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अभी-अभी : दुनिया ने माना भारत का लोहा, चीन को पीछे छोड़ भारत बना एशिया की सबसे बड़ी ताकत

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नई दिल्ली : चीन को पछाड़कर भारत ब्रिक्स देशों में सबसे ताकतवर बन गया है, ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी. चीन ने चेतावनी दी थी कि ब्रिक्स का इस्तमाल आतंकवाद का मुद्दा उठाने के लिए नहीं किया जा सकता. इसके बावजूद पीएम मोदी ने ना केवल मुद्दा उठाया, वो भी चीन जाकर और साथ ही पहली बार ब्रिक्स घोषणा पत्र में जैश-ऐ-मोहम्मद और लश्कर जैसे पाकिस्तानी आतंकी संगठनों का नाम भी लिया गया.

एशिया की महाशक्ति बना भारत !

चीन पहले भी कई बार जैश के सरगना मसूद अज़हर को यूएन में वैश्विक आतंकी घोषित किये जाने की भारत की कोशिशों में वीटो का अड़ंगा लगाता रहा है लेकिन अब चीन ऐसा नहीं कर पायेगा. चीन नहीं अब दुनिया भारत के साथ खड़ी है, भारत की इस बड़ी कूटनीतिक जीत से चीन को मात देते हुए भारत एशिया की सबसे बड़ी ताकत बन चुका है.

पहले डोकलाम में चीन के साथ सख्त लहजे में बात करते हुए उसे झुकने पर मजबूर किया गया और अब ब्रिक्स में भी पीएम मोदी ने जलवा दिखाया है. चीनी मीडिया और पाक मीडिया में इसे भारत की बड़ी जीत करार दिया गया है. भारत को एशिया की एक महाशक्ति माना जा रहा है. सबसे अहम् बात यहाँ ये भी है कि रूस, जिसे चीन अपना सबसे ख़ास दोस्त मानता था, उसने दोनों ही मौकों पर रूस ने चीन का साथ ना देकर भारत का साथ दिया है.

रूस भी आया भारत के साथ !

डोकलाम में चीन की लाख कोशिशों के बावजूद रूस ने भारत के खिलाफ एक शब्द नहीं कहा और ब्रिक्स में आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया का दूसरा सबसे ताकतवर देश पीएम मोदी के पक्ष में खड़ा है और आतंकवाद का पुरजोर विरोध कर रहा है. भारत के सामने चीन का कद यकीनन छोटा पड़ता दिखाई दे रहा है.


ज़ियामेन में चल रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सभी देशों के नेताओं ने सोमवार को संयुक्त घोषणापत्र जारी किया और इसमें कहा गया है कि ब्रिक्स देश किसी भी प्रकार के आतंकवाद की निंदा करते हैं.

ब्रिक्स ने जैश और लश्कर को माना आतंकी संगठन !

हम इस क्षेत्र में तालिबान, आईएसआईएल / डीएआईएसएच, अल-कायदा और इसके सहयोगी संगठनों, जिनमें हक़्कानी नेटवर्क, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, टीटीपी और हिजब उथ- तहरीर जैसे आतंकी संगठनों की वजह से सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंतित है। हम डीपीआरके (डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया) द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण की घोर निंदा करते हैं.

गौरतलब है कि इससे पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा था कि इस सम्मेलन का इस्तेमाल कूटनीति के मायनों को कायम रखने के लिए होना चाहिए ताकि ‘बेहद गर्म मुद्दो’ को भी सुलझाने में मदद मिल सके, इस सम्मेलन में आतंकवाद या पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे पर कोई बात नहीं होगी.


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