Home > ख़बरें > अखिलेश, मुलायम और एनडीटीवी, यूपी में हुए अरबों के खुलासे ने योगी समेत मोदी के भी उड़ाए होश

अखिलेश, मुलायम और एनडीटीवी, यूपी में हुए अरबों के खुलासे ने योगी समेत मोदी के भी उड़ाए होश

ndtv-kamal-khan

नई दिल्ली : टीवी पर मानवता और आदर्श की बातें करने वाले एनडीटीवी के पत्रकारों की असलियत सामने आने लगी है. एनडीटीवी के लखनऊ के संवाददाता कमाल खान को लेकर हैरतअंगेज खुलासा हुआ है, जिसे देख आपके पैरों तले जमीन खिसक जायेगी. लखनऊ से प्रकाशित पत्रिका दृष्टांत ने कमाल खान के बारे में चौंकाने वाले खुलासे किये हैं, जिन्हे देख आप भी सोच पड़ जाएंगे कि जब संवाददाता ऐसा है तो मालिक कैसे होंगे?

बड़े-बड़े धन्ना सेठों से ज्यादा अमीर हो गए एनडीटीवी के कमाल खान !

खुलासा हुआ है कि पेशे से संवाददाता, कमाल खान ने मुलायम सिंह सरकार से लेकर अखिलेश सरकार तक के बीच में लखनऊ में करोड़ों रुपये की प्रॉपर्टी खड़ी कर ली है. कमाल खान की हिंदू पत्नी रुचि कुमार, जो इंडिया टीवी के लिए रिपोर्टिंग करती हैं, वो भी इस सरकारी लूट में बराबर की हिस्सेदार बतायी जाती हैं. ईमानदारी और जनता से जुड़ी पत्रकारिता के नाम पर कमाल खान और उनकी पत्नी मुलायम और अखिलेश सरकार के लिए पूरी वफादारी से ख़बरें छापते रहे और बदले में मलाई खाते रहे. सूत्रों के मुताबिक़ कमाल अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली में एनडीटीवी के मैनेजमेंट तक भी पहुंचाते रहे.

मुलायम की कृपा से लखनऊ के पॉश इलाके में मिले 2-2 प्लॉट !

नियमों के मुताबिक राज्य की मान्यता वाले पत्रकार को सरकार द्वारा एक प्लॉट दिया जा सकता है, लेकिन मुलायम सरकार से सांठ-गाँठ करके कमाल ने लखनऊ के गोमती नगर में (भवन संख्या 1/97 विराज खंड और 1/315 विकल्प खंड) दो प्लॉट कौड़ियों के भाव पर हथिया लिए, जबकि यूपी सरकार के नियमों के अनुसार जमीन या सरकारी घर की सुविधा केवल अखबार के पत्रकारों के लिए होती है, ना कि टीवी के पत्रकारों के लिए.

ये प्लॉट इस नाम पर दिए गए ताकि सरकारी आवासों में रह रहे पत्रकार उन्हें खाली कर दें, जिससे ये सरकारी आवास जरूरतमंद सरकारी कर्मचारियों को दिए जा सकें. लेकिन भ्रष्टाचारी के दलदल में गले तक डूबे कमाल और उनके जैसे कई पत्रकारों की भूख नहीं मिटी. कमाल ने दो प्लॉट हथियाने के बाद भी बटलर पैलेस में अपने सरकारी मकान को खाली नहीं किया.

लखनऊ के पास दो बड़े फार्महाउस !

केवल इतना ही नहीं, महज एक संवाददाता कमाल खान के पास बाकायदा एक बड़ा फार्महाउस भी है. लखनऊ के पास मोहनलालगंज से कुछ ही दूरी पर हाइवे से सटे गौरा गांव में गाटा संख्या 1458 कमाल खान और उनकी पत्नी रुचि कुमार के नाम से दर्ज है. बता दें कि ये जमीन लगभग तीन बीघा है. इससे ठीक अगली गाटा संख्या 1459 भी कमाल खान और उनकी पत्नी रुचि कुमार के नाम पर दर्ज है. ये जमीन भी लगभग तीन बीघे के करीब है.

