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अभी-अभी : कश्मीर में हुआ बेहद सनसनीखेज खुलासा, सेना के साथ-साथ पीएम मोदी के भी उड़े होश !

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नई दिल्ली : कश्मीर आतंकवाद की आग में जल रहा है. केंद्र सरकार की सभी कोशिशों के बावजूद अलगाववादी आराम से आतंक की पैरवी कर रहे हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कश्मीर की जेलों में सालों तक कैद रहने के बावजूद बिट्टा कराटे, मर्सरत आलम, यासीन मलिक, आसिया अंद्राबी जैसे अलगाववादी नेताओं की अक्ल ठिकाने क्यों नहीं आयी? कश्मीर की जेलों से जुड़ा एक बेहद सनसनीखेज खुलासा हुआ है, जिसे देख पूरा देश हैरान है.


आतंकियों की सेवा करती है कश्मीर सरकार ?

देश के खिलाफ साजिश रचने वाले कश्मीर में सक्रिय आतंकवादी और पत्थरबाजों को बार-बार जेल में डाला जाता है लेकिन इसके बावजूद वो क्यों नहीं सुधरते? दरअसल आज हम आपको एक ऐसी हकीकत के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में देश में बात तक नहीं की जाती है.

एक ओर तो देश के गरीब की थाली की कीमत 25 से 30 रुपए आंकी जाती है, लेकिन कश्मीर की जेलों में बंद खतरनाक आतंकवादियों, अलगाववादियों और पाकिस्तान परस्तों को प्रतिदिन 110 रुपए से भी ज्यादा की थाली दी जी रही है. कैदियों को घर जैसी सुविधा या कभी-कभी तो घर से भी बेहतर सुविधाएं मिलती है, जिसके कारण जेल में बंद ज्यादातर कैदियों का वजन बढ़ जाता है.

नेहरू की धारा 370 से अलगाववादियों की मौज

एक जाने-माने न्यूज़ चैनल ने इस बात का खुलासा किया है कि कश्मीर सरकार जेल में बंद आतंकवादियों के एक दिन के खाने पर जनता के टैक्स के पैसों से 110 रुपए खर्च कर रही है. इससे भी ज्यादा हैरानी की बात तो ये है कि सेना के अफसर के रोज के राशन पानी पर प्रतिदिन केवल 96 रुपए ही खर्च होता है. मतलब भारतीय सेना के जवान के खाने के मुकाबले कश्मीर में कैदियों के खाने पर ज्यादा खर्च होता है.

देश के खिलाफ गद्दारी और साजिश करने वाले कैदियों के मुकाबले सेना और पैरा-मिलिट्री के जवानों को कम राशन-पानी मिलता है. आखिर जम्मू-कश्मीर सरकार ने वहां की जेलों को पत्थरबाजों और आतंकियों के लिए स्वर्ग क्यों बनाया हुआ है? क्या देश के खिलाफ साजिश रचने वालों को जेल में 36 भोग परोसा जाना चाहिए? एक ओर तो कश्मीर की सरकार हर साल केंद्र सरकार से अरबों रुपयों की सहायता लेती है और फिर उस पैसे का ऐसा दुरुपयोग करती है? धारा 370 का ऐसा नाजायज फायदा उठाया जाना कहाँ तक उचित है?


कश्मीर की जेल भी जन्नत से कम नहीं

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के 2015 के आंकड़ों के मुताबिक़ ना केवल जम्मू-कश्मीर की जेलों में बंद कैदियों पर 110 रुपए से ज्यादा सिर्फ खाने पर खर्च हो रहा है बल्कि अन्य कई तरह की सुविधाएं अलग से दी जा रही हैं. सुविधाएं व् खान-पान का ऐसा ख़ास ख़याल रखा जाता है कि देश के अन्य राज्यों के गरीबों को तो कश्मीर की जेल मानो जन्नत जैसी लगने लगेगी.

जमीयत-उल-मुजाहिदीन का पूर्व कमांडर और अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी का पति फकतू पिछले 24 सालों से जम्मू-कश्मीर की जेल में बंद है. कासिम फकतू की तरह ही मर्सरत आलम, यासीन मलिक, सरजन बरकती, मीर हाफिज उल्ला जैसे अलगाववादी भी अक्सर जेल जाते ही रहते हैं, लेकिन सुधरने का नाम नहीं लेते. सुधरेंगे भी भला क्यों, जेल में तो होटल जैसी सुविधाएं मिलती हैं, तो फिर जेल जाने से कैसा डर.

जनता के टैक्स से कश्मीरी अलगाववादियों की मौज

2015 के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में एक कैदी के खाने पर प्रतिदिन केवल 31 रुपये 31 पैसे ही खर्च होते हैं. वहीँ गोवा में 32 रुपये 83 पैसे, महाराष्ट्र में 34 रुपये 22 पैसे, गुजरात में 35 रुपये 38 पैसे ही खर्च किये जाते हैं.

कर्नाटक में कैदियों को काफी बेहतर सुविधाएं दी जाती हैं और कैदियों के खाने पर प्रतिदिन 76 रुपये 76 पैसे, सिक्किम में 80 रुपये 77 पैसे खर्च किये जाते हैं. लेकिन इन सभी राज्यों को पीछे छोड़ता है भारत का स्वर्ग कहलाने वाला कश्मीर. यहाँ के कैदियों के लिए भी कश्मीर स्वर्ग से कुछ कम नहीं, क्योंकि प्रतिदिन सबसे महंगी थाली खाने को मिलती है और घर जैसी तमाम सुविधाएं भी मिलती हैं. कुछ ख़ास काम भी नहीं करना पड़ता और कैदी आराम से मौज काटता है.

राजस्थान, पंजाब और बिहार जैसे राज्यों में भी कैदियों को खिलाने पर वहां की राज्य सरकार ज्यादा पैसा खर्च नहीं करती. भारत में कैदियों को खिलाने पर सरकार का औसत खर्च 52 रुपये 42 पैसे आता है. यानी कश्मीर की जेलों में बंद आतंकवादियों और पत्थरबाजों को खिलाने पर पूरा ध्यान दिया जाता है. दिल्ली, गोवा और महाराष्ट्र के कैदियों से तीगुनी महंगी थाली इन्हे परोसी जाती है.


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