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भारतीय सेना से पिटने के बाद पाकिस्तान को लगा ट्रंप का झन्नाटेदार तमाचा, सुन्न हो गए नवाज के कान

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नई दिल्ली : भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सैन्य चौकियों पर एंटी टैंक मिसाइल से हमले करके 10 चौकियां नष्ट कर दी. भारतीय सेना ने खुद हमले का वीडियो भी जारी किया और रक्षामंत्री अरुण जेटली ने सेना को बधाई भी दी. हालांकि हर बार की तरह इस बार भी पाक फ़ौज भारत के हमले से साफ़ मुकर गयी. अभी भारत के हमले का दर्द कम भी नहीं हुआ था कि अमेरिका ने पाकिस्तान को ऐसा झन्नाटेदार तमाचा लगाया है कि उसके कान सुन्न पड़ गए हैं.

कर्ज में बदलेगा मिलिट्री फंड

दरअसल सऊदी अरब में 50 मुस्लिम देशों को सम्बोधित करते वक़्त अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुछ देश आतंकियों को पालते हैं और उन्हें ऐसा बंद कर देना चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा था कि अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़ रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को जोर का झटका देने का वाला कदम उठाया है. ट्रंप ने पाकिस्तान को आर्थिक मदद के रूप में दिए गए अरबों डॉलरों को अनुदान की जगह कर्ज में तब्दील करने का प्रस्ताव रखा है. व्हाइट हाउस ने इस बात की जानकारी दी.

इस खबर के सामने आते ही पाकिस्तान के हाथ-पाँव मानो ठंडे पड़ गए हैं. ये बात सभी जानते हैं कि यदि अमेरिका और चीन पाकिस्तान को सहायता देना बंद कर दें तो पाकिस्तान को दिवालिया होने में देर नहीं लगेगी. आतंकवाद से लड़ने के नाम पर पाकिस्तान अमेरिका से आर्थिक सहायता प्राप्त करता आया है, लेकिन उस पैसे का इस्तमाल वो कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद फैलाने के लिए करता है.


ये बात ट्रंप को अच्छी तरह से पता है, डोनाल्ड ट्रंप ने अपने वार्षिक बजट में प्रस्ताव दिया है कि पाकिस्तान को अमेरिका की तरफ से सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए दिए जाने वाले अनुदान को कर्ज में तब्दील कर देना चाहिए. यदि ऐसा हो जाता है तो पाकिस्तान कर्जा चुकाते-चुकाते दीवालिया हो जाएगा.

अमेरिकी सेना के खर्चों को पूरा करने का प्रयास

हालांकि ट्रंप प्रशासन ने इस मुद्दे पर अंतिम फैसला विदेश मंत्रालय पर छोड़ दिया है. ट्रंप के इस कदम को विदेशी मदद के बजट को कम करने की कोशिशों के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे अमेरिकी सेना के बढ़े हुए खर्च को पूरा करने में मदद मिल सके. पाकिस्तान के अलावा कुछ अन्य देशों के लिए भी ये प्रस्ताव किया गया है.

व्हाइट हाउस में बजट प्रबंधन कार्यालय के निदेशक मिक मुलवाने के मुताबिक़ ट्रंप प्रशासन द्वारा पाकिस्तान समेत कई देशों के लिए ये प्रस्ताव किया गया है. उन्होंने कहा कि जिन देशों के साथ अमेरिका का विदेशी सैन्य वित्तपोषण कार्यक्रम चल रहा है, उस मदद को बदलकर वित्तीय कर्ज कर देने का प्रस्ताव दिया गया है.

अमेरिका का मानना है कि ये आर्थिक मदद अनुदान के रूप में दी जाए या कर्ज के लिए सब्सिडी के तौर पर, इसका फैसला विदेश मंत्रालय करेगा. हालांकि इजराइल और मिस्र जैसे कुछ देशों के लिए अमेरिका की सैन्य मदद अनुदान के रूप में ही जारी रहेगी.


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