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कश्मीर में आतंक की फंडिंग का सबसे बड़ा स्टिंग ऑपरेशन, हुआ ऐसा खुलासा जिसे देख उड़े सरकार के होश

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नई दिल्ली : शोले फिल्म में गब्बर सिंह ने बसंती से कहा थां कि, जब तक तुम्हारे पैर चलेंगे तब तक इसकी सांसें चलेंगी. लेकिन कश्मीर के अलगाववादियों का कहना है कि जब तक उन्हें काला पैसा मिलता रहेगा, तब तक वो कश्मीर की सड़कों पर खून की होली खेलते रहेंगे, देश से गद्दारी करते रहेंगे. ये खुलासा हुआ है इंडिया टुडे के स्टिंग ऑपरेशन में, जिसे देख देशभर के लोगों का खून खौल उठा है.

दरअसल इंडिया टुडे के अंडर कवर रिपोर्टर्स ने इसका खुलासा करने के लिए हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के गिलानी धड़े के प्रांतीय अध्यक्ष से संपर्क किया और उससे अलगाववादियों को फंडिंग करने की इच्छा जताई. नईम खान को पैसे का इस कदर लालच था कि वो फ़ौरन झांसे में आ गया और अंडर कवर रिपोर्टर्स से मिलने आनन्-फानन में दिल्ली आ गया.

इसके बाद रिपोर्टर्स के खुफिया कैमरे के सामने नईम खान ने एक-एक करके अपनी और अपने साथियों की पोल-पट्टी खोल डाली. नईम खान ने बताया कि पाकिस्तान पिछले 6 सालों से कश्मीर में बड़े पैमाने पर हिंसा व् अलगाववाद के प्रदर्शन करवाने की कोशिश कर रहा है.

नईम ने दावा किया कि पाकिस्तान कश्मीर में अपने नापाक मंसूबे को पूरा करने के लिए अब तक सैकड़ों करोड़ रुपये से ज्यादा झोंक चुका है, इन्ही पैसों के लिए अलगाववादी पाकिस्तान की कठपुतलियों बनकर देशद्रोह और देश को तोड़ने का काम करते हैं.

हालांकि कश्मीरी लोगों के हमदर्द बनने का दिखावा करने वाले अलगाववादी पैसों के इतने भूखे हैं की उन्हें अभी अपने पाकिस्तानी आकाओं से और पैसा चाहिए. स्टिंग में खुलासा हुआ कि कैसे अलगाववादी अपने पैसों की हवस को मिटाने के लिए घाटी में भाड़े के पत्थरबाजों द्वारा हिंसा का नंगा नाच करवा रहे हैं.

पाकिस्तान में बैठे दहशत के आका कश्मीर को सुलगाने के लिए हाल-फिलहाल में 400 करोड़ रुपये और झोंक चुके हैं. नईम खान ने कालेधन को सफ़ेद करने के इस्लामाबाद के तरीके के बारे में भी बताया. ऐसा पहली बार हुआ है, जब एक कश्मीरी अलगाववादी ने कैमरे के सामने उन्हें मिलने वाली फंडिंग और उसके तरीके का खुलासा किया है.

फंडिंग के लालच में फंस कर नईम खान ने अलगाववादियों की फंडिंग के रास्ते का भी खुलासा कर दिया. उसने बताया कि अलगाववादियों को फंडिंग सऊदी अरब और कतर जैसे मुस्लिम देशों के रास्ते से की जाती है. उसने बताया कि ये पैसा मुस्लिम देशों के रास्ते दिल्ली के बल्लीमारान और चांदनी चौक से ऑपरेट कर रहे हवाला कारोबारियों तक और उनसे कश्मीरी अलगाववादियों तक पहुँचता है. ये हवाला कारोबारी कश्मीर तक पैसा पहुंचाने के लिए बाकायदा मोटा कमीशन लेते हैं. यानी कमीशन में मिले पैसों के लिए देश में बैठे ये गद्दार जिस देश में रहते हैं उसी को बेच डालते हैं.


