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सुखोई फाइटर जेट पर लोड हुई ब्रह्मोस मिसाइल, भारतीय सेना का ऐसा रूप देख पाकिस्तान में हाहाकार

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नई दिल्ली : रक्षा के क्षेत्र में भारत लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर रहा है. पीएम मोदी की प्राथमिकता भी यही रही है कि देश की तीनों सेनाओं को सबसे शक्तिशाली बनाया जाए. इसी कड़ी में भारत अब वो काम करने जा रहा है, जिससे चीन के कान खड़े हो गए हैं. चीनी मीडिया इस बारे में सबसे ख़ास दिलचस्पी ले रहा है, भारत के इस कदम का गुणगान भी कर रहा है और इससे डर भी जता रहा है.


सुखोई फाइटर जेट से ब्रह्मोस मिसाइल का खतरनाक परीक्षण

भारत इसी सप्ताह पहली बार सुखोई 30MKI से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का परीक्षण करने जा रहा है. इसके लिए खासतौर पर 40 सुखोई विमान को अपग्रेड किया गया है. 3200 किमी क्रूज रेंज में यह परीक्षण एक घातक कॉम्बिनेशन है.

हवा से जमीन पर मार करने वाले ब्रह्मोस मिसाइल से दुश्मन देश की सीमा में स्थित आतंकी ठिकानों पर सटीक निशाना लगाया जा सकता है. ऐसे में सुखोई जेट से इस मिसाइल के मिलाप को रक्षा विशेषज्ञ ‘एक घातक संयोजन’ बता रहे हैं.

हवा से जमीन में मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल का प्रयोग दुश्मन की सीमा में घुसकर आतंकी कैंप पर सटीक निशाने साधने में किया जा सकेगा. इस परीक्षण के बाद यह मिसाइल दुश्मनों के लिए और खतरनाक हो जाएगी.

पाक व् चीनी सेना को देगी मुहतोड़ जवाब

ब्रह्मोस मिसाइल जमीन के अंदर बने परमाणु बंकरों, कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर्स और समुद्र के ऊपर उड़ रहे विमानों को दूर से ही निशाना बनाने में सक्षम है. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक़ इसी हफ्ते बंगाल की खाड़ी में दो इंजन वाले सुखोई फाइटर जेट से ब्रह्मोस मिसाइल के हल्के वर्जन (2.4 टन) का परीक्षण किया जाएगा. इससे पहले ब्रह्मोस मिसाइल के असली वर्जन का वजन 2.9 टन था, मगर अब इसे और आधुनिक बनाते हुए इसका वजन कुछ कम किया गया है.


ब्रह्मोस मिसाइल 290 किलोमीटर के दायरे में जमीन पर स्थित किसी ठिकाने पर सटीक निशाना साध सकती है. भारतीय सेना तो पहले ही इसे अपने बेड़े में शामिल कर चुकी है. ब्रह्मोस मिसाइल के लिए सेना, नौसेना और वायु सेना सभी ने अपनी रुचि दिखाई है और इसके लिए 27150 करोड़ रुपये के ऑर्डर दिए गए हैं.

मिसाइल तकनीक नियंत्रक समूह से जुड़ा भारत

जून, 2016 में भारत के 34 देशों के संगठन मिसाइल तकनीक नियंत्रक समूह (MTCR) का हिस्सा बनने के बाद अब मिसाइलों की रेंज की सीमा भी अब खत्म हो चुकी है. ऐसे में अब सशस्त्र बल ब्रह्मोस के 450 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाले वर्जन की टेस्टिंग की तैयारी में हैं.

एमटीसीआर की सदस्यता मिलने के बाद भारत 300 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइलों को तैयार करने में सक्षम होगा. फिलहाल ब्रह्मोस मिसाइल के हाइपरसोनिक वर्जन यानि ध्वनि से पांच गुना तेज रफ्तार (माक 5) को तैयार करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं और ब्रह्मोस को सुखोई से दागने की यह कवायद इस सिलसिले में देखी जा रही है.

पाकिस्तान के जमीन के अंदर बने परमाणु ठिकाने हों या भारत पर कब्जा करने का ख़्वाब देखने वाली चीनी फ़ौज के ठिकाने, ब्रह्मोस की मदद से सभी को चुटकियों में ध्वस्त किया जा सकेगा. भारतीय सेना की ताकत इस महाविनाशक मिसाइल के कारण कई गुना तक बढ़ गयी है.


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