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अभी-अभी : मोदी ने दिखाई पाकिस्तान को 56 इंच की ताकत, अफगानिस्तान के साथ मिलकर किया खेल

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नई दिल्ली : पाकिस्तान अपनी नापाक साजिशों से बाज तो नहीं आ रहा है, ऐसे में भारत को ही इसका इलाज करना होगा. अफगानिस्तान और भारत के बीच बन रहे अच्छे सम्बन्ध पाकिस्तान से हजम नहीं हो रहे, इसीलिए पाकिस्तान दोनों देशों के बीच जानबूझ कर अड़ंगे डाल रहा है. पाकिस्तान को लगा कि भारत के बढ़ते कदम वो रोक लेगा लेकिन पाकिस्तान भूल गया कि भारत में कांग्रेस का तख्ता पलट चुका है और मोदी का राज आ चुका है. यहाँ कोई नाकाम प्रधानमंत्री मनमोहन नहीं बल्कि कर्मठ व् जोश से भरे मोदी सत्ता में विराजमान हैं. पीएम मोदी ने पाकिस्तान को पस्त करते हुए एक ऐसी अद्भुत योजना को अंजाम दिया है, दुनियाभर के सभी देश जिसके कायल हो गए हैं.

भारत-अफगानिस्तान के बीच एयर कार्गो कॉरिडोर शुरू

दरअसल जमीन के रास्ते अफगानिस्तान के साथ व्यापार करने में पाकिस्तान बीच में पड़ रहा था और इसी का फायदा उठाते हुए भारत के रास्ते में अड़ंगे लगा रहा था. अफगानिस्तान के साथ व्यापार करने के लिए भारत दिल्ली-काबुल के बीच रोड कॉरिडोर बनाने की कोशिश में था. लेकिन ये हाइवे पाकिस्तान से होकर गुजरता इसलिए भारत की बर्बादी चाहने वाले नापाक देश पाकिस्तान ने इस पर एतराज जताया और मजूरी नहीं दी.

पाकिस्तान नहीं चाहता कि भारत के सम्बन्ध अफगानिस्तान से अच्छे हों, वो तो चाहता है कि अफगान तालिबान का समर्थन करके वो अफगानिस्तान की जमीन पर भी कब्जा कर ले. दिल्ली-काबुल के बीच रोड कॉरिडोर बनने से भारत न केवल काबुल बल्कि अफगानिस्तान से सटे अन्य देशों से भी कारोबारी रिश्ते बेहतर कर सकता था.

मोदी के आगे पाकिस्तान की साजिशें विफल

पाकिस्तान ने अपने देश से होकर गुजरने वाले हाइवे को बनाने की मंजूरी नहीं दी तो भारत ने पाकिस्तान को गच्चा देते हुए एक कदम आगे बढ़ाकर एयर कॉरिडोर ही बना डाला. भारत और अफगानिस्तान के बीच नए हवाई कॉरिडोर की सोमवार को शुरुआत भी हो गई है.

भारत और अफगानिस्तान के डेलिगेशन के बीच “हार्ट ऑफ एशिया” में बायलैट्रल मीट के दौरान सिक्युरिटी, स्टैबिलिटी के अलावा ट्रेड के लिए एयर कॉरिडोर बनाने पर भी बातचीत हुई. अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी भी ट्रेड के लिए एयर कॉरिडोर बनाने के लिए तैयार हो गए. जिसके बाद दोनों के बीच यह सेवा शुरू कर दी गई है.

औषधी के रूप में प्रयोग किए जाने वाले 60 टन अफगान प्लांट लेकर एक एअर क्राफ्ट पहली बार इस कॉरिडोर से भारत पहुंचा. ये कॉरिडोर कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विमान के स्वागत के लिए खुद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज गई थीं. उनके साथ नागर विमानन मंत्री गणपति राजू, विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर और भारत में अफगानिस्तान के राजदूत शाईदा मोहम्मद अब्दाली भी मौजूद थें.

पाक ने रची थी नापाक साजिश

आपको बता दें कि 2010 में पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच ट्रेड एग्रीमेंट हुआ था, जिसमे नापाक पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ शर्त रखी थी कि अफगानिस्तान अपने ट्रक पाकिस्तान के रास्ते का इस्तेमाल करते हुए किसी अन्य देश में नहीं भेज सकता, यानी व्यापार सिर्फ हमसे ही करो, किसी अन्य देश से नहीं. लेकिन भारत ने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों पर पानी फेर दिया है, जिसके बाद पाक मीडिया में छाती पीटने का सिलसिला शुरू हो गया है.

इस कॉर्गो की कीमत 5 मिलियन डॉलर है. अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर इस कॉरिडोर का उद्घाटन करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य बेहतर वाणिज्यिक संबंध बनाना और अफगानिस्तान को निर्यातक देश बनाना है. अफगानिस्तान के कृषि उत्पादों के पहली बार मालवाहक विमान से भारत जाने पर उन्होंने अपनी ख़ुशी जताई.

वहीँ खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बारे में ट्वीट किया. पीएम मोदी ने अपने ट्वीट में कहा कि दोनों देशों के बीच सीधा हवाई संपर्क समृद्धि लेकर आएगा. पीएम मोदी ने इसके लिए अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी को धन्यवाद भी दिया.

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