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अभी-अभी : जम्मू-कश्मीर में मोदी ने लिया अब तक का सबसे बड़ा फैसला, देश की राजनीति में मची खलबली !

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री बनने के बाद से पीएम मोदी लगातार देशहित के लिए कड़े फैसले लेते चले जा रहे हैं. देश के विकास के साथ-साथ देश की सुरक्षा भी उनके लिए सबसे ज्यादा मायने रखती है. पीएम मोदी लगातार ऐसे मुद्दों पर काम करने में लगे हैं जिन्हें करने का साहस इससे पूर्व की सरकारों ने नहीं किया. अब खबर आ रही है कि मोदी सरकार ने ऐसा ही एक और बड़ा फैसला लिया है, जिसे सुरक्षा की दृष्टि से बेहद अहम् फैसला बताया जा रहा है.

अवैध-रोहिंग्या को बहार निकालने का काम शुरू !

ख़बरों के मुताबिक़ पिछले काफी वक़्त से जम्मू-कश्मीर में 10 हजार से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान अवैध रूप से रह रहे हैं. इनमे से अधिकतर रोहिंग्या मुसलमान राज्य के जम्मू और सांबा जिलों में अवैध रूप से बस गए हैं. बताया जाता है कि इन रोहिंग्या मुसलमानों ने अवैध रूप से भारत-बांग्लादेश सीमा, भारत-म्यांमार सीमा और बंगाल की खाड़ी के रास्ते भारत में घुसपैठ की है.

अब खबर आयी है कि मोदी सरकार ने इनकी पहचान करके इन्हें बाहर निकालने के रास्ते तलाश करने शुरू कर दिए हैं. सोमवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने गृह सचिव राजीव महर्षि, जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक एस. पी. वैद और तमाम खुफिया एजेंसियों के प्रमुखों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की. इस बैठक में जम्मू-कश्मीर में रोहिंग्या मुसलमानों की घुसपैठ के साथ-साथ कश्मीर में फ़ैल रही हिंसा पर गंभीर मंत्रणा हुई.

एक्शन में मोदी सरकार !

बताया जा रहा है कि इस बैठक में राज्य में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों के मामले पर भी विचार-विमर्श किया गया. मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक़ सरकार ने रोहिंग्या मुसलमानों की पहचान करके उन्हें यहां से निकालने के रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं.

इस अधिकारी के मुताबिक़ राज्य सरकार का अनुमान है कि राज्य में फिलहाल लगभग 5700 रोहिंग्या मुसलमानों रह रहे हैं, लेकिन ये आंकड़ा 10 हजार तक हो सकता है. इसके अलावा केंद्र सरकार के अनुमान के मुताबिक़ देश के अलग-अलग शहरों में लगभग 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान अवैध रूप से रह रहे हैं.

इन सभी ने अवैध तरीके से भारत में घुसपैठ की है. इनमे से कइयों ने तो संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी निकाय से अपना पंजीकरण भी करवाया हुआ है लेकिन भारत उन्हें मान्यता नहीं देता है. वहीँ सूत्रों के मुताबिक़ जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक एस पी वैद और गृह सचिव महर्षि ने एक अलग बैठक करके पाकिस्तान के उकसावे के कारण राज्य में फ़ैल रही हिंसा और धर्म के नाम पर बंदूक और पत्थर उठाने के सिलसिले को रोकने के तरीकों पर भी विचार किया.

अमर उजाला में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ हाल ही में कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-ताइबा ने सोशल मीडिया के माध्यम से कश्मीरी युवकों को कश्मीर की आजादी के लिए नहीं बल्कि धर्म की खातिर सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी करने के लिए उकसाया था. अधिकारियों के मुताबिक़ पाकिस्तान की मंशा है कि अब इस लड़ाई को साम्प्रदायिक रूप दे दिया जाए, जोकि देश के लिए काफी खतरनाक है इसलिए इसे फैलने से पहले ही रोकना बेहद जरुरी है.

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