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रक्षा क्षेत्र में भारत के इस कारनामे से सारी दुनिया में मचा तहलका, देखे बिना यकीन ही नहीं कर पाएंगे आप

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नई दिल्ली : पीएम मोदी की अगुवाई में भारत दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की करता चला जा रहा है. ना केवल देश का तेजी से विकास हो रहा है बल्कि देश का सैन्य बल भी तेजी से बढ़ता जा रहा है. अब इस सिलसिले में एक ऐसी जबरदस्त खबर सामने आयी है जिसने पाकिस्तान और चीन की रातों की नींद तक उड़ा दी है.


भारत का सुदर्शन चक्र !

खबर आयी है कि भारत अब अपने रक्षा बेड़े में एक ऐसी मिसाइल शामिल करने जा रहा है जिसने दुश्मन देशों के दिलों में खौफ भर दिया है. सबसे ख़ास बात तो ये है कि ये मिसाइल दुश्मनों पर हमला कर वापस अपने खेमे में सुरक्षित लौट आएगी. रक्षा, मिसाइल और अंतरिक्ष के क्षेत्र आये दिन सफलता के झंडे गाड़ने वाले भारत का यह बेहद ही अनोखा कारनामा होगा.

भोपाल में आयोजित विज्ञान मेले में शुक्रवार को डीआरडीओ के विशिष्ट वैज्ञानिक और ब्रह्मोस के सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने शिरकत की थी. इस दौरान उन्होंने इस मिशन की जानकारी देते हुए बताया कि यह प्रोजेक्ट लगभग तैयार है और सरकार की हरी झंडी मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा. मिश्रा ने इस बेहतरीन प्रोजेक्ट का पूरा श्रेय भारत के मिसाइल मैन के नाम से मशहूर डा. एपीजे अब्दुल कलाम को दिया.

मिश्रा ने बताया कि जैसे भगवान कृष्ण का सुदर्शन चक्र अधर्मियों का अंत कर के वापस उनके पास लौट आता था, उसी की तर्ज पर भारत की ये नई मिसाइल भी दुश्मनों को तबाह करके वापस अपने खेमे में लौट आएगी. उन्होंने कहा कि हमने भारतीय वैदिक और आध्यात्मिक परंपरा का पालन करते हुए इस मिसाइल का नाम सुदर्शन चक्र मिसाइल रखा है.


मिश्रा के मुताबिक़ डीआरडीओ मार्च के आखिरी हफ्ते में 1000 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की क्षमता से लैस ब्रम्होस मिसाइल का परीक्षण भी करने वाला हैं. वर्तमान में भारत मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजिम (एमटीसीआर) का मुख्य सदस्य बन चुका है जिसमे अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान समेत कई अन्य देश शामिल हैं.

मिश्रा ने बताया कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल कि मारक क्षमता को बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है. जल्द ही इस मिसाइल की मारक क्षमता को 290 किलोमीटर प्रतिघंटा से बढ़ाकर 450 किलोमीटर प्रतिघंटा कर दिया जाएगा. बढ़ी हुई मारक क्षमता के साथ ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण मार्च के दूसरे सप्ताह में किया जाएगा.

नई मिसाइल की गति को बढ़ाकर 5 मैक यानी ध्वनि की रफ़्तार से भी 5 गुना ज्यादा करने की योजना है. उम्मीद है कि अगले दो से तीन साल में इस प्रोजेक्ट का काम भी पूरा हो जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि यह मिसाइल 10 मीटर तक नीचे आ सकती है, इतने में तो दुश्मन को संभलने तक का वक़्त नहीं मिलेगा.


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