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ब्रेकिंग – जम्मू कश्मीर से आयी बेहद हैरान कर देने वाली खबर, अलगाववादियों समेत पत्थरबाज भी हैरान

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नई दिल्ली : वो कश्मीर के नौजवानों को बहला-फुसला कर मौत के रास्ते पर ले जाता था. सेना के कमांडो की वर्दी पहनकर फोटो खिंचवाना और सोशल मीडिया में पोस्ट करना उसका शौक था. लेकिन खुद को एक खूंखार आतंकी की तरह दिखाने वाला बुरहान वानी का वारिस सबजार अहमद जंग के मैदान में भीगी बिल्ली निकला. दरअसल दक्षिणी कश्मीर के त्राल में सबजार के एनकाउंटर के दौरान मौजूद लोगों ने जो खुलासा किया है, वो बेहद चौंकाने वाला है.


एनकाउंटर के दौरान मौजूद लोगों के मुताबिक़ सबजार के पास कलाश्निकोव राइफल तो थी लेकिन सिर्फ मासूम लोगों को डराने के लिए. उसे चलाने का जिगरा उसके पास था ही नहीं, वो जानता था तो बस सोशल मीडिया के जरिये अपना डर फैलाना.

एक भी गोली नहीं चला पाया सबजार

लोगों के मुताबिक़ शनिवार को हुए एनकाउंटर के दौरान सबजार डर के मारे पूरे 10 घंटे खामोशी के साथ छुपा बैठा रहा. वो इस दौरान एक भी गोली चलाने की हिम्मत नहीं जुटा सका, बल्कि अपनी जान बचाने की हर मुमकिन कोशिश करता रहा. जान बचाने के लिए सबजार ने अपने मोबाइल फोन से कई संदेश भेजे ताकि पत्थरबाजों को वहां बुलाया जा सके और एनकाउंटर प्रक्रिया को बाधित किया जा सके.

ऐसे हुआ सबजार के ठिकाने का खुलासा

त्राल के घने जंगलों में किसी को खोज पाना बेहद मुश्किल काम होता है, ऐसे में जम्मू-कश्मीर पुलिस की टेक्निकल इंटेलिजेंस यूनिट ने सुरक्षा बलों को सबजार के छिपे होने के बारे में जानकारी मुहैय्या कराई. खुफिया जानकारी से पता चला कि सबजार और उसका साथी फैजान साइमोह गांव के घरों में छिपे हुए हैं. जानकारी मिलते ही सुरक्षाबलों ने इन घरों को चारों ओर से घेर लिया. इस ऑपरेशन में सेना के अलावा स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप और राज्य पुलिस के जवान शामिल थे.

दिया गया था सरेंडर का मौका

सबजार और फैजान की घेराबंदी के बाद सुरक्षाबलों ने उनसे सरेंडर करने को भी कहा, लेकिन कोई जवाब नहीं आया. सुरक्षाबलों ने पूरी सावधानी बरती क्योंकि सबजार और फैजान के पास एके-47 और इंसास राइफल्स समेत बड़ी तादाद में हथियार और रसद मौजूद थे और वो गोलीबारी कर सकते थे लेकिन हैरानी की बात थी कि किसी ने कोई गोली भी नहीं चलाई बस जान बचाने के लिए छुपकर बैठे रहे और पत्थरबाजों को बुलाने की कोशिश करते रहे.


जब दोनों आतंकियों ने कोई जवाब देना जरुरी नहीं समझा तो सुरक्षाबलों ने मौके पर दमकल की गाड़ियां मंगवाई जिनमे पानी की जगह पेट्रोल भरा हुआ था.

पत्थरबाज भी नहीं आये काम

ऑपरेशन के दौरान सबजार और फैजान लगातार फोन पर पत्थरबाजों को बुलाने की कोशिश करते रहे, लेकिन देर रात का वक़्त होने के कारण कोई उनकी सहायता के लिए नहीं आया. ऑपरेशन के बाद उनके संदेशों से पता चला कि दोनों को सामने अपनी मौत नज़र आ गयी थी और मौत का खौफ उनके मन पर हावी हो चुका था.

सुरक्षाबलों ने दमकल गाड़ियों से पहले घर पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी, लेकिन दोनों आतंकियों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. इसके बाद दूसरे घर को भी आग के हवाले किया गया लेकिन तब भी आतंकियों ने कोई हरकत नहीं की. उसके बाद सुबह करीब सवा आठ बजे सुरक्षाबलों ने तीसरे घर को भी आग के हवाले कर दिया तो सबजार और फैजान उस घर से बाहर निकल कर भागे. उनकी कोशिश सुरक्षाबलों की घेराबंदी तोड़ कर भाग निकलने की थी, लेकिन इससे पहले ही सुरक्षाबलों ने वहीँ उन्हें ठोक दिया.

ऐसे ही किया था बुरहान का एनकाउंटर

सूत्रों के मुताबिक़ सबजार ने केवल सातवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की थी. सबजार लड़कियों का भी शौक रखता था. करीब 2 साल पहले वो आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था. पिछले साल बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद सबजार ने दक्षिणी कश्मीर में हिज्बुल मुजाहिदीन की कमान संभाली थी. सबजार की ही तरह बुरहान वानी का एनकाउंटर भी टेक्निकल इंटेलिजेंस की सहायता से किया गया था.

उल्टी पड़ रही आतंकियों की रणनीति

कश्मीर में आज के दौर के आतंकी सोशल मीडिया का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके जरिये वो अपना प्रोपगंडा फैला कर कश्मीर के युवाओं को बरगलाते हैं और खुद को किसी हीरो की तरह से पेश करते हैं. हालांकि अब सोशल मीडिया के जरिये से ही सुरक्षाबल उनके ठिकाने खोज निकाल रहे हैं.


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