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सामने आ गया कांग्रेस का एक और घोटाला, दशकों से चल रही संगठित लूट का पर्दाफ़ाश



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नई दिल्ली : हाल ही में वायरल हुए जवान तेज बहादुर यादव के विडियो को तो आपने देखा ही होगा, जिसमे उन्होंने बीएसएफ के अफसरों पर आरोप लगाए हैं कि वो जवानों के लिए आने वाला राशन बेच कर खा जाते हैं. जिसके फ़ौरन बाद गृहमंत्रालय ने इस पर संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए थे. अब इस घोटाले से जुड़े कई अन्य चौकाने वाले खुलासे हुए हैं.

संगठित लूट का पर्दाफ़ाश

हालांकि बीएसएफ के अधिकारी तो जवान तेज बहादुर यादव पर ही आरोप मढ़ते हुए अपना पल्ला झाड़ते हुए नज़र आये, लेकिन बात असल में इतनी सीधी नहीं है जितनी मीडिया द्वारा आपको दिखाई जा रही है. बड़े ही सुनियोजित तरीके से सेना में संगठित लूट का पर्दाफ़ाश हुआ है. आगे देखिये कैसे कांग्रेस सरकार द्वारा बनाये गए लचर सिस्टम के चलते सेना के अंदर तक भ्रष्टाचार अपनी जड़ जमाये बैठा है.

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देश भर में अलग-अलग इलाकों में बने बीएसएफ कैंपों के आसपास पता करने पर इस बात का खुलासा हुआ है कि सेना में किये जा रहे भ्रष्टाचार कोई चोरी छिपे नहीं किये जा रहे थे बल्कि खुलेआम ऐसा पिछले कई दशकों से चला आ रहा है. यहां तक कि कश्मीर व् राजस्थान में पाकिस्तान से सटे सरहदी इलाकों में तो आम दुकानों में बीएसएफ का ही राशन बिकता है.

बड़े अधिकारियों तक जाता है कमीशन

यह बात एक ओपन सीक्रेट यानी खुला सच है कि बीएसएफ के आला-अधिकारी जवानो के लिए आया राशन और जवानों के इस्तेमाल के लिए आये कई अन्य सामान आधी कीमत पर बेच देते हैं. इसमें पेट्रोल, डीजल, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक सामान भी शामिल हैं। अवैध तरीके से सामान बेचने से जो काली कमाई होती है उसका हिस्सा बड़े अधिकारियों तक भी जाता है, शायद यही वजह है कि सच्चाई खुलने के कारण बीएसएफ के तमाम बड़े अफसर जवान तेज बहादुर की जान के पीछे पड़ गए हैं.

बीएसएफ के माल से चल रही हैं दुकानें

श्रीनगर के हुमहमा बीएसएफ हेडक्वॉर्टर के नजदीक रहने वाले लोगों ने दावा किया है कि एयरपोर्ट के आसपास ऐसे कई दुकानदार हैं जो बीएसएफ के जवानों का राशन, डीजल व् अन्य सामान खरीदते हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक रोजमर्रा इस्तेमाल के कई सामान दलालों का सहारा लेकर खुले बाजार में बेच दिए जाते हैं और इस तरह से आया काला पैसा बीएसएफ के अधिकारियों की जेबों तक पहुच जाता है. कई अन्य जवानों से बात करने पर उन्होंने भी इस आरोप की पुष्टि की है.

वर्षों से चल रही है धांधली

इस रिपोर्ट के मुताबिक़ उन्होंने एक ठेकेदार से इस बारे में बात की तब पता चला कि हुमहमा कैंप के अधिकारी ठेकेदारों को आधे दाम पर जवानों के लिए आया डीजल, पेट्रोल, चावल, मसाले, दालें व् रोजमर्रा की अन्य चीजें बेच देते हैं. ऐसा भी नहीं है कि ये बात कोई ढंकी-छिपी हो, बल्कि दलाली का नंगा नाच खुलेआम कई वर्षों से किया जा रहा है.

कांग्रेस की नाकामी

पिछले 60 वर्षों से कांग्रेस सरकार रही लेकिन बीएसएफ में कोई ई-टेंडरिंग का सिस्टम नहीं बनाया गया. श्रीनगर के एक फर्नीचर डीलर ने तो ऐसे दावे किये हैं जिनके बारे में जानकार आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे. इस डीलर के मुताबिक़ ऑफिस और बाकी सरकारी जरूरतों के लिए फर्नीचर खरीदने आने वाले सेना के अफसर हमसे आर्डर के बदले में मोटा कमीशन लेते हैं. उनका कमीशन इतना अधिक होता है जितना कि हम मुनाफ़ा भी नहीं कमा पाते. अधिकारी आते हैं, अपना कमीशन लेते हैं और फर्नीचर खरीद लेते हैं। अक्सर तो वो फर्नीचर की क्वॉलिटी तक चेक करना जरुरी नहीं समझते हैं.

बीएसएफ ही नहीं, सभी बेचते हैं सामान

इससे भी ज्यादा हैरानी की बात तो ये है कि घोटालेबाजी सिर्फ बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि सीआरपीएफ में भी जवानों के लिए आया सामान बेच देना बहुत ही आम बात है. हॉकी श्रीनगर में एक महीने पहले तक बतौर आईजी (प्रशासन) तैनात रहे सीआरपीएफ के आईजी रवि दीप सिंह शाही ने आश्वासन दिया है कि यदि सप्लाई में किसी तरह की गड़बड़ी है, तो इसकी जांच की जायेगी. उन्होंने कहा कि हमारे जवान हमारी ताकत हैं और उन्हें दी जाने वाली सुविधाओं में किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. आईजी ने दावा किया कि सीआरपीएफ में चीजों को खरीदने का बाकायदा एक सिस्टम है और इसका उल्लंघन कोई भी नहीं कर सकता है, लेकिन सीआरपीएफ के ही कई जवानों ने उनके इस दावे को गलत बताया है.

कांग्रेस ने लगाया भ्रष्टाचार का पेड़

मुख्य प्रश्न ये उठते हैं कि ई-टेंडरिंग के पारदर्शी सिस्टम क्यों नहीं बनाये गए? जब सालों से ऐसी धांधली चल रही थी और अब मोदी सरकार के वक़्त बाहर खुल कर आ रही है तो इससे पहले की सरकारें क्या सो रहीं थीं या उन तक भी बाकायदा हिस्सा पहुचाया जाता था? वैसे कांग्रेस के वक़्त जब मंत्री सेना के अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों के रक्षा सौदों में दलाली कर रहे थे तो उनका ध्यान इन छोटी-मोटी चोरियों की तरफ शायद जाता भी नहीं होगा. भारत के तो पूर्व वायुसेना अध्यक्ष ही जमानत पर बाहर हैं, ऐसे में नीचे के अधिकारी भ्रष्ट ना होंगे ऐसी उम्मीद करना भी बेमानी होगी. गोली से लेकर तोप, हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमानों के सौदों में दलाली खाने के आरोपी कांग्रेसी नेताओं से और क्या उम्मीद रक्खी जा सकती है.

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