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मार्शल अर्जन सिंह के अंतिम संस्कार के दौरान कांग्रेस ने जो किया, उसे देख गुस्से से भड़क उठेंगे आप !

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नई दिल्ली : अभी दो दिन पहले ही, भारतीय वायु सेना में सर्वोच्च रैंक मार्शल हासिल करने वाले एकमात्र सेनानी अर्जन सिंह का दिल्ली में सेना के अस्पताल में निधन हो गया. वो भारतीय वायुसेना के पहले और एकमात्र ऐसे अफसर थे, जिन्हे 5 स्टार रैंक से नवाजा गया था. पाकिस्तान के खिलाफ 1965 की जंग में उनकी शानदार भूमिका के लिए उन्हें नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था.


कांग्रेस के ज्यादातर वरिष्ठ नेता अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे !

जैसे ही उनकी मृत्यु की खबर आयी, हर भारतीय ने उनकी निस्वार्थ सेवा के लिए आभार व्यक्त करते हुए उनकी दिवंगत आत्मा के लिए श्रद्धांजलि अर्पित की. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण और सशस्त्र बलों के प्रमुख भी उन्हें अंतिम सम्मान देने उनके घर गए. भारत सरकार की ओर से घोषणा की गयी कि अर्जन सिंह का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा और उनके सम्मान में यहां सोमवार को सभी सरकारी इमारतों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका दिया जाएगा.

मगर बेहद शर्म की बात है कि राहुल गांधी समेत कांग्रेस के ज्यादातर वरिष्ठ नेता अर्जन सिंह के अंतिम संस्कार में श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचे. हालांकि देश के कुछ टुच्चे नेता इस दुखद मौके पर भी राजनीति करने से बाज नहीं आये. भारतीय सेना को नापसंद करने के लिए प्रसिद्द सीताराम येचुरी ने कल ट्वीट किया कि भारत सरकार ने मार्शल अर्जन सिंह को उचित सम्मान नहीं दिया और सरकार से सवाल किया कि उन्होंने राष्ट्रीय शोक घोषित क्यों नहीं किया.

वैसे यदि ये सवाल अच्छी नीयत से उठाया गया होता तो जरूर स्वागत योग्य था, लेकिन इन नेताओं की दोगलापंथी से सारा देश वाकिफ है. जब 8 जून 2008 को फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ का निधन हुआ था, उस वक़्त कांग्रेस के किसी भी प्रमुख व्यक्ति या कांग्रेस के किसी सहयोगी ने उनके अंतिम संस्कार में भाग नहीं लिया था.

फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के अंतिम संस्कार की भी की थी अनदेखी !

सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात तो ये थी कि तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी पाटिल, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, रक्षा मंत्री एके एंटनी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कोंग्रेसियों के महान सलाहकार सीताराम येचुरी, जो उस वक़्त सरकार के सहयोगी थे, इनमे से कोई भी उनके अंतिम संस्कार में उपस्थित नहीं हुआ और ना ही उस महान सम्मान सैनिक को सम्मान दिया, जिसने देश की सेवा करने के लिए अपना पूरा जीवन खपा दिया था.

मनमोहन सिंह भी जब पीएम थे, उस वक़्त फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ के अंतिम संस्कार में तो शामिल नहीं हुए, मगर स्वर्गीय अर्जुन सिंह के अंतिम संस्कार में आ गए. क्यों? राजनीतिक फायदे के लिए? जो व्यक्ति जब प्रधानमंत्री था, तब अंतिम सम्मान के लिए 5 मिनट तक नहीं दिए और अब राजनीतिक फायदे के लिए चले आये मुँह दिखाने? ये सरकार की जिम्मेदारी थी कि वो फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ को उचित सम्मान देती लेकिन मनमोहन सिंह सत्ता के नशे में सब भूल बैठे?

यहाँ तक कि राहुल गांधी, जो खुद को कांग्रेस के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश करते हैं, वो भी मार्शल अर्जन सिंह को अंतिम सम्मान देने के लिए 10 मिनट का भी वक़्त नहीं निकाल पाए. केवल ट्विटर पर एक ट्वीट कर दिया और राहुल गाँधी की अज्ञानता का आलम ये है कि उसे ये तक नहीं पता कि स्वर्गीय अर्जन सिंह की सेना में क्या रैंक थी. राहुल ने अपने ट्वीट में उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए एयर मार्शल कह दिया.


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