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पाक-चीन को धूल चटाते हुए भारत ने चाबहार पोर्ट से अफगानिस्तान भेजा शिपमेंट, कोंग्रेसी भी सन्न

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नई दिल्ली : भारत के लिए आज एक बड़ा दिन है. भारत ने पाकिस्तान के करारा तमाचा लगाते हुए पहली बार चाबहार पोर्ट के जरिए अफगानिस्तान गेहूं का शिपमेंट भेजा है. इसे ऐतिहासिक बताया गया है, क्योंकि यह अफगानिस्तान से शानदार कनेक्टिविटी के लिए चाबहार बंदरगाह के ऑपरेशनल होने का रास्ता साफ करेगा. दरअसल भारत अफगानिस्तान के साथ व्यापार करने के लिए हाइवे विकसित करना चाहता था, मगर बीच में पाकिस्तान पड़ता है और पाकिस्तान ने इसके लिए साफ़ इंकार कर दिया.


वाजपेयी सरकार ने शुरू किया था, मोदी ने काम पूरा किया

हालांकि पाकिस्तान के इस इंकार के बावजूद तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने पाकिस्तान का “मोस्ट फेवर्ड नेशन” का दर्जा बरकरार रखा. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने पाकिस्तान को जवाब देने के लिए चाबहार पोर्ट को विकसित किये जाने का ईरान के सामने 2003 में प्रस्ताव रखा. मगर फिर कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद इसका काम टलता गया.

यूपीए सरकार ने बहाना ये बनाया कि अमेरिका को इससे आपत्ति होगी, मगर इसके बाद मोदी सरकार सत्ता में आयी और पीएम मोदी ने अपना जलवा दिखाते हुए अमेरिका से लेकर दुनियाभर के देशों से मजबूत सम्बन्ध स्थापित कर लिए.

मोदी के कारण मिली अमेरिका की सहमति

यही कारण है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद हाल ही में भारत की यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने साफ कर दिया कि ईरान के साथ भारत के वैध कारोबार पर अमेरिका को कोई ऐतराज नहीं है.

ईरान के चाबहार पोर्ट को अब भारत विकसित कर रहा है, जिसके अगले साल दिसंबर तक ऑपरेशनल होने का अनुमान है. चाबहार पोर्ट के जरिए भारत से सामान समुद्री रूट से अफगानिस्तान भेजा जा सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले साल मई की ईरान की यात्रा के दौरान चाबहार पोर्ट के साथ अफगानिस्तान के जरिए ट्रांसपॉर्ट और ट्रेड कॉरिडोर के लिए त्रिपक्षीय समझौता भी हुआ था.


ईरान के साथ मिलकर भेजा पहला शिपमेंट

बताया जा रहा है कि इस पोर्ट के जरिये सेंट्रल एशिया और यूरोप के लिए भारत से शिपमेंट भेजने का खर्च और समय आधा रह जाएगा. रविवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, अफगानिस्तान के विदेश मंत्री सलाहाउद्दीन रब्बानी और ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शिपमेंट भेजने की शुरुआत की है.

अगले कुछ महीनों में 6 और गेहूं के शिपमेंट अफगानिस्तान को भेजे जाएंगे. यह अफगानिस्तान के लोगों के लिए भारत की ओर से 11 लाख टन गेहूं की सप्लाई के कमिटमेंट का हिस्सा है.

हार्वर्ड वाले नहीं कर पाए, हार्डवर्क वाले ने कर दिखाया

अब आप यहाँ ध्यान दें, कि रोबोट प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जो काम 10 सालों में नहीं कर पाए, उसे चाय बेचने वाले से प्रधानमंत्री तक का सफर तय करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर दिखाया, वो भी केवल 3 साल में. पीएम मोदी की विदेश यात्राओं का मजाक उड़ाने वालों के गाल पर भी ये करारा तमाचा है.

मोदी ने ना केवल अमेरिका को साध लिया, बल्कि ईरान के साथ भी त्रिपक्षीय समझौता करके बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली और पाकिस्तान मुँह टापता रह गया. एक बात और यहाँ गौर करने वाली ये है कि इस चाबहार पोर्ट के जरिये पीएम मोदी ने चीन को भी जवाब दे दिया, जो पाकिस्तान में ग्वादर पोर्ट विकसित कर रहा है.


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