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भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और वियतनाम ने मिलकर किया चीन का कांड, जिनपिंग ने खड़े किये हाथ

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नई दिल्ली : विस्तारवादी मानसिकता रखने वाले चीन को बड़ा झटका लगा है, जिसके बाद उसकी अक्ल कुछ ठिकाने आयी लगती है. दरअसल 1962 में चीन भारत की पीठ पर छुरा घोंप चुका है, भारत के खिलाफ वो पाक आतंकियों के पक्ष में भी यूएन में वोट करता आया है. चीन की ही दम पर पाकिस्तान भी अति-आत्मविश्वास से भर गया है और आये-दिन भारत में आतंकी घुसपैठ करता रहता है. लेकिन अब चीन को ऐसा बड़ा झटका लगा है, जिससे एक ही बार में उसकी अक्ल ठिकाने आ गयी है.

चीन के खिलाफ साथ आये भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और वियतनाम

दरअसल चीन की बढ़ती हुई दादागिरी को रोकने के लिए भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और वियतनाम एक साथ आ गए हैं. चीन ने भारत के साथ-साथ इन देशों की नाक में भी दम किया हुआ है, ऐसे में भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और वियतनाम एक अनौपचारिक गठजोड़ बनाने पर विचार कर रहे हैं. इससे बौखलाए चीन ने भारत समेत इन एशियाई देशों को ऐसे किसी अनौपचारिक गठबंधन बनाने के लिए मना किया है.

सकपकाए चीन ने झटका दोस्त पाकिस्तान का हाथ

चीन के खिलाफ पीएम मोदी की विदेश नीति के सामने सकपकाए चीन ने अब पाकिस्तान को दो टूक कह दिया है कि वो चीन से किसी सहायता की उम्मीद ना करे. हाल ही में होने वाली शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट के दौरान पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को उठाकर उसका अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश में लगा था लेकिन चीन ने साफ़ शब्दों में उसे मना करते हुए कहा है कि वो कश्मीर मुद्दे के अंतरराष्ट्रीयकरण करने के लिए SCO समिट का इस्तेमाल नहीं कर सकता है.

चीनी विशेषज्ञों ने कहा है कि यह संगठन कश्मीर मुद्दे के अंतरराष्ट्रीयकरण करने में पाकिस्तान का कतई समर्थन नहीं करेगा. ये खबर सामने आते ही पाकिस्तान परेशानी में पड़ गया है और एक बार फिर पीएम मोदी की कुशल विदेश नीति के सामने उसे घुटने टेकने पड़े हैं. वहीँ पीएम मोदी ने अपना पासा फेंक दिया है और बिना कुछ बोले ही पाकिस्तान को अंतर्राष्टीय मंच पर नंगा करने की योजना बनायी है.

पीएम मोदी समिट के दौरान पाक पीएम नवाज शरीफ से ना ही कोई मुलाक़ात करेंगे और ना ही कोई बात. उनकी चुप्पी के जरिये ही वर्ल्ड मीडिया में ये बात फ़ैल जायेगी कि पाकिस्तान आतंकी गतिविधि करता है, लिहाजा उसका बॉयकॉट किया जा रहा है.

जीडीपी वृद्धि के मामले में भी पिछड़ा चीन

चीन को बाटली में उतारने के लिए पीएम मोदी चीन से त्रस्त अन्य देशों के साथ गठबंधन कर रहे हैं, करीब दो दिन पहले एक कार्यक्रम के दौरान ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैल्कम टर्नबुल ने भी कहा था कि आधुनिक युग में वो अपने हितों की सुरक्षा के लिए अमेरिका व् रूस जैसे शक्तिशाली देशों पर निर्भर नहीं रह सकते हैं, बल्कि उनको खुद अपनी सुरक्षा और समृद्धि के लिए कदम उठाने पड़ेंगे. इसकी जिम्मेदारी खुद अपने कंधों पर लेनी होगी. बताया जा रहा है कि ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने ये बयान चीन के खिलाफ गठबंधन को लेकर ही दिया था.

अर्थव्यवस्था व् जीडीपी के मामले में भी चीन भारत से पिछड़ चुका है, आने वाले दो वर्षों के जीडीपी वृद्धि के वर्ल्ड बैंक के अनुमान में भी भारत चीन से काफी आगे दिखाई दे रहा है. लिहाजा चीन आर्थिक तौर पर व् कूटनीतिक तौर पर भी भारत से पिछड़ता जा रहा है. जानकारों के मुताबिक़ 2019 में यदि मोदी एक बार फिर प्रधानमंत्री बनते हैं तो 2024 तक भारत चीन को हर क्षेत्र में काफी पीछे छोड़ चुका होगा, चीन भी पाकिस्तान का साथ पूरी तरह से छोड़ने पर मजबूर हो जाएगा.

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