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पीएम मोदी का दमदार फैसला,ये किया तो होगा 1000000000 रूपए जुर्माना और 7 साल जेल


नई दिल्ली : गंगा सिर्फ एक नदी नहीं है, ये भारत की पहचान है, अपने किनारे करोड़ों लोगों के जीवन का आधार है गंगा. लेकिन फिलहाल उसे अपनों ने ही गंदा कर दिया है. पिछली सभी सरकारों की असफलता का जीता जागता सबूत है गंगा. गंगा सफाई के नाम पर पिछली सरकारों ने हजारों करोड़ों खर्च किए गए लेकिन नतीजा ना के बराबर है. लेकिन अब मौजूदा मोदी सरकार ऐसा कड़ा कानून लाने वाली है जिससे कोई गंगा को प्रदूषित करने की ज़ुर्रत दुबारा नहीं कर सकेगा.

मोदी सरकार के इस प्रस्ताव के कानून बनते ही गंगा में गंदगी फैलाना पड़ेगा महंगा

गंगा को देश की पहली जीवित नदी का दर्जा मिलने के बाद मोदी सरकार इसे नुकसान और गंदा करने वालों के खिलाफ कड़ी सजा के साथ जुर्माना लगाने की तैयारी में है. मोदी सरकार के एक पैनल ने ‘नेशनल रिवर (रेजोनुवेशन, प्रोटेक्शन और मैनेजमेंट) गंगा बिल-2017’ प्रस्ताव दिया है. इसके कानून बनने पर गंगा को प्रदूषित करने या नुकसान पहुंचाने के लिए अब सात साल की सज़ा हो सकती है और नदी का पानी रोकने और किनारों पर कब्जा और अवैध खनन करने पर 100 करोड़ तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है. अगर इस प्रस्ताव के पास होकर कानून की शक्ल ले लेता है तो गंगा को नुकसान पहुँचाने वालों की मुश्किलें बढ़ जाएँगी.

इस प्रस्ताव को तैयार करने वाली समिति का नेतृत्व सेवानिवृत्त जस्टिस गिरधर मालवीय कर रहे हैं. इस समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि गंगा नदी से जुड़ी उसकी प्रमुख सहायक नदियों के भी एक किलोमीटर के दायरे को ‘जल संरक्षित जोन’ घोषित किया जाए. इस समिति के एक सदस्य वकील अरुण गुप्ता का कहना है कि इस प्रस्ताव में ऐसे कड़े प्रावधान किए जा रहे हैं ताकि लोग कानून तोड़ने की हिम्मत न कर सकें. इस प्रस्ताव में गंगा को गंदा करने के अलावा, बिना इजाज़त नदी की धारा को रोकना, नदी के तटों का खनन और गोदी या जेट्टी का निर्माण करना शामिल है.


आपको बता दें हाल ही में उत्तराखंड हाइकोर्ट ने गंगा नदी को एक जीवित व्यक्ति का दर्जा दिया है. अब अगर कोई गंगा को प्रदूषित करता है, तो उस पर उसी हिसाब से कार्यवाही की जाएगी, जो किसी इंसान को नुकसान पहुंचाने पर की जाती है.

पांच राज्य एक दिन में 350 लीटर से ज़्यादा गंदा और ज़हरीला पानी गंगा में बहाते हैं.

एक रिपोर्ट के मुताबिक गंगा के किनारे बसे 118 शहरों से निकलनेवाला गंदे पानी का करीब दो तिहाई हिस्सा साफ़ किये बिना ही देश की इस राष्ट्रीय नदी में प्रवाहित कर दिया जाता है. जिसकी वजह से नदी में गंदगी बढ़ती जा रही है.विभिन्न सरकारी एजेंसियों के मुताबिक गंगा से सटे 5 राज्य एक दिन में 363.6 करोड़ लीटर गंदा पानी गंगा में बहाते हैं. सुप्रीमकोर्ट के आदेश के मुताबिक इन पांच राज्यों की ये ज़िम्मेदारी है कि वे गंगा नदी को साफ़ बनाये रखें.


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