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CRPF के ये जवान खतरनाक इलाके में भी बने देवदूत, वामपंथी नेताओं के मुँह पर तमाचा है यह खबर


छत्तीसगढ़ : हमारे देश के जवान पर हर किसी को गर्व होना चाहिए वे दिन रात हर मुश्किल हालत में देश के हर एक नागरिक की रक्षा अपनी जान को दांव पर लगा कर करते हैं. अपने बूढ़े माता-पिता बीवी बच्चों को अकेला छोड़ सिर्फ जी जान से देश सेवा में लगे रहते हैं. लेकिन कुछ लोग तो तिरंगा फहराने और राष्ट्र गान या वन्देमातरम गाने पर भी सवाल उठाने लगते हैं. ऐसा ही कुछ वाक्या छत्तीसगढ़ के नक्सली के सबसे खतरनाक इलाके में देखने को मिला जिसे देख आपकी छाती भी गर्व से फूल उठेगी.

नक्सली के खतरनाक इलाके में CRPF के ये जवान बने देवदूत

अभी-अभी मिली रही खबर के अनुसार छत्तीसगढ़ के खतरनाक नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में सीआरपीएफ के जवानों ने मानवता की ऐसी अनोखी मिसाल पेश की है जिसे देख आप के मन में इन जवानों के लिए प्रेम कई गुना उमड़ आएगा. दरअसल 195वीं बटालियन की सीआरपीएफ टीम रविवार शाम 5 नक्सलियों को ख़त्म कर ऑपरेशन से वापिस लौट रही थी कि तभी उनके पास एक छोटा बच्चा आता है और उनकी उंगली पकड़ कर घर में ले जाने लगता है.

पेश करी मानवता की अनोखी मिसाल

नयनार गांव में वापस लौटते वक़्त जैसे ही जवानों ने घर में देखा कि लगभग बेहोश अवस्था में एक 40 वर्षीय महिला बेहद तेज़ बुखार और दर्द से तड़प रही है और उसके करीब उसकी दो महीने की बच्ची भी तेज़ रो रही थी. घर में और कोई मदद के लिए भी नहीं था. ऐसे में सीआरपीएफ के जवानों ने उस महिला की मदद के लिए एयरलिफ्टिंग करने की सोची, लेकिन पहाड़ियों से घिरे होने की वजह से यह संभव नहीं था. किसी ऐम्बुलेंस को बुलाना भी तत्काल मुश्किल था. बीमार महिला के घर से मेन रोड सात किलोमीटर दूर था.


बीमार महिला को 7 किलोमीटर पैदल चलकर पहुँचाया हॉस्पिटल

ऐसे में सीआरपीएफ के जवानों ने जल्दी-जल्दी लकड़ियों से एक स्ट्रेचर बनाया और उस पर महिला को लिटा दिया. महिला के बच्चे को उन्होंने कंधे पर रखा और तेज़ी से चल पड़े. पहाड़ और नदियों को पार कर उबड़ खाबड़ रस्ते से होते हुए उन्होंने पूरे 7 किलोमीटर का रास्ता पैदल गतम गांव तक रास्ता तय किया. वहां से ऐम्बुलेंस मंगवाकर कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर में उस महिला को भर्ती कराया गया. डॉक्टरों की टीम उस महिला का इलाज कर रही है और उसकी हालत में अब काफी सुधार है.

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ऐसी दरियादिली सीआरपीएफ के जाबांज़ जवानो की उन नक्सलियों को नहीं दिखाई देती है. जिन्होंने सुकमा में 25 से ज़्यादा सीआरपीएफ के जवानों को धोखे से मार दिया था. इन नक्सलियों को दिखायी नहीं देता कि वो जवान भी इसी देश की संतान हैं. जो उनकी बाहरी दुश्मनो से रक्षा करते हैं. आखिरकार देश में किन किन दुश्मनों से लड़ते रहेंगे हमारे जवान कभी कश्मीर में, कभी पंचकूला या बंगाल दंगों में, कभी बाढ़, तूफ़ान, भूकंप में. तो कभी इन नक्सलियों से. तो कभी उन नेताओं से (आजमखान , ओवैसी, संदीप दीक्षित या कुछ वामपंथी पत्रकार ) जो सेना के ही पीठ में छूरा घोंपने का मौका तलाशते रहते हैं.


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