जमीन के मामले में भी बड़ा गड़बड़ झाला है. क्योंकि दस्तावेजों के आधार पर तो इन दोनों के नाम करीब 6 बीघा जमीन है लेकिन मौके पर देखने पर पता चलता है कि इन्होने कुल 10 बीघा जमीन पर कब्जा किया हुआ है. बता दें कि ये दोनों ही कमाल खान के फार्म हाउस हैं.


दस्तावेजों के मुताबिक़ केवल गौरा गांव में ही कमाल खान के पास लगभग 10 से 12 करोड़ की जमीन है. रिपोर्ट के मुताबिक़ ये दोनों फार्महाउस कमाल को शिवपाल यादव की कृपा से मिले हैं. हालांकि अवैध तरीके से कमाल को जमीन देने का गांव के किसानों ने भारी विरोध किया था, मगर शिवपाल ने अपना मंत्री पद का रौब दिखाकर सबके मुंह बंद करवा दिए थे.

कलम को किराए पर देते ही आयी ‘समाजवादी कृपा’ !

पत्रिका की रिपोर्ट के मुताबिक़ कमाल को जमीन देने के बाद से पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव की कृपा इस गाँव पर ऐसी बरसी कि उस इलाके की ऊबड़-खाबड़ सड़कों को चमचमाती इंटरलाकिंग टाइल्स लगी चिकनी सड़क बना दिया गया. मगर वो केवल फ़ार्म हाउस वालों के लिए, गरीब गाँव वालों के इस्तमाल की सड़क आज भी वैसी ही टूटी-फूटी ही है.

गांववालों से बात करने पर पता चला कि चमचमाती बाउंड्री वॉल में जो हरे रंग के लोहे के दरवाजे लगे हैं, वो कमाल खान का फार्म हाउस है. फार्म हाउस के अंदर केले की खेती लहलहा रही है. फार्म हाउस के केयरटेकर से बात करने पर पता चला कि यहाँ 8 बीघा जमीन पर तो केवल केले की खेती होती है. बाकी खाली जमीन यूं ही पड़ी है. यहाँ ये भी सोचने वाली बात है कि जब दस्तावेजों के आधार पर कमाल के नाम केवल 6 बीघा जमीन ही है, तो फिर बाकी कि 4 बीघा जमीन किस की है, जिस पर कमाल कब्जा करे बैठे हैं?

फर्जी कंपनी में भी हैं हिस्सेदार !

केवल इतना ही नहीं, कमाल और उनकी पत्नी रुचि कुमार के नाम मोहनलालगंज तहसील के पुरसेनी गांव में भी जमीनें हैं. अपनी इन जमीनों को उन्होंने केएपीएस ट्रेडिंग कंपनी प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी को इस्तमाल के लिए दिया हुआ है. मजे की बात ये है कि इस कंपनी में संवाददाता कमाल खान, उनकी पत्नी और एक अन्य वरिष्ठ पत्रकार शरत चंद्र प्रधान बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में भी शामिल है.

ये कंपनी अंबरीश अग्रवाल के नाम से है. ये तो कुछ भी नहीं, बताया जाता है कि कमाल खान की ये संपत्ति तो बस शुरुआत भर है, इनके पास यूपी के कई अन्य इलाकों में भी काफी जमीन-जायदाद है. तो अब आप समझ ही गए होंगे कि नेताओं के चरणों में पत्रकारिता को गुलामी के तौर पर रख देने से कितनी गाढ़ी कमाई हो सकती है. आपको पता चल ही गया होगा कि आखिर क्यों लाख भ्रष्टाचार करने वाले नेताओं की तरफदारी करने से कुछ पत्रकार पीछे नहीं हटते?


इस न्यूज़ को अपने मित्रों के साथ शेयर करना न भूलें। आपकी सुविधा के लिए शेयर बटन्स नीचे दिए गए हैं।
सब्सक्राइब करें हमारा यू-ट्यूब चैनल


हिंदी न्यूज़ से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें


फेसबुक पेज लाइक करें

loading...

Comments