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पीएम मोदी के बारे में आयी ऐसी रिपोर्ट जिसने चीन समेत अमेरिका, रूस तक में मचा दी खलबली !

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नई दिल्ली : 60 सालों तक कांग्रेस राज में बर्बाद हो रहे भारत की तस्वीर बदलती नज़र आ रही है. जहाँ पहले भारत को भ्रष्टाचार और गरीबी के लिए जाना जाता था, वहीँ नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से भारत तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था बनता जा रहा है. अभी-अभी हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट ने चीन समेत सारी दुनिया को सकते में डाल दिया है..

चीन को पछाड़कर ग्लोबल लीडर बना भारत

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि चीन को पछाड़कर भारत वैश्विक आर्थिक विकास की नई धुरी के तौर पर उभर चुका है. रिपोर्ट में ये उम्मीद भी की गयी है कि अगले दस सालों से ज्यादा वक़्त तक भारत अपनी इस स्थिति को बरकरार भी रखेगा.

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर इंटरनैशल डिवेलपमेंट (CID) ने 2025 तक सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में भारत को सबसे ऊपर रखा है. CID के मुताबिक़ इस दौरान भारत की अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से औसतन 7.7 फ़ीसदी की दर से विकास करेगी. रिपोर्ट में ऐसा होने के पीछे कई कारण बताए गए हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि, “वैश्विक आर्थिक विकास की धुरी पर पहले चीन विराजमान था लेकिन पिछले कुछ सालों में ये चीन से खिसककर पड़ोसी देश भारत पहुंच चुकी है. अगले एक दशक से भी ज्यादा वक्त तक ये भारत में ही कायम रह सकती है.” रिपोर्ट में भारत की तेज विकास दर के लिए कई क्षेत्रों में विविधता और क्षमताओं के बेहतर इस्तेमाल को जिम्मेदार बताया गया है.

कच्चे तेल पर निर्भर अर्थव्यवस्थाएं होंगी सुस्त

कहा गया है कि भारत ने अपने एक्सपोर्ट के आधार का विस्तार किया है और कई जटिल क्षेत्रों जैसे केमिकल्स, वीइकल्स और कुछ विशेष इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को इसमें शामिल किया है. वक़्त तेजी से बदलता जा रहा है और जहाँ पहले कच्चे तेल पर निर्भर देश बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरे थे, वहीँ अब तेल पर निर्भर बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट हो रही है, क्योंकि उनकी अर्थव्यवस्था एक ही संसाधन पर निर्भर हैं.


भारत, इंडोनेशिया और वियतनाम ने विविधता के लिए अपनी नई क्षमताओं को विकसित किया है और कई तरह के उत्पादनों के कारण अगले कुछ सालों में उनका विकास तेजी से होगा. CID के मुताबिक भारत, तुर्की, इंडोनेशिया, यूगांडा और बल्गारिया जैसे तेजी से विकास की संभावनाओं वाले देश राजनीतिक, संस्थागत, भौगौलिक और जनसांख्यिकीय सभी आधारों पर विविधता वाले हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़ देशों को 3 मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है. पहली श्रेणी में उन देशों को रखा गया हैं, जो थोड़े से ही सुधार से अपने उत्पादों में विविधता ला सकते हैं. दूसरी श्रेणी में उन देशों को रखा गया है, जिनके पास पर्याप्त क्षमताएं हैं, जिनके इस्तमाल से वो आसानी से अपने उत्पादों में विविधता ला सकते हैं. इस श्रेणी में भारत, इंडोनेशिया और तुर्की भी शामिल हैं.

विकासशील से विकसित देश बनने की दिशा में भारत

तीसरी श्रेणी में उन देशों को रखा गया है, जो पहले से विकसित देश हैं, जैसे जापान, जर्मनी और अमेरिका, जो लगभग हर मौजूदा उत्पादों का उत्पादन करते हैं. इस श्रेणी के देशों की अर्थव्यवस्था धीमी रफ्तार से बढ़ेगी. यानी चीन, अमेरिका, जापान व् जर्मनी जैसे देशों को पछाड़ कर भारत तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है. हालांकि सतही तौर पर अभी इसके फायदे भले ही कम दीखते हों लेकिन पीएम मोदी के ऐतिहासिक फैसलों के परिणामस्वरूप कुछ ही सालों में भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि उभरते हुए बाजारों में तेज विकास की रफ्तार बनी रहेगी. विकास का अनुमान प्रत्येक देश की आर्थिक विविधता पर आधारित है, जिसमें उनकी उत्पादक क्षमताओं की विविधता शामिल है. इससे उसके निर्यात में भी विविधता होगी और आगे चलकर उन्हें अपनी क्षमताओं में और भी अधिक विविधताएं लाने में आसानी होगी. CID रिसर्च करके दुनियाभर के देशों के विकास से जुड़ी चुनौतियों को समझता है और वैश्विक गरीबी की समस्या का हल सुझाता है.


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