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ब्रेकिंग- पेट्रोल-डीजल को लेकर हुआ अब तक का सबसे बड़ा खुलासा, सोनिया, राहुल के छूटे पसीने !

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नई दिल्ली : आजकल देश में कई लोग इस बात पर नाराज हैं कि पेट्रोल और डीजल के दाम जितने कम किए जा सकते थे, उतने कम नहीं किए जा रहे. ये शिकायत वाजिब भी है क्योंकि सरकार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाती जा रही है. कोंग्रेसी नेता भी लगे हाथों ये कहते हुए राजनीति करते नजर आ रहे हैं कि उनके वक़्त में तो पेट्रोल-डीजल सस्ता था, मोदी ने महंगा कर दिया. हालांकि इस रिपोर्ट को पढ़कर आपको पता चलेगा कि कैसे पूर्व की कांग्रेस सरकार सस्ते पेट्रोल को लेकर देश की आँखों में धूल झोंक रही थी.


क्या होती है एक्साइज ड्यूटी ?

एक्साइज ड्यूटी वो टैक्स होता है जो कच्चे तेल से पेट्रोल या डीजल बनाने के बाद उसकी कीमत पर सरकार लगाती है. यदि सरकार एक्साइज ड्यूटी को कम कर दे तो पेट्रोल और डीजल काफी सस्ता हो सकता है. लेकिन एक्साइज ड्यूटी की ही वजह से केंद्र सरकार के खजाने हर साल हजारों करोड़ों रुपये आते हैं, जिससे सरकारी खजाने के घाटे को जीडीपी के 3.5 फ़ीसदीतक लाने का टारगेट पूरा कर सकती है. यानी कि पेट्रोल-डीजल पर बढ़ा एक्साइज टैक्स देश की इकोनॉमी को मजबूत बनाने के काम आ रहा है. इकोनॉमी की हालत सुधरेगी तो फायदा देश और जनता का ही होगा.

अब तेल पर कोई सब्सिडी नहीं है !

कई लोग ये दलील भी दे रहे हैं कि पहले जब कच्चा तेल 50 डॉलर के आसपास हुआ करता था, तब पेट्रोल 35-36 रुपये प्रति लीटर बिकता था, तो फिर आज इतना महंगा क्यों है? दरअसल सच तो ये है कि कांग्रेस वोटों की खातिर पेट्रोल और डीज़ल पर एक मोटी रकम सब्सिडी के तौर पर दिया करती थी. उसकी वजह से कीमतें आज के मुकाबले कम होती थीं.

सब्सिडी की ये रकम कहीं और से नहीं, बल्कि जनता से वसूले गए टैक्स से ही आती थी. इसका मतलब ये हुआ कि उस वक़्त जो लोग गाड़ी नहीं चलाते थे, वो भी अमीरों की गाड़ी में जलने वाले तेल का खर्च उठाते थे. शुक्र है कि आज पेट्रोल और डीजल, दोनों पर ही सब्सिडी खत्म हो चुकी है. डाटा साइंटिस्ट गौरव प्रधान ने खुलासा करते हुए बताया कि कैसे कांग्रेस हजारों करोड़ों रुपये पेट्रोल और डीजल की सब्सिडी के रूप में लुटा देती थी.


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भारत में पेट्रोल पाकिस्तान से महंगा क्यों?

राजनीतिक फायदे के लिए विपक्ष दलील दे रहा है कि भारत में पाकिस्तान, श्रीलंका और नेपाल के मुकाबले भी महंगा तेल बिक रहा है. ये बात सही भी है, लेकिन इसका भी एक वाजिब कारण है. पाकिस्तान हो या कोई अन्य दक्षिण एशियाई देश, वहां बिकने वाले पेट्रोल या डीजल की गुणवत्ता भारत के मुकाबले काफी कम है. इतनी घटिया गुणवत्ता का तेल भारत में 10-15 साल पहले तक बिकता था, मगर आज भारत में यूरो-3 और यूरो-4 स्टैंडर्ड्स लागू हैं, जो कि प्रदूषण कम फैलाते हैं और नई तकनीक पर बनी आधुनिक गाड़ियों के लिए ठीक होते है.

भारत में बिकने वाले तेल की तुलना पाकिस्तान से तो कतई नहीं की जा सकती. केवल इतना ही नहीं, ये पाकिस्तान सरकार के गैरजिम्मेदार रवैये का ही नतीजा है कि वहां पर सरकारी तेल कंपनियों को मुनाफ़ा कमाने का ज़रा भी अवसर नहीं दिया जा रहा है, वो दीवालिया होने की कगार पर हैं और पूरा देश पेट्रोल संकट से जूझ रहा है.

सस्ता तेल मुसीबत भी बन सकता है !

10 साल पहले भारत की सड़कों पर आज के मुकाबले आधी गाड़ियां ही थी. उस वक़्त पेट्रोल भले ही 35 रुपये लीटर था, लेकिन लोगों की खर्च करने की क्षमता भी आज के मुकाबले काफी कम थी. कल्पना कीजिए कि यदि आज पेट्रोल 35 रुपये लीटर हो जाए तो क्या होगा. सड़कों पर अचानक गाड़ियों का अम्बार लग जाएगा, जिन्हें कंट्रोल करना नामुमकिन होगा. इन गाड़ियों की वजह से पर्यावरण को जो नुकसान होगा वो अलग. पाकिस्तान में पेट्रोल संकट के पीछे भी यही वजह है. वहां सस्ते पेट्रोल की वजह से लोग सीएनजी छोड़ गाड़ियां पेट्रोल पर चलाने लगे, जिससे अचानक पेट्रोल की डिमांड बहुत बढ़ गई.


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