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सुप्रीम कोर्ट के फरमान के बाद ममता के सर पर टूटा मुसीबतों का आसमान, तृणमूल कांग्रेस में मचा हड़कंप !

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नई दिल्ली : नोटेबंदी के बाद से पीएम मोदी पर लगातार कीचड उछाल रही बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अब बड़ी मुश्किलों में घिरती जा रही हैं. कालेधन और घूसखोरी को लेकर उनकी और उनकी पार्टी के नेताओं पर अब नकेल कसती जा रही है. एक के बाद एक तृणमूल कांग्रेस के सांसद जेल जा रहे हैं. अभी कुछ ही वक़्त पहले ममता के सांसद तपस पाल और सुदीप बांदोपाध्‍याय चिट फंड घोटाले के चलते जेल गए थे और अब जो खबर सामने आ रही उसे देखकर ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस में हड़कंप मच गया है.


टीएमसी नेताओं समेत 13 लोगों के खिलाफ एफआईआर !

दरअसल नारद स्टिंग कांड में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार सीबीआइ ने शुरूआती जांच के बाद टीएमसी नेताओं समेत 13 लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है. एफआइआर में ‘अन्य’ शब्द का भी इस्तेमाल किया गया है, जिसका मतलब है कि इन 13 लोगों के अलावा इस मामले में अप्रत्यक्ष रूप से शामिल कई अन्य लोगों के खिलाफ भी जांच की जायेगी.

आपको बता दें कि पिछले सोमवार को सीबीआई ने इस मामले में राज्यसभा सांसद मुकुल रॉय, पूर्व मंत्री मदन मित्रा के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस के 12 अन्य नेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है, नारदा स्टिंग ऑपरेशन में ये नेता कैमरे पर रिश्वत लेते हुए दिखे थे.

सीबीआई द्वारा दर्ज की गयी एफआइआर में ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के 12 नेताओं के नाम शामिल हैं, जिनमे से कई मंत्री व सांसद भी हैं. इसके साथ-साथ सीबीआई को इस मामले में बंगाल पुलिस के कुछ अधिकारियों की भी भूमिका पर संदेह है, जिसके चलते एफआईआर में एक पुलिस अधिकारी का नाम भी शामिल है.


जेल जा सकते हैं ममता के सांसद !

स्टिंग ऑपरेशन में ये सभी आरोपी पैसे लेते हुए दिख रहे हैं. अब सीबीआई इन सभी से पूछताछ करेगी, जिसके चलते इनमे से कई की गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं. सीबीआई इन आरोपियों को नारद न्यूज वेबपोर्टल के सीइओ मैथ्यू सैमुअल के साथ आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ कर सकती है.

गौरतलब है कि 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआइ को निर्देश दिए थे कि वो इस मामले में जांच शुरू करे और शुरूआती जांच को केवल एक महीने में ख़त्म करे और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए. सुप्रीम कोर्ट से आदेश मिलने के बाद सीबीआई ने तेजी से इस मामले में जांच शुरू कर दीं और एक महीना ख़त्म होने से पहले ही अपनी शुरूआती जांच ख़त्म करके दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली.

वहीँ ममता सरकार इस मामले की जांच सीबीआई से करवाने के खिलाफ थी, उनके मुताबिक़ राज्य की पुलिस इस मामले की जांच कर सकती है लेकिन क्युकी मामला सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़ा हुआ है और राज्य की पुलिस सरकार के दबाव में आ सकती है, इसके चलते सुप्रीम कोर्ट ने जांच सीबीआई के हवाले कर दीं थी.

जांच के आदेश मोदी सरकार ने नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं, बावजूद इसके ममता ने पीएम मोदी पर आरोप लगाते हुए कहा था कि वो उनके खिलाफ सीबीआई का दुरुपयोग कर रहे हैं. चिटफंड घोटाले के बाद घूसखोरी के इस मामले को देखते हुए लग रहा है कि कहीं भर्ष्टाचार के मामलों में ममता की सारी कैबिनेट ही ना गिरफ्तार हो जाए. जानकारों के मुताबिक़ ये बात तो तय मानी जा रही है कि ममता के सरंक्षण में बंगाल में जम कर घोटाले किये गए हैं और जिनमे ममता के सांसद तक शामिल थे.


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