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अब हैदराबाद कोर्ट ने पीएम मोदी की इस मुहीम पर लगायी मोहर, विरोधी नेताओं ने मनाया मातम

हैदराबाद : मोदी सरकार के मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबन्ध वाले कानून के लाते ही जैसे पूरे देशभर में एक गौ हत्या पर प्रतिबन्ध लगाने और गाय को राष्ट्रिय पशु बनाने की मुहीम सी चल पड़ी है. देश के कोने कोने से गौ की हत्या पर रोक लगाने के लिए आवाज़ उठ रही है. अभी कुछ वक़्त पहले केरल हाई कोर्ट के जज ने पीएम मोदी के फैसले का समर्थन किया था. वही राजस्थान हाई कोर्ट के जज ने भी गाय को राष्ट्रिय पशु बनाने के लिए सुझाव दिया था. इसी सिलसिले में अब हैदराबाद कोर्ट के जज ने भी गाय को लेकर पीएम मोदी के समर्थन में निर्देश दिए हैं.

मां और भगवान के समान है गाय – बोले हैदराबाद हाईकोर्ट के जज

राजस्थान हाई कोर्ट जज के गाय को राष्ट्रिय पशु घोषित करने की बात कहने के बाद अब ताज़ा खबर हैदराबाद से आ रही है. शुक्रवार को हैदराबाद हाई कोर्ट के एक जज ने गाय को लेकर बड़ी बात कह दी है. न्यायमूर्ति बी शिवा शंकर राव ने कहा है कि वे इस बात का पूरी तरह समर्थन करते हैं कि गाय को राष्ट्रिय पशु का दर्ज़ा मिलना ही चाहिए. आगे उन्होंने कहा कि गाय सिर्फ एक पशु नहीं है, गाय एक माँ है. गाय देश की एक पवित्र धरोहर है, गाय , माँ, और भगवन तीनों एक सामान है.

दरअसल जज ने यह बात पशु व्यापारी रामावत हनुमा की हाई कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा. रामावत ने अपनी जब्त हुई 63 गायों की वापसी के लिए निचली अदालत में गुहार लगायी थी, लेकिन निचली अदालत ने भी उसकी मांग को ठुकरा दिया था. रामावत हनुमा का कहना है कि वह गायों को चराने के लिए अपने गांव के पास कंचनपल्ली गांव लेकर गया था. जबकि दूसरे पक्ष का कहना है रामावत गायों को बेचने के लिए ले जा रहा था, ताकि बकरीद के दौरान गौमांस बेच सके.

न्यायमूर्ति बी शिवा शंकर राव ने रामावत की अपील को ख़ारिज कर दिया, साथ ही सुप्रीम कोर्ट का आदेश सुनाया जिसमे कहा गया है कि मुस्लिमों को बकरीद के मौके पर हष्टपुष्ट स्वस्थ गायों को मारकर उनका मांस खाने का कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है. इसके बाद जज ने सख्त लहजे में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के जानवरों का इलाज करने वाले डॉक्टरों को फटकार लगायी और कहा कि स्वस्थ गायों को दूध देने में असमर्थ बताने वाले डॉक्टरों पर भी कड़ी कार्रवाई होगी.

बाबर ने भी गौ हत्या पर पाबन्दी लगायी थी

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में जब तक डॉक्टरों द्वारा यह सर्टिफिकेट ना दे दिया जाए कि गाय अब दूध दे सकने में समर्थ नहीं हैं, तब तक गाय को मारा नहीं जा सकता.एपी काउ स्लॉटर ऐक्ट 1977 में संशोधन के बाद से अब इस अपराध को गैरजमानती और गंभीर माना जाएगा. आंध्र प्रदेश में केवल बूढी और दूध न दे पाने वाली गाय को मारने की इजाज़त है. जज शिवा शंकर राव ने बाबर का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने भी गौहत्या पर पाबंदी लगाई थी. जज ने कहा कि बाबर ने अपने बेटे हूमायूं को भी ऐसा ही करने को कहा था. जज ने कहा कि यहाँ तक कि अकबर, जहांगीर और अहमद शाह ने भी गौहत्या पर पाबंदी लगवाई थी.

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