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भारत-पाक बॉर्डर के पास हुआ बेहद सनसनीखेज खुलासा, खुफिया एजेंसियों समेत मोदी के भी उड़े होश !

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जैसलमेर : भारत के खिलाफ बड़े पैमाने पर साजिशें चल रही हैं. डरावनी बात ये है कि देश के अंदर बैठे गद्दार ही देश के दुश्मनों का साथ दे कर देश को अंदर से तोड़ने की कोशिशों में लगे हुए हैं. ऐसे ही कुछ गद्दारों का खुलासा खुफिया एजेंसियों ने जैसलमेर में भारत-पाक सीमा के नजदीक किया है, जिसने भारत सरकार को हैरानी में डाल दिया है.


बॉर्डर के निकट अवैध मस्जिदों से देश विरोधी साजिश

जैसलमेर में भारत-पाक सीमा के नजदीक व् अन्य सीमावर्ती इलाकों में सुनियोजित तरीके से कुछ मुस्लिम संगठनों द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से मस्जिद बनवाये जा रहे हैं. बिना अनुमति लिए, सरकारी जमीन पर कब्जा करके किये जा रहे ऐसे धार्मिक निर्माण राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा बनते जा रहे हैं.

इस मामले को लेकर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और सीमाजन कल्याण समिति ने चिंता व्यक्त की है. जानकारी के मुताबिक़ शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में भारत-पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय सीमा से केवल 3 किलोमीटर पीछे गैर-कानूनी तरीके से मस्जिद का निर्माण किया गया है, जहाँ हर साल हजारों की तादाद में लोग आने लगे हैं.

पाकिस्तानी जासूसों के लिए सुरक्षित पनाहगार

बॉर्डर के बिलकुल करीब इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जमावड़े पर स्थानीय खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी चिंता व्यक्त की है. इस बारे में एक रिपोर्ट केंद्र की मोदी सरकार के पास भी भेजी गयी है. बड़ा सवाल ये भी है कि इस तरह के अवैध मस्जिदों को खड़ा करने में करोड़ों रुपये खर्च किये गए हैं, इतना पैसा कहाँ से आया और किसने फंडिंग की?

समिति के जिला मंत्री शरद व्यास ने बताया है कि पश्चिमी राजस्थान की पाकिस्तान से सटी 1044 किलोमीटर की सीमा पर पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित घुसपैठ, जासूसी और अन्य राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में बढ़ोतरी हो रही है. पिछले डेढ़ वर्ष में करीब 52 जासूस और पुराने तस्कर पकडे जा चुके हैं, जो पाकिस्तान को भारतीय सेना की संवेदनशील गुप्त जानकारियां भेजते थे.

ऐसे जासूस व् देश के दुश्मन आमतौर पर ऐसे ही अवैध निर्माणों में पनाह पाते हैं. व्यास ने बताया कि जैसलमेर के सीमावर्ती इलाकों में राजस्व और गैर राजस्व गांवों में अवैध तरीके से कई मस्जिदों का निर्माण बड़े पैमाने पर करवाया जा रहा है.

करोड़ों की फंडिंग के स्रोतों की जांच

इस भीड़ में कुख्यात तस्करों और देश विरोधी तत्वों के आने की संभावना को देखते हुए बीएसएफ ने ये मामला कुछ दिन पहले इंटेलीजेंस की बैठक में प्रमुखता से उठाया है. जिला कलेक्टर को भी इस बारे में जानकारी दी गयी है. इसके अलावा सीमाजन कल्याण समिति ने राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे को भी इसकी जानकारी देने के लिए पत्र लिखा है.

सबसे ज्यादा हैरानी की बात ये भी है कि इस साजिश में कुछ सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं. ये अवैध मस्जिद सरकारी पैसे से ही बनवायी जा रही हैं. जानकारी के मुताबिक़ सीमा के निकट हरनाउ ग्राम पंचायत के मांधला इलाके में पिछले कुछ वर्षों में मस्जिद खड़ा कर लिया गया.

