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पीएम मोदी राज में केजरीवाल की अक्ल आयी ठिकाने, अपने ही अधिकारियों ने दिन में दिखाए तारे


नई दिल्ली : ये सुनकर भले ही आपको अजीब लग सकता है पर दिल्ली सरकार के ही एक प्रवक्ता ने ऐसा बड़ा खुलासा किया है जिसके मुताबिक दिल्ली में सारे सरकारी कामकाज ठप्प पड़ जायेंगे. आये दिन एक के बाद एक भ्रष्टाचार के आरोप दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल पर लग रहे हैं और ना जाने कितनी उन पर FIR दर्ज़ हो चुकी हैं. कई मानहानि केसे में वो बेल देकर छूटे हैं और आये दिन कोर्ट के चक्कर लगाते रहते हैं. इसी के चलते केजरीवाल पर अब नए संकट के बादल मंडरा रहे हैं.

अरविन्द केजरीवाल ने 10-12 अधिकारियों से मांगी मदद, सबने कर दिया काम करने से मना

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक दिल्ली सचिवालय के तीसरे फ्लोर पर स्थित सीएम अरविंद केजरीवाल के दफ्तर में कुछ वक़्त में ही एक भी अफसर नहीं होगा.जिसका मतलब यह है कि दिल्ली में सभी सरकारी कामकाज ठप्प पड़ जायेंगे. सीबीआई ने अरविन्द केजरीवाल के अफसरों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया है साथ ही आये दिन सचिवों से सीबीआई पूछताछ कर रही है. इस डर से कोई भी अरविन्द केजरीवाल के साथ काम नहीं करना चाह रहा है.


कुछ सरकारी अफसर जेल में तो कुछ निलंबित तो कुछ ने दे दी छुट्टी की अर्ज़ी

केजरीवाल के दफ्तर में तैनात दो अफसर प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार और पूर्व डिप्टी सेक्रेटरी तरुण शर्मा ये दोनों ही अफसर केजरीवाल के करीबी माने जाते थे. सीबीआई ने 2016 में इन दोनों को अपने पद का दुरुपयोग करके एक खास कंपनी को फर्म्स को टेंडर दिलाने में किया था जिसके चलते इन्हे गिरफ्तार कर ‌लिया गया था. यही नहीं अन्य तीन अधिकारियों ने अपने ट्रांसफर करने की गुज़ारिश कर दी है. यही नहीं एक और अधिकारी दीपक विरमानी 2016 में केजरीवाल के सचिव बने थे उन्होंने एक साल की स्टडी की छुट्टी की अर्ज़ी लगा दी है. सुकेश कुमार जो 1992 के बैच के आईएएस अधिकारी 2015 में केजरीवाल के सचिव थे इन्होने केंद्र से अर्ज़ी लगायी है की उन्हें वापस पुराने पद पर भेजा जाए वे केजरीवाल के साथ काम नहीं कर सकते.

सीएम अरविन्द केजरीवाल के दफ्तर में पसरा है सन्नाटा और सूनापन

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में अरविन्द केजरीवाल के साथ काम करने से एक दर्ज़न से ज़्यादा अधिकारियों ने साफ़ इंकार कर दिया है. उन्हें डर लगता है कि वे भी सीबीआई के रडार पर आ सकते हैं, क्यूंकि इससे पहले भी सीबीआई उनके अधिकारियों को निलंबित करवा चुकी है. दिल्ली सरकार के ही एक प्रवक्ता ने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो सीएमओ दफ्तर में केवल 3 – 4 सदस्य बचेंगे और वे भी नौकरशाह नहीं होंगे. राज्य की  सारी नीतियां और कामकाज नौकरशाहों के हाथ में ही रहता है. ऐसे में सारा कामकाज बंद हो जायेंगे.


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