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डोकलाम विवाद पर मोदी ने की चीन पर जबरदस्त सर्जिकल स्ट्राइक, दहाड़े मार-मारकर रो रहे हैं चीनी

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नई दिल्ली : डोकलाम को लेकर चीन की अकड़ कम होने का नाम नहीं ले रही है. चीन की ओर से लगातार मिल रही धमकियों से ये बात स्पष्ट है कि चीन शराफत की भाषा मानने वाला नहीं है. चीन के खिलाफ एक्शन लेने का सही वक़्त आ चुका है. ऐसे में भारत सरकार ने चीन को पहला सबसे बड़ा झटका दिया है, जिसे देख चीनी सरकार को भारत की ताकत का अंदाजा होना शुरू हो गया है.


8800 करोड़ रुपये की डील पर भारत ने लगा दी रोक

युद्ध के लिए भारतीय सेना तो तैयार है, लेकिन युद्ध से तो दोनों देशों को नुक्सान के अलावा कुछ नहीं मिलेगा. ऐसे में भारत सरकार की ओर से ऐसा कदम उठाया गया है, जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे. भारत की ओर से चीन को 8800 करोड़ रुपयों का झटका दिया गया है.

दरअसल चीन की कंपनी शांघाई फोसन फार्मास्युटिक्ल, हैदराबाद की ग्लैंड फार्मा को खरीदने जा रही थी. बताया जा रहा है कि हैदराबाद की ग्लैंड फार्मा के पास मॉडर्न इंजेक्टेबल टेक्नोलॉजी है और यदि चीन के साथ ये डील हो जाती तो ये टेक्नोलॉजी उसके पास चली जाती. भारत नहीं चाहता कि किसी विदेशी मुल्क के हाथों में ये टेक्नोलॉजी जाए और खासकर चीन के हाथों में तो बिलकुल नहीं.

यही वजह है कि भारत की कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने बड़ा कदम उठाते हुए चीनी कंपनी शंघाई फोसुन के भारतीय कंपनी ग्लैंड फार्मा की मेजॉरिटी स्टेक खरीदने के लिए 8800 करोड़ रुपये की डील को मंजूरी देने से साफ़ इंकार कर दिया.


घुसपैठ बंद करो, वरना खाने के लाले पड़ जाएंगे

भारत के इस कदम से चीन को साफ़ संदेश मिल गया है कि यदि उसने घुसपैठ की कोशिशों को लगाम नहीं दिया, तो उसके खिलाफ एक के बाद एक कई अन्य आर्थिक प्रतिबन्ध लगाए जाएंगे. भारत ने यदि आर्थिक बहिष्कार शुरू कर दिया तो चीन की अर्थव्यवस्था को मटियामेट होने में ज्यादा दिन नहीं लगेंगे. जो बड़े-बड़े खतरनाक हथियार, मिसाइल सिस्टम, टैंक, नयी जेनेरशन के लड़ाकू विमान वो बना रहा है, सब भारत से कमाए पैसों से ही बना रहा है.

भारत की ओर से आर्थिक प्रतिबन्ध लगाए गए तो खाने को रोटी तक नसीब नहीं होगी, जंग क्या ख़ाक लड़ेंगे. वैसे आपको बता दें कि इंटर मिनिस्ट्रियल बॉडी फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) ने अप्रैल महीने में इस डील को मंजूरी दे दी थी. जिसके बाद बोर्ड ने CCEA को इस डील को मंजूरी देने की सिफारिश भेजी थी.

लेकिन इसी बीच चीन का दिल डोकलाम पर टिक गया और उसने चुपचाप यहाँ सड़क बनानी शुरू कर दी. जिसके बाद पहले तो भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को वहां से भगाया और बाद में सड़क निर्माण का उनका सामान भी तोड़फोड़ के बॉर्डर के पार फेंक दिया. चीन को चेतावनी दी गयी कि वो डोकलाम को भूल जाए और पीछे हट जाए.

चीन को जब प्यार की भाषा समझ नहीं आयी, तब भारत ने आर्थिक प्रतिबन्ध लगाने के फैसले लेने शुरू किये. डील के रद्द होने के बाद चीनी कंपनी ने भारतीय कंपनी ग्लैंड फार्मा से संपर्क किया. जिसपर उन्हें जवाब दिया गया कि भारत सरकार ने डील को मजूरी देने से साफ़ इंकार कर दिया है. लिहाजा मन मसोस कर चीनी कंपनी पीछे हट गयी.


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