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अमेरिका से आयी ये खबर पढ़कर आपकी आँखें फटी रह जाएंगी, देखे बिना यकीन ही नहीं करेंगे आप

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नई दिल्ली : अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए की ओर से हाल ही में तकरीबन 9 लाख 30 हज़ार गोपनीय दस्तावेज सार्वजनिक किए गए. इन दस्तावेजों से इतने चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं कि आपको शायद अपनी आँखों पर यकीन ही ना आये. अब इन खुलासों के बाद भारत में कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी होने वाली है.


महाभृष्ट थी इंदिरा गांधी भी?

हाल ही में सार्वजनिक किए गए सीआईए के पुराने गोपनीय दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि सोवियत संघ ने इंदिरा गांधी के दौर में कांग्रेस पार्टी और व्यक्तिगत नेताओं को गैरकानूनी तरीके से पैसे दिए थे. दस्तावेजों के मुताबिक़ इंदिरा गांधी के शासन में उनके तकरीबन 40 फ़ीसदी सांसदों को सोवियत संघ की ओर से राजनीतिक चंदा मिला था. इससे पहले 2005 में भी रूसी खुफिया एजेंसी “केजीबी” के कुछ गोपनीय दस्तावेज लीक हो गए थे उनमे भी कांग्रेस द्वारा सोवियत संघ से पैसे लेने की बात का खुलासा हुआ था.

सीआईऐ ने सार्वजनिक किये इन दस्तावेजों के 1.2 करोड़ से भी ज्यादा पेज ऑनलाइन पोस्ट कर दिए हैं. इनमें से ही कुछ दस्तावेजों के मुताबिक़ सोवियत संघ का दूतावास कांग्रेसी नेताओं को छिपकर अवैध रूप से पैसे देने सहित कई अन्य खर्चों के लिए बड़ा रिजर्व रखता था.

सूटकेसों में भरकर-भरकर आते थे पैसे

रूसी खुफिया एजेंसी “केजीबी” के एक पूर्व जासूस “वासिली मित्रोकिन” ने अपनी लिखी एक किताब में भी ऐसे ही दावे किये थे. ख़बरों के मुताबिक़ “वासिली मित्रोकिन”, सोवियत संघ से हजारों गोपनीय दस्तावेज चोरी करके ले गए थे. उन दस्तावेजों के मुताबिक़ भी इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी के लिए सूटकेसों में भरकर-भरकर पैसे भेजे गए थे. इतना ही नहीं बल्कि केजीबी ने 70 के दशक में पूर्व रक्षा मंत्री वी के मेनन के अलावा चार अन्य केंद्रीय मंत्रियों के चुनाव प्रचार के लिए चंदा भी दिया था.


सीपीआई और सीपीएम भी शामिल

अब सामने आये सीआईए के दस्तावेजों में तो ये आरोप भी लगाया गया है कि सोवियत संघ ने कांग्रेस पार्टी को घूस देने के लिए भारतीय कारोबारियों के साथ कई तरह के समझौते किये. दस्तावेजों के मुताबिक़ केवल कांग्रेस ही नहीं बल्कि भारत के वामपंथी दलों सीपीआई और सीपीएम को भी सोवियत संघ से अवैध तरीके से चंदा दिया जाता था.

ये हैरान करने वाली बात है कि इंदिरा पर भारत में सोवियत संघ की दलाली करने के आरोप लगे है? इससे भी ज्यादा हैरानी की बात तो ये है कि इंदिरा गांधी को भी भारत रत्न पुरस्कार मिला हुआ है.

भारत के नेता या विदेशी दलाल?

अब सोचने वाली बात ये है कि भला भारतीय राजनेता किसी अन्य देश से चुनावों के लिए चंदा क्यों लेंगे वो भी अवैध तरीके से? दूसरे देश से मिले चंदे के दम पर चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस ने भारत के लिए काम किया या सोवियत जासूस बनकर भारत के खिलाफ काम किये? सोवियत संघ कांग्रेस को क्यों पैसे देता था और बदले में कांग्रेसी सोवियत संघ की क्या सहायता करते थे? ऐसे कई ज्वलंत प्रश्न अब उठ खड़े हुए हैं. कांग्रेस पार्टी का पूरी तरह से पर्दाफ़ाश हो चुका है.


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