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बीजेपी ने किया राष्ट्रपति पद के लिए नाम तय, योगी को सीएम बनाने के बाद मोदी का एक और बड़ा दांव

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नई दिल्ली : राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल जुलाई 2017 में ख़त्म हो रहा है. इसी के साथ नए राष्ट्रपति के नाम को लेकर चर्चा तेज हो गयी है. ये बात तय मानी जा रही है कि एक के बाद एक राज्यों के विधानसभा चुनाव जीत रही बीजेपी ही इस बार अपनी पसंद के व्यक्ति को राष्ट्रपति बनाएगी. सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि बीजेपी ने अपने प्रत्याशी का नाम तय भी कर लिया है.

द्रौपदी मुर्मू होंगी भारत की अगली राष्ट्रपति !

खबर है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने झारखंड की गवर्नर द्रौपदी मुर्मू का नाम राष्ट्रपति के लिए तय कर लिया है. यदि द्रौपदी मूर्मू राष्ट्रपति बनती हैं, तो वो राष्ट्रपति बनने वाली आदिवासी समाज की पहली शख्सियत होंगी. हालांकि लालकृष्ण अडवाणी, सुमित्रा महाजन और थावर चंद गहलोत का नाम भी राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल है लेकिन ये बात लगभग तय मानी जा रही है कि झारखंड की गवर्नर द्रौपदी मुर्मू को ही इस बार राष्ट्रपति बनाया जाएगा.

संयोग से द्रोपदी मुर्मू झारखंड की भी पहली आदिवासी महिला राज्यपाल हैं. अच्छी शिक्षा और साफ़ सुथरी राजनैतिक छवि के चलते बीजेपी द्रौपदी मुर्मू को हमेशा अच्छे और महत्त्वपूर्ण पदों के लिए वरीयता देती आयी है. वैसे भी आजादी के बाद से अब तक आदिवासी समाज का कोई व्यक्ति राष्ट्रपति नहीं बना है. ऐसे में द्रोपदी मुर्मू को राष्ट्रपति बनाकर बीजेपी समाज को एक बड़ा संदेश दे सकती है.

विपक्ष लगा है जुगाड़ में !

हालांकि विपक्ष एकजुट होकर एक ऐसे प्रत्याशी की तलाश में लगा हुआ है, जिस पर सभी दलों में आम सहमति हो. लेकिन विपक्ष की ये इच्छा अधूरी ही रहने वाली है क्योंकि यूपी और उत्तराखंड चुनाव में बम्पर जीत के बाद इस बार बीजेपी की पसंद का राष्ट्रपति बनना लगभग तय हो चुका है.

विपक्षी पार्टिया पूरी ताकत के साथ इस जुगाड़ में लगी हैं कि किसी तरह से राष्ट्रपति चुनाव में अपना अड़ंगा लगा सकें. माना जा रहा है कि विपक्ष महात्मा गांधी के पोते गोपाल कृष्ण गांधी को अपनी ओर से प्रत्याशी उतार सकता है. ममता, सोनिया और यहाँ तक कि केजरीवाल भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए आपसी जुगलबंदी में लगे हुए हैं.

बीजेपी की पाँचों उंगलियां घी में !

यूपी और उत्तराखंड चुनाव की तरह यहाँ भी विपक्ष को बुरी तरह मुँह की खानी पड़ेगी क्योंकि राष्ट्रपति चुनाव के लिए कुल 4852 वोट डाले जाते हैं और चुनाव जीतने के लिए 2427 वोटों की जरुरत होती है. यूपी और उत्तराखंड चुनाव में प्रचंड जीत के बाद बीजेपी और उसके संगठन दलों के पास कुल 2183 वोट तो हो ही चुके हैं. यानी अपनी पसंद का राष्ट्रपति चुनने के लिए बीजेपी को केवल 244 वोटों की ही जरुरत है, जिसे हासिल करना बीजेपी के लिए कुछ ख़ास मुश्किल नहीं होगा.

वहीँ दूसरी ओर राष्ट्रपति चुनाव के लिए कांग्रेस और उसके सहयोगी संगठन (यूपीए) के पास केवल 1304 वोट ही है. ऐसे में यूपीए का बहुमत के आंकड़े तक पहुंचना लगभग नामुमकिन है, चाहे वो कितने ही गठबंधन क्यों ना कर लें. क्षेत्रीय दलों और अन्य के पास कुल मिलाकर 1370 वोट हैं. लेकिन इनमे से ज्यादातर वोट बीजेपी के पाले में जाना तय है. इसीलिए ये तय है कि बीजेपी बिना किसी रुकावट के इस बार अपनी पसंद के राष्ट्रपति का चयन करेगी.

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