नईम खान ने बताया कि पाकिस्तान के फंड मैनेजर सीमा की जगह दिल्ली के रास्ते इन हवाला के एजेंटों के जरिये से पैसे भेजना ज्यादा सुरक्षित मानते हैं. जाहिर सी बात है कि सीमा पर बीएसएफ और सेना इनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे, हालांकि राज्य के अंदर पुलिस व् प्रशासन में बैठे कुछ लोगों को खरीद लेना काफी आसान है. राज्य के पुलिस की नाक के नीच ये सब चल रहा हो और अधिकारियों को इसकी खबर ना हो ये तो हो ही नहीं सकता.

कैमरे के सामने नईम खान शेखी बघारते हुए बताया कि कश्मीर में पिछले 1 साल में कई स्कूलों समेत कई सरकारी इमारतों में जो आग लगाई गयी उन सब के पीछे हुर्रियत के अलगाववादियों का ही हाथ था. तहरीक ए हुर्रियत के नेता नईम खान ने दावा किया कि जब तक अलगाववादियों के पास पैसा आता रहेगा, वो ऐसे ही घाटी में मौत का नंगा नाच करवाते रहेंगे, वहां के हालात कभी सुधरने नहीं देंगे. अलगाववादियों को अच्छी तरह पता है कि कश्मीरी सरकार कभी उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेगी, ना ही केंद सरकार उनके खिलाफ कोई सख्त एक्शन लेंगे. यदि कोई एक्शन लिया भी तो देश में उच्च पदों पर बैठे अलगाववादियों के समर्थक उनके बचाव के लिए झंडे लेकर मानवाधिकारों की दुहाई देने लगेंगे और सरकार को ही गाली देंगे.

नईम खान ने कहा कि यदि पाकिस्तान से 300-400 करोड़ रुपये और आ जाते हैं तो कश्मीर की सड़कों पर हिंसा को 3 महीने तक और जारी रखा जा सकता है. उसने ये भी बताया कि हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी खुद लश्कर के सरगना हाफिज सईद के साथ संपर्क में है.

उसने खुलासा किया कि लश्कर ए तैयबा संगठन ही गिलानी को पैसा भिजवाता है. उसके बताया कि पिछले कुछ वक़्त में कश्मीर में हिंसा के मामलों में तेजी लाने के लिए हाफिज सईद ने इन अलगाववादियों की फंडिंग में भारी इजाफा किया है. उसने बताया कि कैसे कालाधन पहले गिलानी के पास पहुँचता है और गिलानी से होते हुए मीर वाइज उमर फारुक और यासीन मलिक जैसे सीनियर अलगाववादी नेताओं तक भी पहुंच जाता है.

हालांकि इन खुलासों के बाद ये साफ़ है कि पाकिस्तान आतंकी की फंडिंग करता है और भारत को पाकिस्तान के साथ सभी स्तर की बातचीत ख़त्म करते हुए उसके साथ सभी व्यापारिक समझौतों को भी ख़त्म करना ही पडेगा. पाकिस्तान को दिए गए मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा ख़त्म करते हुए पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करना ही होगा.

देश से और कश्मीर से आतंक को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए अलगाववादियों को आतंकी घोषित करके इनपर प्रतिबन्ध लगाना ही होगा. हिंसा फैलाने वालों की फंडिंग करने वालों को मृत्यु दंड जब तक नहीं दिया जाएगा तब तक ये समस्या ऐसे ही सर उठाये रहेगी. अलगाववादियों, आतंकियों और पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई में सरकार की आलोचना करने वाले देशद्रोहियों की पहचान करके उनके खिलाफ सख्त जांच करके उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचा ही होगा. जब तक सख्त करवाई नहीं की जाती तब तक घाटी में हिंसा का सिलसिला चलता ही रहेगा और धीरे-धीरे कश्मीर भारत के हाथ से फिसलता चला जाएगा.


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