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नीचता की सभी हदें पार करते हुए इस कश्मीरी नेता ने किया कुछ ऐसा, जिसे देख गुस्से से उबल पड़ा देश

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नई दिल्ली : कश्मीरी पत्थरबाजों का समर्थन करने वाले और उन्हें भड़काने वाले जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने एक बार फिर विवादित बयान देकर देश में एक नयी राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है. फारूक अब्दुल्ला आये दिन भारत में आतंकी घुसपैठ करवाने वाले और सीजफायर का उलंघन करने वाले पाकिस्तान के बचाव में खड़े हो गए हैं.


एकतरफा संघर्ष विराम की घोषणा करे भारत – फारूक अब्दुल्ला

दरअसल अभी हाल ही में पाकिस्तानी सेना की एक टीम ने भारतीय सीमा में गुपचुप रूप से घुस कर दो भारतीय सैनिकों पर हमला करके पहले तो उनकी ह्त्या कर दी और बाद में उनके पार्थिव शरीरों के साथ बर्बरता भी की. जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सेना को खुली छूट देते हुए अपनी इच्छा से पाकिस्तान को जवाब देने के निर्देश दे दिए थे.

पीएम की ओर से छूट मिलते ही भारतीय सेना ने पाकिस्तान की नापाक हरकतों का जवाब देना शुरू भी कर दिया है. लेकिन फारूक अब्दुल्ला अब पाकिस्तान के बचाव में खड़े हो गए हैं. अटल बिहारी वाजपेयी का हवाला देते हुए फारूक अब्दुल्ला ने पीएम मोदी से सीजफायर की अपील की है. उन्होंने कहा कि रमजान के पवित्र महीने के दौरान भारत एलओसी पर ‘एकतरफा संघर्ष विराम’ की घोषणा कर दे. उन्होंने कहा कि इस तरह से ये दिखेगा कि भारत शांति चाहता है और मुद्दे के समाधान के लिए बातचीत के लिए तैयार है.

कश्मीर तोड़ने की बड़ी साजिश

उन्होंने कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपील करेंगे कि रमजान नजदीक आ रहा है. कुछ दिनों बाद ही रमजान का महीना आ रहा है. पीएम मोदी अगर एकतरफा संघर्ष विराम की घोषणा करेंगे तो अच्छा होगा. उन्होंने कहा कि अगर भारत ऐसा करेगा तो लगेगा कि इंडिया शान्ति चाहता है और बात करके ही समस्याओं का समाधान चाहता है.


हालांकि फारूक अब्दुल्ला ये बताना भूल गए कि मुद्दा आखिर है क्या, जिसका समाधान किया जाए. सारी दुनिया जानती है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है, 5 लाख से ज्यादा पंडितों को वहां से भगाकर वहां की मुस्लिम आबादी को भड़का कर पाकिस्तान कश्मीर को भारत से छीन लेने की साजिश रच रहा है और फारूक अब्दुल्ला जैसे तथाकथित नेता उसे एक मुद्दा बता कर खुलेआम पाकिस्तान का पक्ष ले रहे हैं.

बता दें कि हांल ही में राजौरी जिले में एलओसी के पास पाकिस्तानी सेना ने भारी गोलीबारी की है, जिसमे दो स्थानीय लोगों की जान चली गयी. अभी तक भारतीय सेना ने पाकिस्तान के खिलाफ कोई बड़ा हमला भी नहीं बोला है. वहीँ एक अमेरिकी सैनिक के मरने पर अमेरिका ने MOAB अफगानिस्तान में आईएसआईएस के ठिकाने पर गिरा दिया था. भारत की सहनशीलता का नाजायज फायदा उठाते हुए फारूक अब्दुल्ला जैसे नेता देश विरोधी बयानबाजी करते हैं.

उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने जताई प्रतिक्रिया

फारूक अब्दुल्ला के बयान के बाद उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह ने फारूक से पूछा है कि सीजफायर की सलाह वो पाकिस्तान को क्यों नहीं देते? पाकिस्तान 2003 से लगातार भारत-पाक सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है. भारत चाहे कितनी भी कोशिश कर ले लेकिन पाकिस्तान सुधरने वालो में से नही है. आये दिन पाकिस्तान हमले कर रहा है. ऐसे में पाकिस्तान से शान्ति की कोई भी उम्मीद करना व्यर्थ है.

दरअसल ऐसा पहली बार नहीं है, जब भारत के नेता पाकिस्तान के पक्ष में खड़े हो गए हों. आये दिन ऐसा देखा जाता है जब वोटबैंक के लालच में कई भारतीय नेता आतंकियों तक के पक्ष में खड़े हो जाते हैं. आतंकियों के एनकाउंटर का विरोध करके सरकार व् पुलिस पर सवाल खड़े करते हैं, आतंकी को फांसी की सजा से बचाने के लिए आधी रात को भी सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खुलवा लेते हैं. पाकिस्तान जब भारतीय सैनिकों के सर काट ले जाता है, तो इनके मुँह से कुछ निकलता ही नहीं लेकिन जैसे ही भारतीय सेना पाकिस्तान को जवाब देना शुरू करती है, ठीक तभी ये नेता किसी ना किसी बहाने से शान्ति की अपील करनी शुरू कर देते हैं, मानो शान्ति का ठेका अकेले भारत ने ही लिया हो.


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