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हाईकोर्ट ने दिया मोदी विरोधी गैंग को झटका, सुनाया ऐसा फैसला, जिसे देख फुट-फूटकर रो पड़े कोंग्रेसी

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अहमदाबाद : विरोधी लगातार पीएम मोदी को रोकने की कोशिशों में लगे हुए हैं, मगर किसी की भी दाल गाल नहीं रही है. आज पीएम मोदी के खिलाफ एक और साजिश नाकाम हो गयी, जब गुजरात हाई कोर्ट ने नरेंद्र मोदी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए विरोधियों के गाल पर करारा तमाचा लगा दिया. कोशिश की जा रही थी कि किसी तरह से मोदी को जेल भिजवा दिया जाए. उनके खिलाफ साजिशों का जाल बना जा रहा था, मगर सभी प्रयास असफल हो गए.


दरअसल निचली अदालत ने 2002 में हुए दंगों में बड़े षड्यंत्र के आरोप में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य को क्लीन चिट दे दी थी. मगर विरोधियों से ये बर्दाश्त नहीं हुआ और जकिया जाफरी ने इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील कर दी, मगर आज उसकी ये अपील खारिज कर दी गयी.

पीएम मोदी के खिलाफ थी पूरी साजिश

दंगों में मारे गये पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी जकिया और कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ ‘सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस’ ने एसआईटी की क्लीन चिट को बरकरार रखने वाले मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ अदालत में आपराधिक समीक्षा याचिका दायर की थी. मगर मजिस्ट्रेट ने पीएम मोदी को मिली क्लीन चिट को सही बताया और अपील ही खारिज कर दी.

याचिका में मोदी विरोधी गैंग ने अनुरोध किया था कि मोदी और पुलिस तथा प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों सहित 59 अन्य लोगों को उस कथित षड्यंत्र में संलिप्तता का आरोपी बनाया जाए, जिसके कारण दंगे हुए थे.


एसआईटी पहले ही दे चुकी है मोदी को क्लीन चिट

मोदी को क्लीन चिट मिली कैसे, ये विरोधियों से बर्दाश्त नहीं हो रहा. इसी के चलते याचिका दाखिल करके हाई कोर्ट से अनुरोध किया गया था कि पूरे मामले की जांच फिर से कराई जाए. इन धूर्तों को गुजरात के गोधरा में ट्रेन की बोगियां जलाये जाने की कोई जांच नहीं चाहिए, बस दंगों की जांच में मोदी का नाम घसीटने की मंशा दिलों में पाले बैठे हैं.

क्या थी पूरी घटना ?

दरअसल गुजरात के गोधरा में ट्रेन की बोगियां जलाकर कार सेवकों को ज़िंदा ही जला दिया गया था, इस मामले में कांग्रेस के कई नेताओं का नाम भी सामने आया था. इस बेहद खौफनाक घटना के ठीक एक दिन बाद 28 फरवरी, 2002 को गुजरात के कई इलाकों में दंगे भड़क उठे थे. उग्र भीड़ ने गुलबर्ग सोसायटी पर हमला कर दिया था, जिसमें कांग्रेस नेता जाफरी सहित 68 लोगों को मार दिया गया था.

इस मामले के लिए एसआईटी बनायीं गयी और एसआईटी ने 8 फरवरी, 2012 को दाखिल अपनी क्लोजर रिपोर्ट में मोदी और अन्य लोगों को क्लीन चिट दी थी. दिसंबर, 2013 में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने रिपोर्ट के खिलाफ जकिया जाफरी की याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद जकिया 2014 में उच्च न्यायालय पहुंची थी, मगर अब वो याचिका भी खारिज कर दी गयी है.


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