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ब्रेकिंग – हुआ बड़ा खुलासा, इस देश की साजिश से क्रैश हो गया भारत का सुखोई-30 फाइटर जेट !

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नई दिल्ली : असम के तेजपुर से उड़ान भरने के कुछ ही वक़्त के बाद भारत-चीन सीमा के पास से लापता हुए भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान सुखोई-30 का मलबा तो मिल गया, लेकिन उसके बाद से ये पता लगाने की कोशिशें शुरू हो गयी की आखिर हाईटेक सुरक्षा से लैस बेहद अत्याधुनिक सुखोई-30 लड़ाकू विमान इतनी आसानी से आखिर क्रैश कैसे हो सकता है. इसके क्रैश को लेकर न्यूयॉर्क से एक ऐसी खबर सामने आयी है जिसे देख अच्छे-अच्छों ने दाँतों तले उंगलियां दबा ली.

हैकिंग का शिकार हुआ था सुखोई-30 ?

क्रैश के 100 घंटे गुज़रने के बाद इस हादसे से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. बताया जा रहा है कि सुखोई क्रैश के पीछे चीन की साज़िश हो सकती है. न्यूयॉर्क की एक विश्लेषण में कहा गया कि इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है कि बेहद हाईटेक सुरक्षा से लैस सुखोई के सिस्टम को ठीक वैसे ही हैक किया गया हो, जैसे पूरी दुनिया में वायरस अटैक से बड़ी-बड़ी कंपनियों के कंप्यूटर हैक किए जाते हैं.

बता दें कि वायुसेना का सुखोई-30 लड़ाकू विमान ने मंगलवार सुबह 9.30 बजे के करीब उड़ान भरी थी. ये एक नियमित ट्रेनिंग के लिए उड़ान पर था, जिसके बाद 11.30 बजे के करीब तेजपुर से 60 किलोमीटर उत्तर में भारत-चीन सीमा के निकट अरुणाचल प्रदेश के दोउलसांग के पास इसका रडार से संपर्क टूट गया और ये लापता हो गया.

लगभग 72 घंटों तक तलाश करने के बाद विमान का मलबा उसी जगह के पास मिला, जहां से विमान का रडार संपर्क टूटा था. न्यूयॉर्क की एक विश्लेषण में इस बात की संभावना जताई गई है कि जिस तरह से आजकल बैंकों, अस्पतालों और बड़ी-बड़ी कंपनियों के कंप्यूटर को हैक किया जाता है, सुखोई पर भी वैसा ही अटैक हुआ हो सकता है.

संभावना जताई जा रही है कि विमान के कोकपिट में लगे कंप्यूटर को हैक किया गया, जिसके बाद विमान को कण्ट्रोल करने वाले सिस्टम ने ही काम करना बंद कर दिया हो. पायलटों को इस तरह की गड़बड़ी समझ में ना आई हो, जिससे ज़मीन से भी उसका संपर्क टूट गया हो. हालांकि इस बात के अभी कोई पुख्ता सबूत तो सामने नहीं आये हैं लेकिन इस संभवाना से इनकार भी नहीं किया जा सकता.

चीन ने गिराया भारत का विमान ?

विश्लेषण के अनुसार कुछ मीटर की दूरी से और हज़ारों किलोमीटर की दूरी से भी इस तरह की हैकिंग को अंजाम दिया जा सकता है. इसे चीन की साज़िश का नाम इसलिए दिया जा रहा है, क्योंकि जिस वक्त सुखोई से संपर्क टूटा था उस दौरान वो चीन की सीमा के पास उड़ रहा था.

बता दें कि सुखोई वायुसेना का अग्रिम पंक्ति का लड़ाकू विमान है. 4.5 जेनरेशन के इस बेहद अत्याधुनिक विमान को बनाने में ही लगभग 358 करोड़ रुपये की लागत लगती है. इस वक़्त सुखोई दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक है. इसकी खूबी ये है कि ये विमान किसी भी मौसम में उड़ान भर सकता है. इसके साथ-साथ ये हवा से हवा में और हवा से सतह पर मार करने में भी सक्षम है. ये कोई मिग विमान नहीं है जो आसानी से गिर जाए या उड़ते-उड़ते इसका सिस्टम बंद पड़ जाए बल्कि ये सबसे हाई टैक्नॉलोजी से लैस, यही वजह है कि कुछ जानकार न्यूयॉर्क की इस रिपोर्ट को मानने को ही तैयार नहीं हैं.

सुखोई-30 ब्रह्मोस मिसाइल से लैस होकर उड़ान भर सकता है और जरूरत पडऩे पर भीषण बमबारी के साथ मिसाइल से अचूक निशाना भी लगा सकता है. ब्रह्मोस मिसाइल परमाणु हथियारों से लैस भी की जा सकती है. सुखोई 2450 किलोमीटर प्रतिघंटे की अधिकतम रफ्तार से उड़ सकता है साथ ही अपने साथ आठ हजार किलो तक के हथियार लेकर 5200 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है.

सुखोई की सबसे बड़ी ताकत उसका अत्याधुनिक रडार सिस्टम है. इस रडार सिस्टम के जरिये सुखोई दुश्मन के विमान को बहुत दूर से ही पहचानकर अचूक निशाना लगाने में माहिर है. एक बार में 3 हजार किलोमीटर तक सीधी उड़ान भरते हुए ये विमान करीब पौने चार घंटे तक लगातार हवा में रह सकता है और जरुरत पड़ने पर हवा में ही ईंधन भर सकता है. सुखोई जब दुश्मनों पर मंडराता है तो दुश्मनों के छक्के छूट जाते हैं, ऐसे में इसकी हैकिंग की रिपोर्ट पर अब सवाल खड़े हो गए हैं और बिना पुख्ता सबूतों के न्यूयॉर्क की इस रिपोर्ट पर यकीन करना मुश्किल है.

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