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पीएम मोदी ने लिया इतिहास का सबसे बड़ा व् महत्वपूर्ण फैसला, एक ही वार से हिला दिया पूरे देश को !

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नई दिल्ली : कुछ वक़्त पहले ही पीएम मोदी ने एक बहुत बड़ी बात कही थी, कि जितने भी छात्र छात्राएं सरकारी नौकरी के लिए सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं, अगर उसकी आधी भी मेहनत से वो नौकरी मिलने के बाद काम करने लग जाएं तो देश की तस्वीर बदला जाएगी. अक्सर सुनने में आता है कि छात्रों की यही सोच होती है कि बस एक बार सरकारी नौकरी मिल जाये फिर ऐश ही ऐश, ज़िन्दगी सेट, काम करो न करो निकालेंगे तो है नहीं. बस अब यही सोच को बदलने के लिए पीएम मोदी ने ज़बरदस्त फार्मूला निकला है जिसने सभी कामचोर सरकारी कर्मचारियों के होश उड़ा दिए हैं.

67,000 खराब परफॉर्म करने वाले कर्मचारी होंगे रिटायर

अभी अभी ख़बरों के अनुसार मोदी सरकार ने आईएएस(IAS) तथा आईपीएस(IPS) जैसे टॉप अधिकारियों समेत लगभग 67,000 कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा शुरू कर दी है. ये समीक्षा खराब प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों या कामचोर और लचर, लापरवाह कर्मचारियों की पहचान करने के लिए किया जा रहा है. इसके पीछे सरकार का उद्देश्य सरकारी सेवाओं की डिलिवरी को बेहतर बनाना और प्रशासनिक स्तर में सुधार लाना है.

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा इस समीक्षा के परिणामस्वरूप आचार संहिता का पालन नहीं करने वाले  अधिकारियों को दंड दिया जायेगा. उन्होंने आगे कहा, मोदी सरकार के लगभग 67,000 कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा की कर रही है. इसके जरिए खराब प्रदर्शन करने वाले और नाकाबिल कामचोर कर्मचारियों की पहचान होगी.

25 हजार सिविल सर्विस से

आगे अधिकारी ने बताया कि कुल 67 हजार केंद्रीय कर्मचारियों में 25 हजार ग्रुप ए सर्विसेज के आईएएस, आईपीएम और आईआरएस अधिकारी होंगे. न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक मोदी सरकार में ही मंत्री जितेन्द्र सिंह ने कहा, ‘एक तरफ सरकार की प्राथमिकता सेवाओं के पहुंच को समय से बढ़ाने की है वहीं सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी बढ़ाना चाहती है. इससे सरकार ईमानदार अधिकारियों के लिए कामकाज के लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करना चाहती है. भाजपा सरकार के 3 साल के कार्यकाल के दौरान कर्मचारियों को काफी सहूलियतें दी गई हैं. इनमें ट्रांसफर पॉलिसी, लीट ट्रैवल कंसेशन जैसी चीजें शामिल हैं. आंकड़ों के मुताबिक केंद्र सरकार के कुल 48.85 लाख कर्मचारी हैं.

129 बाबुओं को एक साल में निकाला

इससे पहले भी मोदी सरकार ने 129 खराब प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को अनिवार्य रिटायरमेंट पिछले एक साल में दिया है. इसमें कुछ आईएएस और आईपीएस जैसे बड़े अधिकारी भी शामिल थे. नियमों के मुताबिक, केंद्र सरकार के कर्मचारी की परफॉर्मेंस का रिव्यू दो बार किया जाता है. पहली बार सर्विस पाने के 15 साल बाद और फिर 25 साल बाद.

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