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रविवार को कालेधन के खिलाफ मोदी सरकार की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक, अखिलेश मायावती की तोड़ी कमर

नई दिल्ली : नोटबंदी को एक साल से ज़्यादा हो गया है लेकिन इसका आलम ऐसा है कि आज भी कालेधन के कुबेरों पर शिकंजा कस रहा है. नोटबंदी के लागू होते ही सबने अपने कालेधन को छुपाने के लिए पूरी कोशिश करी लेकिन इन्कमटैक्स और ईडी की नज़रों से नहीं बच पा रहे हैं. एक-एक को खोद खोद के निकाल रहे हैं और कार्रवाई कर रहे हैं. आज ऐसी ही सपा परिवार के करीबी पर ज़बरदस्त कार्रवाई हुई है.


कालेधन के इंजीनियर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई

अभी मिल रही ताज़ा खबर के मुताबिक नोएडा विकास प्राधिकरण के दागी चीफ इंजीनियर यादव सिंह की आय से अधिक संपत्ति के मामले में मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. यादव सिंह ने अपनी काली कमाई से दिल्ली से लेकर मथुरा तक करोड़ रुपये की संपत्तियां जुटा रखी हैं. ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने मामले में यादव सिंह की 5.9 करोड़ की संपत्ति व आॅफिस सील कर दिया है. यादव सिंह नोएडा आॅथोरिटी में इंजिनियर के पद पर तैनात थे. जिसमें रहते हुए अरबों की प्रापर्टी और करप्शन के चार्ज उन पर लगे.

नई दिल्ली से मथुरा तक फैली है प्रॉपर्टी

ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के मुताबिक, यादव सिंह ने काली कमाई से नई दिल्ली से मथुरा तक करोड़ों की संपत्ति बनायीं हुई थी. ईडी ने यादव सिंह, उसकी पत्नी कुसुमलता व पीजीडी चैरीटेबल ट्रस्ट संचालकों के खिलाफ लखनऊ की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में आरोपपत्र भी दाखिल कर दिया है. बताया गया कि ईडी जल्द यादव सिंह की अन्य संपत्तियां भी अटैच कर सकती है. उसकी दिल्ली व अन्य स्थानों पर कई अन्य करोड़ों की संपत्तियां चिह्नित कर ली गई हैं.

मायावती के भाई का है करीबी

आपको बता दें सपा परिवार के सदस्य प्रो. राम गोपाल यादव और मायावती के भाई आनंद के करीबी समझे जाने वाले यादव सिंह के विरुद्ध 2014 में ईडी ने मामले की जांच शुरू की थी.यादव सिंह के खिलाफ मनीलॉर्डिंग का केस दर्ज किया गया था. जिसकी जांच का जिम्मा ईडी की लखनऊ शाखा को सौंपा गया था.

ईडी ने जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि “लगभग 5करोड़ 90लाख की प्रापर्टी जब्त की गई है. जिसमें 4करोड़ 60लाख इंडियन ओवरसीज़ बैंक के खाते में मिले जिसके लेनदेन पर रोक लगा दी गई है.इसके अलावा मथुरा की 2प्रापर्टी, 2 बड़ी प्रापर्टी जहांगीरपुर गौतमबुध नगर और 1दिल्ली स्थिति आॅफिस को सील करते हुए ईडी ने अपने कब्जें में ले लिया है.”


गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 15 जुलाई 2015 को उसकी संपत्ति की जांच का आदेश सीबीआई को दिया था. बताते चलें कि उसकी गाड़ी से 10 करोड़ के कैश और 100 करोड़ के हीरे मिले थे. वहीं, उसने ऑफिस में नोट गिनने की मशीन लगा रखी थी. जिसके बाद पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया था.

बनाने जा रहा था कॉलेज

इनकम टैक्स अफसर, कृष्ण सैनी ने बताया कि कालेधन का सारा खेल फर्जी कंपनियों के नाम पर खेला जाता था. रजिस्टर्ड कंपनियां बनाकर नोएडा से प्लॉट अलॉट किए जाते थे. बाद में इनके शेयर शेल कंपनियों को बेचे जाते थे. इस तरह टैक्स की भी चोरी की जाती थी.ट्रस्ट के नाम पर मथुरा के कुरकुंडा में करीब चार हेक्टेअर के दो प्लॉट भी हैं जिन्हें ईडी ने अटैच कर लिया है. इन प्लॉट पर यादव सिंह ट्रस्ट के नाम पर कॉलेज बनाने की तैयारी कर रहा था.

काली कमाई को करता था सफ़ेद

ईडी के मुताबिक, पीजीपी ट्रस्ट में सिर्फ यादव सिंह के परिवारवाले ही शामिल हैं. डोनेशन के नाम पर लोगों से चेक में रकम ली जाती थी और उन्हें बाद में कैश में लौटा दी जाती थी. ईडी की पड़ताल में कई लोगों ने इस बात की पुष्टि की है कि कैसे रकम काली से सफेद होती थी. तमाम साक्ष्य जुटाने के बाद ईडी ने शनिवार को यादव सिंह व उनकी पत्नी और ट्रस्ट के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी.

ईडी के मुताबिक, यादव सिंह की दिल्ली, नोएडा स्थित कई और महंगी संपत्तियों को चिह्नित कर लिया गया है. उन्हें अटैच करने की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं. अगले महीने तक इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा. इसके साथ ही यादव सिंह की भाभी विद्या देवी व अन्य के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.


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