अब इसमें धर्मशाला जैसा परिसर बनाये जाने का काम चल रहा था, मगर अवैध निर्माण की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने उपखण्ड अधिकारी व तहसीलदार के साथ पुलिस को मौके पर भेजकर मामले की जांच करवाई और निर्माणकार्य अवैध पाया गया. जिसके बाद इसे रुकवा दिया गया.


कब्रिस्तान के नाम पर लिया पैसा, मगर बना लिया मस्जिद

जिला कलक्टर के.सी. मीणा ने जानकारी दी कि किसी भी धार्मिक स्थल पर निर्माण करने से पहले जिला कलक्टर से अनुमति लेनी होती है लेकिन भारत-पाक सीमा पर हो रहे इस निर्माण कार्य के लिए किसी प्रकार की कोई अनुमति नहीं ली गई थी.

जिला कलेक्टर के.सी. मीणा ने यह भी बताया कि इस मस्जिद में चल रहे अवैध निर्माण को महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत साजिशन करवाया जा रहा था. ग्राम पंचायत के भ्रष्ट व् देश विरोधी अधिकारियों ने नरेगा में कब्रिस्तान की चारदिवारी के नाम से कार्य को स्वीकृत करवाया और उसकी जगह मस्जिद के अंदर धर्मशाला बनवाने में जुट गए.

बहरहाल अब उपखण्ड अधिकारी और तहसीलदार को इस पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंप दी गयी है. कार्य की स्वीकृति से लेकर अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार लोगों व् अधिकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा.

ऐसे शुरू होता है ये अवैध धार्मिक निर्माण

बीएसएफ ने सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों की मीटिंग में खुलासा किया है कि साजिश के तहत बॉर्डर के नजदीक के इलाकों में कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन पहले तो सरकारी जमीन पर कब्जा करते हैं. इसके लिए सड़कों के दोनों तरफ कुछ इलाके को पहले तारबंदी से घेरा जाता है, इसके बाद चोरी-छिपे वहां मस्जिद निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाता है.

इसके बाद इस तरह की अवैध मस्जिद का प्रचार किया जाता है जिससे हर महीने वहां हजारों मुस्लिम उमड़ते हैं और सैकड़ों गाड़ियां बीएसएफ के 2-2 गेट से गुजरते हुए वहां पहुंचती है. इसी भीड़ का फायदा उठाकर देश विरोधी तत्व भी यहाँ पनाह पा लेते हैं.

 

पुलिस अधीक्षक ने मानी अवैध निर्माण की बात

जैसलमेर पुलिस अधीक्षक गौरव यादव ने बताया है कि उनके पास भी खुफिया एजेंसियों ने रिपोर्ट भेजी है, जिसके मुताबिक़ बॉर्डर के निकट के इलाकों में धार्मिक स्थल के नाम पर अवैध निर्माण कार्य हो रहा है. हालांकि फिलहाल जिला प्रशासन ने कार्यवाही करते हुए निर्माण कार्य को रुकवा दिया है.

दरअसल पाकिस्तान किसी भी सूरत में भारत को सुख-चैन से रहने नहीं देना चाहता. शर्म की बात ये भी है कि अपने ही देश के खिलाफ कुछ कट्टरपंथी संगठन पाकिस्तान का साथ देते हैं. मस्जिद के नाम पर बॉर्डर के करीब इस तरह के अवैध निर्माण पाकिस्तान के इशारे पर इसलिए किये जा रहे हैं ताकि यहीं पाकिस्तानी जासूस छिपे रहें और भारतीय सेना की गुप्त जानकारियां पाकिस्तान भेजते रहें.

इन्हे पता है कि मस्जिद में सेना अथवा पुलिस आसानी से घुस कर तालाशी नहीं ले सकती, लिहाजा अवैध मस्जिदों को खड़ा किया जा रहा है. बहरहाल अब जबकि मामला खुल गया है तो ऐसे अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गयी है.


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