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भारत के इतिहास में मोदी सरकार ने उठाया सबसे बड़ा क्रान्तिकारी कदम, पूरी दुनिया हुई मोदी की मुरीद


नई दिल्ली : जहाँ एक तरफ पीएम मोदी हिंदुस्तान को विकाशील से विकसित देश बनाने में एक के बाद एक बड़े कदम उठा रहे हैं तो वहीँ अब रेल मंत्री सुरेश प्रभु भी पीएम मोदी के साथ कदम से कदम मिलाकर साथ दे रहे हैं. भारत के इतिहास में ऐसा पहले बार ऐसा क्रन्तिकारी कदम उठाया गया है जो इससे पिछली सरकारें कभी सोच भी नहीं सकती थी. रेलवे और पर्यावरण के फायदे के लिए ऐतिहासिक काम हुआ जिसे देख आप भी तारीफ किये बगैर अपने आपको रोक नहीं पाएंगे.

भारत के इतिहास में उठाया गया सबसे बड़ा क्रान्तिकारी कदम

अभी अभी मिली बड़ी खबर के अनुसार रेलवे ने ऐसा अदभुत क्रन्तिकारी कदम उठाया है जिससे आज पूरे विश्व में हिन्दुस्तान की सभी दिग्गज देश तारीफ कर रहे हैं. जी हाँ भारत ने पहली सौर ऊर्जा से चलने वाली ट्रेन डीईएमयू (डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट) को पटरी पर दौड़ा दिया है. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने सफदरजंग रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन को रवाना किया. इस ट्रेन के आठ डिब्बों पर कुल 16 सोलर पैनल लगे हैं.आपको जानकार बेहद गर्व होगा कि दुनिया में पहली बार ऐसा हुआ है कि सोलर पैनलों का इस्तेमाल रेलवे में ग्रिड के रूप में हो रहा है.

रेलवे ही नहीं, पर्यावरण को भी मिलेगा फायदा

इस ट्रेन के इतने फ़ायद होंगे कि आप गिनते गिनते थक जायेंगे. इस ट्रेन की सबसे खास बात ये है कि हर वर्ष 21 हजार लीटर डीजल की बचत हो पाएगी और रेलवे को प्रति वर्ष 12 लाख रुपए की बचत होगी. साथ ही इस ट्रेन से पर्यावरण को भी फायदा मिलेगा. प्रति कोच के हिसाब से प्रत्येक वर्ष नौ टन कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी. जो की अपने आप में बहुत बड़ी बात है.


मेक इन इंडिया के तहत निर्माण

सबसे खास बात इस ट्रेन में यह है कि इसके हर कोच में लगी है बैटरी जिससे सौर ऊर्जा को अब संचित करके रात भर या खुली धुप न होने कि वजह से भी पूरे 48 घंटों तक इसे चलाया जा सकेगा.

हर साल 700 करोड़ रुपए की होगी बचत

रेलवे बोर्ड के सदस्य (रॉलिंग स्टॉक) रवींद्र गुप्ता ने बताया कि सोलर पावर पहले शहरी ट्रेनों और फिर लंबी दूरी की ट्रेनों में लगाए जाएंगे. आने वाले दिनों में 50 अन्य कोचों में ऐसे ही सोलर पैनल्स लगाने की योजना है. पूरी परियोजना लागू हो जाने पर रेलवे को हर साल तकरीबन 700 करोड़ रुपए की बचत होगी. यही नहीं सोलर एनर्जी के अलावा इसके सभी कोच में बायोटॉयलेट, वॉटर रिसाइकिलिंग, वेस्ट डिस्पोजल, बायो फ्यूल (CNG और LNG) और विंड एनर्जी के इस्तेमाल का भी इंतजाम है. इस ट्रेन में सबसे स्मार्ट इन्वर्टर लगे हैं, जो ज्यादा बिजली पैदा करने में मददगार साबित होंगे.

महिलाओं-दिव्यांगों के लिए अलग कंपार्टमेंट

ट्रेन के हर कोच में दोनों ओर से 1,500mm चौड़े दरवाजे होंगे जिन्हें आसानी से खिसकाया जा सकता है. इस ट्रेन की यात्री क्षमता 2,882 है. ट्रेन की ड्राइविंग पावर कार के पास महिलाओं एवं दिव्यागों के लिए अलग कंपार्टमेंट्स होंगे.

2016- 17 वाले रेल बजट में रेलवे मिनिस्टर सुरेश प्रभु ने घोषणा की थी कि आने वाले 5 सालो में रेलवे 1000 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन करेगा. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में ट्वीट कर ये जानकारी दी और कहा कि ये एक कदम हरित और स्वच्छ वातावरण की ओर एक क्रन्तिकारी कदम साबित होगा.


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