची खलबली

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नई दिल्ली : नोटबंदी को लेकर हाल-फिलहाल में रिजर्व बैंक ने आंकड़े जारी किये है. जिसके बाद से मीडिया में नोटबंदी को फ्लॉप आईडिया बताने की एक होड़ जैसी लग गयी है. कोंग्रेसी नेताओं ने भी इसी मुद्दे को लेकर राजनीतिक रोटियां सेकनी शुरू कर दी हैं. कोंग्रेसी नेता और पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने नोटबंदी को फेल बताते हुए पीएम मोदी पर निशाना भी साधा. मगर अब बेवरेज कंपनी कोका-कोला के प्रेसीडेंट व सीईओ ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसे कांग्रेस और देश के मीडिया के गाल पर एक तमाचे के रूप में देखा जा रहा है.

कारोबार करने के लिए अच्छा देश और अच्छी जगह है भारत !

जिस भारत में लाल फीता शाही के डर से और भ्रष्टाचार के कारण विदेशी निवेशक आने से डरते थे, उसी भारत की पहली यात्रा के दौरान बेवरेज कंपनी कोका-कोला के प्रेसीडेंट व सीईओ जेम्स क्वींचि ने भारत को “एक अच्छा देश और कारोबार करने के लिए अच्छी जगह” बताया है.

केवल इतना ही नहीं, उन्होंने पीएम मोदी के जीएसटी व नोटबंदी को साहसिक फैसला बताते हुए इसकी खूब तारीफ़ की है. बता दें कि इससे पहले यूएन की रिपोर्ट भी नोटबंदी को एक साहसिक कदम बता चुकी है और ये भी बताया है कि इससे देश को आगे चलकर काफी फायदा पहुंचेगा.

काले कुबेरों का धंधा हुआ बंद !

देश में मौजूद अरबों का कालाधन मिटटी हो चुका है. काले कुबेर चटपटा रहे हैं. बाहुबली नेता अब पैसों के दम पर चुनाव नहीं जीत पा रहे. पिछले 70 सालों से सत्ता की मलाई खा रहे भ्रष्टाचारियों का करियर इस एक कदम से ख़त्म हो गया.


पीएम मोदी का लगातार विरोध कर रहे मीडिया व् नेताओं के लिए कोका-कोला के प्रेसीडेंट व सीईओ जेम्स क्वींचि का बयान एक करारे तमाचे की तरह है. यदि वाकई में जीएसटी व् नोटबंदी गलत फैसले होते तो क्या विदेशी निवेशक भारत में व्यापार के इच्छुक होते?

सरपट दौड़ी उद्योगों की गाडी !

नोटबंदी के बाद के पहले महीने में सबसे तेज तरक्की बिजली सेक्टर ने की. इसके बाद पैसेंजर कारों का उत्पादन रहा. वहीँ टीवी, फ्रिज जैसे कई रोजमर्रा के सामान बनाने वाले उद्योगों की विकास दर भी बढ़ गयी है. सबसे बड़ी बात ये है कि ये सेक्टर पिछले काफी वक़्त से अच्छा नहीं कर रहे थे.

नवंबर 2016 में नोटबंदी शुरू कि गयी थी और उसी महीने औद्योगिक विकास दर 5.7 फीसदी पहुच गयी थी, जबकि उससे पिछले महीने अक्टूबर में यह दर 1.9 फीसदी से कम थी. सबसे हैरत कि बात तो ये है कि नवंबर, 2015 में तो विकास दर नेगेटिव में थी यानी माइनस 3.4 फीसदी.

इसके अलावा मैनुफैक्चरिंग यानी निर्माण क्षेत्र की विकास दर जोकि अक्टूबर में नेगेटिव में यानी माइनस 2.39 फीसदी थी वो भी पिछले साल नवम्बर तक बढ़कर 5.5 फीसदी पहुच गयी.


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