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यूएन ने उठाया पाकिस्तान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा कदम, मच गयी चीख-पुकार

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नई दिल्ली : कश्मीर पर कब्जा करने का सपना देखने वाले पाकिस्तान के लिए अब तक की सबसे बड़ी खबर आयी है जिसके बाद से पाक मीडिया में हड़कंप मचा हुआ है. यूएन द्वारा घोषित आतंकी समूहों की फंडिग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था द फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) ने पाकिस्तान को एक नोटिस जारी किया है.

आतंक ख़त्म करो या फिर फंडिंग भूल जाओ

इस नोटिस में पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने के लिए 90 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है. तीन महीने के अंदर-अंदर पाकिस्तान को अपने देश में पल रहे आतंकी संगठनों जमात-उद-दावा, जैश-ए-मोहम्मद और उनके सहयोगी संगठनों को पूरी तरह ख़त्म करना होगा. आतंकवादियों तक आर्थिक सहायता पहुचने वाले सभी रास्तों को बंद करना होगा. उसे दुनिया के सामने ये साबित करना होगा की वो अपने देश में आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्यवाही कर रहा है. यदि वो ऐसा करने में सफल नहीं होता है तो उसको दी जाने वाली आर्थिक सहायता को ख़त्म कर दिया जाएगा.

विदेशी मदद पर पलने वाला पाकिस्तान अब भी यदि आतंकवाद का सफाया नहीं करता है तो उसकी अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी. FATF के नोटिस के कारण ही पाकिस्तान ने पिछले महीने जमात-उद-दावा प्रमुख आतंकी हाफिज सईद को उसके घर में नजरबंद कर दिया था.

क्यों मिला पाकिस्तान को नोटिस

पिछले हफ्ते पेरिस में सप्ताह द फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का अधिवेशन हुआ था जिसमे दुनिया से आतंक का सफाया करने के लिए आतंकी संगठनों की फंडिग को रोकने पर चर्चा की गयी थी. इसी अधिवेशन में ये तय हुआ कि पाकिस्तान में जमात-उद-दावा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठन पल रहे हैं और पाकिस्तान ने इन पर नकेल नहीं कसी.

अधिवेशन में इस बात पर विचार किया गया कि आतंकवाद के खिलाफ जंग में पाकिस्तान नाकामयाब साबित हुआ है इसलिए उसे दी जाने वाली आर्थिक सहायता बन्द कर देनी चाहिए. इस पर पाकिस्तान के प्रवक्ता सकपका गए और उन्होंने टास्क फोर्स से कुछ वक़्त की मौहलत मांगी. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने हाल ही में जमात-उत-दावा प्रमुख हाफिज सईद को भी नज़रबंद किया था लेकिन टास्क फाॅर्स पाकिस्तान के दावे से संतुष्ट नहीं हुई.

अक्टूबर में पाकिस्तान ने टास्क फाॅर्स के सामने आतंक पर नकेल कसने के कुछ दावे पेश किये थे लेकिन उन दावों को खारिज कर दिया गया. टास्क फाॅर्स की ओर से इस विषय पर एक रिपोर्ट तैयार की गयी और पाकिस्तान को तीन महीने का अल्टीमेटम देते हुए कहा गया है कि आतंक के खिलाफ सख्त कार्यवाही करके पूरी तरह से ख़त्म करो या फिर फंडिंग को भूल जाओ.

आपको बता दें कि 2011 से अमेरिका की ओर से पाकिस्तान की 350 करोड़ डॉलर की वार्षिक सहायता की जा रही थी. पाकिस्तान को दी जाने वाली ये आर्थिक सहायता 70 फ़ीसदी तक कम कर दी गयी है क्योंकि अमेरिका का मानना है कि पाकिस्तान तालिबान को सपोर्ट कर रहा है और उसे दी जाने वाली आर्थिक मदद का इस्तेमाल वो तालिबान के खिलाफ नहीं करता बल्कि उस पैसे का इस्तेमाल वो कश्मीर पर कब्जा करने की कोशिश में करता है.

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