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सुरेश प्रभु के ‘जल दूत’ से हारी बाजी भी जीत गए पीएम मोदी, बुरी तरह बौखलाई कांग्रेस !

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही पीएम मोदी लगातार देश के विकास के लिए काम करते जा रहे हैं. देश का एक भी कोना विकास से छूट ना जाए इसका ध्यान रखा जा रहा है. पिछले कई सालों से भयंकर सूखे की मार झेल रहे लातूर में पिछले साल हुई पानी की किल्लत के तत्काल निवारण हेतु प्रधानमंत्री के निर्देश पर रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने पहल करते हुए रेल प्रशासन को आदेश दिया था कि वहां माल गाड़ी के जरिये पानी पहुंचाने की तुरंत व्‍यवस्‍था की जाए.


“जल दूत” से जीता दिल !

जल दूत” नाम की इन माल गाड़ियों के जरिये से लातूर के लोगों की पानी की जरूरतें पूरी की गयीं. सबसे हैरत की बात तो ये थी कि सालों से पानी के लिए तरसते लातूर के म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में आजादी के बाद से लगातार कांग्रेस का राज रहा लेकिन फिर भी कांग्रेस लातूर के लोगों के लिए पानी की सुचारु व्यवस्था तक नहीं कर पायी.

मुसीबत में सहायता करके पीएम मोदी ने लातूर के लोगों को ऐसा दिल जीता कि लातूर निकाय चुनावों में बीजेपी ने पहली बार जीत हासिल की है. टाइम्स अॉफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 2012 के निकाय चुनावों में बीजेपी को लातूर से एक भी सीट नहीं मिली थी, वहीँ इस बार बीजेपी ने 70 में से 36 सीटों पर जीत हासिल करते हुए चुनाव जीत लिया है.


यहां एक और बात पर ध्यान देने की जरुरत है कि लातूर महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री स्व.विलासराव देशमुख का गृहनगर भी है, इसके बावजूद लातूर की उपेक्षा की गयी. यहाँ के लोगों को वोटों के लिए इस्तेमाल तो किया गया लेकिन उनके हितों के लिए कांग्रेस की ओर से कभी कुछ नहीं किया गया. हार से बचने के लिए इस बार कांग्रेस ने प्रचार में बॉलिवुड स्टार रितेश देशमुख को भी शामिल किया, इसके बावजूद कांग्रेस 49 सीटों से केवल 33 सीटों पर सिमट गयी.

बीजेपी ने पहली बार लातूर से जीत हासिल करने का श्रेय सीएम देवेंद्र फडणवीस को देते हुए कहा कि सीएम फणनवीस ने लातूर में जमकर चुनाव प्रचार किया. वहीँ लातूर के लोगों का कहना है कि उन्हें पीएम मोदी और मोदी सरकार से पूरी उम्मीद है कि वो पहले की ही तरह यहां के लोगों की सहायता करेंगे और लातूर के विकास के लिए काम करेंगे.

यूपी और उत्तराखंड में बुरी तरह से हार का मुँह देखने के बाद इस चुनाव में भी खराब प्रदर्शन कांग्रेस के लिए बुरी खबर बनकर आया है. लगातार हो रही हार को देखकर लगने लगा है कि यदि अब भी कांग्रेस सचेत नहीं हुई और वोटबैंक की राजनीति छोड़कर जनता के हित में काम करना शुरू नहीं किया तो पीएम मोदी का “कांग्रेस मुक्त” भारत का सपना जल्द ही सच हो सकता है.


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