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कश्मीर की धारा 370 पर सुप्रीम कोर्ट में मोदी की सबसे बड़ी कामयाबी, महबूबा, फारुख अब्दुल्ला सन्न

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नई दिल्ली : कश्मीर में फ़ैल रहे आतंक पर सेना द्वारा लगाम लगा दी गयी है. सेना हर दिन दो से तीन खूंखार आतंकियों को ठोक रही है. अलगाववादियों के खिलाफ जांच भी तेजी से सफल होती दिखाई दे रही है. और अब घाटी से धारा-370 हटाने की मोदी सरकार की मुहिम भी सफल होती नज़र आ रही है. धारा-370 और आर्टिकल 35-A को लेकर मोदी सरकार के हाथ मजबूत हो गए हैं.

कश्मीर पर अब आएगा बड़ा फैसला !

दरअसल सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस जे.एस. खेहर 27 अगस्त को रिटायर होने जा रहे हैं. उनकी जगह सुप्रीम कोर्ट के जज दीपक मिश्रा भारत के के 45वें चीफ जस्टिस बनेंगे. बताया जा रहा है कि मोदी सरकार ने जस्टिस दीपक मिश्रा की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है. इनके बारे में ख़ास बात ये है कि ये एक राष्ट्रवादी व्यक्ति हैं और याकूब मेमन को फांसी पर लटकाने में इनकी ख़ास भूमिका रही.

जब फर्जी सेकुलरिज्म के नाम पर देशभर के बड़े-बड़े वकील, नेता व् अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति याकूब को फांसी से बचाने के लिए जी-जान से कोशिशों में जुटे हुए थे. तब जस्टिस दीपक मिश्रा ने ही याकूब मेमन की फांसी पर रोक लगाने वाले याचिका को खारिज कर दिया था.

भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने वाले वह ओडिशा की तीसरे जज होंगे. उनसे पहले ओडिशा के जस्टिस रंगनाथ मिश्रा और जीबी पटनायक भी मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं. जस्टिस दीपक मिश्रा पटना और दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रह चुके हैं.


तुष्टिकरण ना करते हुए कठोर फैसले लेने के लिए मशहूर !

ऐसे में जब जम्मू-कश्मीर को विशेषाधिकार देने का मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है और एक राष्ट्रवादी व्यक्ति की नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश के रूप में हो गयी है, तो इससे केंद्र सरकार की मुहिम को बल मिलना तय है. दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रहते हुए उन्होंने 5 हजार से ज्यादा मामलों में फैसला सुनाया और लोकअदालतों को ज्यादा प्रभावशाली बनाने का काम किया. 30 सितंबर को जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ ने ही श्याम नारायण चौकसे की याचिका पर फैसला सुनाते हुए देश के सभी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान चलाए जाने का आदेश दिया था.

ऐसे में ये मानना लाजमी ही है कि अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा देश में कई बड़े फैसले देखने को मिलेंगे. ख़ास बात ये भी है कि संविधान के तीनों सर्वोच्च पदों (प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति) पर संघ के कार्यकर्ता विराजमान है और अब मुख्य न्यायाधीश के नियुक्ति तो मानो सोने पर सुहागा का काम करेगी.


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