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ब्रेकिंग – पाकिस्तान पर पीएम मोदी के घातक प्रहार से दर्द से चीख उठा चीनी ड्रैगन, खुलेआम उगला जहर

नई दिल्ली : चीन का पाकिस्तान प्रेम एक बार फिर झलकता हुआ साफ़ दिख रहा है और इसके बावजूद वो भारत पर ऊँगली उठाने से बाज़ नहीं आता है. पाकिस्तान एक आतंकवादी समर्थक देश है ये बात जग जाहिर है इसलिए मोदी सरकार ने पाकिस्तान को ज़बरदस्त चोट पहुंचाई है लेकिन दर्द से चीन बिलबिला उठा है और एक बार फिर भारत के खिलाफ ज़हर उगल रहा है.


भारत ने पाकिस्तान को पहुंचाया ज़बरदस्त घाव , तो दर्द से बिलबिला उठा चीनी ड्रैगन

दरअसल पूरे मामले ने तूल तब पकड़ लिया जब भारत ने पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाते हुए दरकिनार कर दिया और अफ़ग़ानिस्तान के साथ हवाई गलियारे की परियोजना का आरम्भ किया जो एक समर्पित मार्ग है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया है. पाकिस्तान के आये दिन आतंक प्रेमी रवैय्ये के कारण भारत उसके साथ कोई व्यापारिक सम्बन्ध नहीं रखेगा. लेकिन इस बात पर चीन को बड़ा आघात लगा है. चीन के बड़े सरकारी मीडिया ने पाकिस्तान को अलग-थलग करके भारत का अफ़ग़ानिस्तान के साथ एयर कॉरिडोर शुरू करने पर बौखला गया है. चीनी सरकार के एक समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने इसे भारत की अड़ियल भू-राजनीतिक सोच के उदाहरण के तौर पर बताया है.

चीन को है आपत्ति कि भारत पाकिस्तान को अलग थलग क्यों कर रहा है ?

आपको बता दें अमेरिका ने दो दिन पहले ही सैयद सलाउदीन को अंतर्राष्ट्रीय लेवल का आतंकवादी घोषित किया है वहीँ पाकिस्तान ने उसे स्वतंत्रता सेनानी बताया है. इसके बावजूद भी चीन ने पाकिस्तान में करीब 50 अरब डॉलर का निवेश करके आर्थिक गलियारे का निर्माण कर रहा है. चीनी मीडया का कहना है कि अफगानिस्तान और भारत के बीच हवाई गलियारा, पाकिस्तान और चीन के आर्थिक गलियारे के टक्कर में बनाया गया है. चीन के एक प्रमुख अखबार में लिखा है कि इससे भारत का जिद्दीपन साफ साफ झलकता है.


अफगान कॉरिडोर दिखाता है भारत की अकड़- चीनी मीडिया

भारत और काबुल मिलकर वैकल्पिक और विश्वसनीय मार्ग बनाने के लिए एकसाथ कार्य कर रहे हैं. भारत चाबहार पोर्ट के विकास के लिए ईरान और अफगानिस्तान के साथ भी काम कर रहा है. मई 2016 में तीन देशों के बीच चाबहार के माध्यम से समुद्री पहुंच के लिए त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे. चीन के एक प्रमुख अखबार ने लिखा है कि भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच प्रस्तावित मार्गों को पहले से ही शुरू किया जा चुका है जिससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या भारत अफगानिस्तान और मध्य एशिया के साथ व्यापार करने के लिए पाकिस्तान को अनदेखा करेगा?

भारत चीन के सीपीईसी का विरोध करता है, क्योंकि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित गिलगिट-बाल्टिस्तान से गुजरता है, जिसपर भारत अपना दावा करता है. परियोजना पर संप्रभुता के उल्लंघन का हवाला देते हुए भारत ने बीजिंग में आयोजित दो दिवसीय बेल्ट एंड रोड शिखर सम्मेलन का बहिष्कार किया था.


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