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साजो-सामान के साथ बॉर्डर पर पहुंची चीनी सेना, राफेल जेट्स के साथ भारतीय वायुसेना एक्शन में

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नई दिल्ली : धोखेबाज चीन ने एक बार फिर अपनी असलियत दिखा दी है. हाल ही में डोकलाम पर चले लंबे विवाद के बाद पीएम मोदी की कूटनीति के सामने घुटने टेकते हुए चीन की सेना पीछे हट गई थी, लेकिन अब चीनी सेना एक बार फिर अपना वादा तोड़ रही है. ड्रैगन ने एक बार फिर भारत को धोखा दिया है. डोकलाम में ना केवल चीनी सैनिक एक बार फिर से जमा होना शुरू हो गए हैं, बल्कि एक बार फिर से उन्होंने वही काम शुरू कर दिया है, जिसके लिए भारतीय सेना ने उनकी कुटाई की थी.


चीनी सेना फिर शुरू की नापाक हरकत

पिछली बार चीनी सेना रोड रोलर व् सड़क बनाने वाली अन्य भारी मशीने लेकर डोकलाम में सड़क बना रही थी, जब भारतीय जवानों ने उन्हें पीछे खदेड़ते हुए उनका सामान उठाकर पीछे फेंक दिया था. एक बार फिर साजो-सामान के साथ चीनी सैनिक डोकलाम में उसी जगह आ गए हैं और उस जगह से केवल 10 किलोमीटर पीछे बनी सड़क को और चौड़ा करने का काम शुरू कर दिया गया है.

लिहाजा 73 दिन तक चले डोकलाम विवाद मामले पर भारत और चीन के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ सकता है. चीन की तरह से ये एक बड़ा धोखा है. बता दें कि डोकलाम भूटान का इलाका है और चीन भारतीय सेना को कमजोर करने के लिए इस पर कब्जा करके यहाँ सड़क बनाना चाहता है, क्योंकि यहां से मुख्य भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों को जोड़ने वाला चिकन नैक के नाम से मशहूर हिस्सा चीन के बेहद करीब आ जाएगा, जो भारत के लिए चिंता की बात है.

भारतीय वायुसेना तबाही मचाने के लिए तैयार

देखना होगा कि पूरा मामला कैसे सुलझता है इस बार. वैसे भारतीय वायुसेना अध्यक्ष धनोआ तो साफ़ तौर पर कह चुके हैं कि चीन किसी ग़लतफ़हमी में ना रहे, भारतीय वायुसेना पाकिस्तान और चीन दोनों को एक साथ ठोकने के लिए तैयार है और उनके पास चीन के लिए प्लान बी भी तैयार है. भारतीय वायुसेना पूरी तरह से तैयार है, एक आदेश पर दुश्मनों पर मौत बरसाने के लिए प्लान बी पूरी तरह से तैयार रखा गया है. भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स मिसाइलों से लैस तैयार खड़े हैं, देश की सीमाओं की सुरक्षा किसी भी कीमत में खतरे में नहीं आने देंगे.


चीन को मोदी का जवाब

अभी कुछ ही दिन पहले भारतीय वायुसेना अध्यक्ष ने भी बताया था कि चुंबी घाटी पर चीनी सैनिक पहले से ही मौजूद है. अब डोकलाम पर फिर से चीनी सैनिकों की तादाद बढ़ाई जा रही है. खबर है कि डोकलाम ट्राइजंक्शन पर जिस जगह पिछली बार विवाद हुआ था, वहां से थोड़ी ही दूरी पर करीब 500 चीनी सैनिक जमा हैं.

10 किलोमीटर पीछे चीनी सैनिकों ने फिर से सड़क निर्माण का काम शुरू करवा दिया है. चीन की इन्ही हरकतों को जवाब देने के लिए मंगलवार को विदेश सचिव एस जयशंकर ने भूटान यात्रा के दौरान थिंपू में भूटानी अधिकारियों के साथ इस सिलसिले में बातचीत भी की. मोदी सरकार चीन की हर साजिश का जवाब पहले से तैयार रखकर चल रही है.

विदेश सचिव जयशंकर के साथ कई अन्य अधिकारी भी वहां गए हैं. एक महत्वपूर्ण बात ये भी है कि सड़क निर्माण विवाद वाली जगह नहीं बल्कि 10 किलोमीटर पीछे किया जा रहा है. दरअसल चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सम्मेलन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग को दूसरे टर्म के लिए चुना जाना तय है. माना जा रहा है कि पीछे सड़क बनवाना और सैनिकों की तैनाती करवाना केवल चुनावी दिखावा है. जिनपिंग खुद को अपनी जनता के सामने ताकतवर नेता के रूप में दिखाना चाहते हैं, इसलिए कुछ छुटपुट शुरू किया गया है. चुनाव ख़त्म होते ही सब ख़त्म हो जाएगा.


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