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सोनिया की करीबी और कांग्रेस की महाभ्रष्ट नेता पर मोदी का कहर, हाहाकारी एक्शन देख सोनिया सन्न

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नई दिल्ली : कांग्रेस सरकार की बेहद भ्रष्ट नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री जयंती नटराजन के घर सीबीआई ने छापा मारा है. इस खबर के बाहर आते ही कांग्रेस में हड़कंप मचा हुआ है. सीबीआई ने चेन्नई स्थित नटराजन के घर में छापेमारी करके तलाशी ली है. नटराजन के खिलाफ आपराधिक साजिश और अपने पद का दुरुपयोग किए जाने के मामले में एफआईआर भी दर्ज की गयी है.

कौन है जयंती नटराजन !

यूपीए दो के कार्यकाल में कांग्रेस की नेत्री जयंती नटराजन के हाथों में पर्यावरण और वन मंत्रालय की कमान थी. इन्हे कांग्रेस की एक महाभ्रष्ट नेता के रूप में जाना जाता है. नटराजन ने नवंबर, 2014 में कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी को एक पत्र लिखा था जो मीडिया में लीक हो गया था. उस पत्र से खुलासा हुआ था कि नटराजन मंत्रालय की गोपनीय जानकारियां सोनिया गांधी तक पहुँचाती रहती थी और राहुल गाँधी के निर्देशों का पालन करती थीं.

जोकि संविधान के नियमानुसार पद की शपथ का उल्लंघन है. पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी ने बताया था कि यूपीए सरकार में परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए ‘जयंती टैक्स’ लगता है. इस टैक्स को चुकाए बिना कोई भी परियोजना पास नहीं हो पाती है. यानि जयंती नटराजन बिना घूस खाये किसी प्रोजेक्ट को पास नहीं होने देती थी, इस घूस का एक हिस्सा ऊपर तक जाता था.


बहरहाल अब नटराजन के खिलाफ आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) की धारा 120 बी के तहत आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया गया है. नटराजन पर पर्यावरण मंत्री रहते हुए नियमों को ताक पर रखते हुए वन्य जमीन को खनन के लिए देने का आरोप है. सीबीआई ने इस मामले में नटराजन, इलेक्ट्रोस्टील कास्टिंग लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक उमंग केजरीवाल और कंपनी के साथ अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

नटराजन पर आरोप है कि उन्होंने पर्यावरण मंत्री रहते हुए घूस खा कर 2012 के वन संरक्षण कानून का उल्लंघन किया और झारखंड के सिंहभूम जिले में सारंडा के जंगली जमीन को वन्य जमीन से खनन की जमीन में बदले जाने के लिए मंजूरी दे दी. तत्कालीन पर्यावरण राज्य मंत्री जयराम रमेश ने इसकी मंजूरी नहीं दी थी लेकिन नटराजन ने मंत्री बनने के साथ कंपनी के आवेदन को मंजूरी दे दी.

एफआईआर में कहा गया है, ‘नटराजन ने ईसीएल को 55.79 हेक्टेयर वन भूमि का इस्तेमाल बदले जाने की मंजूरी दी जबकि पूर्व मंत्री इस अपील को खारिज कर चुके थे.’ नटराजन यूपीए 2 में जुलाई 2011 से दिसंबर 2013 तक पर्यावरण मंत्री थीं.


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