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देश में लूट मचाने वालों को मिला उनके पापों का फल, कांग्रेस नेताओं ने शुरू किया राम नाम जपना

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नई दिल्ली : वैसे तो कांग्रेस सरकार ने कई घोटाले करके जनता के पैसे डकारे, लेकिन एक घोटाला जिसकी चर्चा सबसे ज्यादा हुई, वो था कोयला घोटाला. कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल ऑफ इंडिया यानी कैग ने इस घोटाले को उजागर करते हुए बताया था कि मनमोहन सरकार ने 2004 से 2009 तक की अवधि में कोयला ब्लॉक का आवंटन गलत तरीके से किया, जिससे देश को 1 लाख 86 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा और फायदा कमाया कंपनियों ने.


घोटाले का केस अदालत में चल रहा है और अब धीरे-धीरे अपराधियों को सजा मिलनी शुरू हो चुकी है. कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले के एक मामले में दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत ने पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता समेत 3 अधिकारियों को 2 साल की कैद की सजा सुनाई है. सीबीआई अदालत ने सजा के अलावा दोषियों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है. इसके अलावा केएसएसपीएल के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन कुमार आहूलविया को 3 साल की सजा सुनाई गई है और उनपर 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है.

शुक्रवार को विशेष अदालत ने कोयला घोटाला मामले में पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता, कोयला मंत्रालय के तत्कालीन संयुक्त सचिव के एस क्रोफा, तत्कालीन निदेशक के सी समारिया और अन्य तीन को दोषी करार दिया था. ये वही लोग हैं जिन्होंने मध्यप्रदेश में थेसगोड़ा-बी रूद्रपुरी कोयला ब्लॉक का आवंटन केएसएसपीएल को करने में सरकारी प्रक्रिया का सही से पालन ना करते हुए अनियमित्ताएं बरती थी.


केस की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने इन पर आरोप लगाया था कि कोयला ब्लॉक के आवंटन के लिए केएसएसपीएल ने जो आवेदन दायर किया था वो अधूरा था. आवेदन को जारी दिशानिर्देशों के अनुरूप न होने के कारण मंत्रालय की ओर से इसे खारिज किया जाना चाहिए था लेकिन नियमों को ताक पर रखते हुए आवेदन को स्वीकार कर लिया गया. गुप्ता के खिलाफ लगभग 8 अलग-अलग आरोपपत्र दायर किए गए थे और इनपर अलग-अलग कार्रवाई चल रही थी.

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे बड़े-बड़े अधिकारियों के नाम इसमें सामने आते जा रहे हैं. हालांकि सभी जानते हैं कि यूपीए सरकार के मंत्रियों की मिलीभगत के बिना तो ये घोटाला होना संभव ही नहीं था और घोटाले का पैसा मंत्रियों में भी बंटा जरूर होगा लेकिन सबूतों के आभाव में ऐसे भ्रष्ट नेता अबतक क़ानून के शिकंजे में नहीं आये हैं. जैसे-जैसे मामला खुलता जाएगा, इन नेताओं का फसना और सजा पाना भी तय है.

सीबीआई ने 15 अक्तूबर को 2005 में ओडिशा में कोल ब्लॉक आवंटन के मामले में आदित्य बिड़ला समूह के प्रमुख कुमार मंगलम बिड़ला और पूर्व कोयला सचिव पीसी पारख के खिलाफ एफ़आईआर भी दर्ज की थी. ये पहला ऐसा घोटाला था, जिसमे प्रधानमंत्री पर उंगलियां उठी थी.


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