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सुकमा और कश्मीर को छोड़िये, आज बम धमाकों से दहल उठा ये राज्य, सुप्रीम कोर्ट ने बांधे सेना के हाथ !

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इंफाल : अभी पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों ने भयानक हमला कर दिया था. इसके बाद कश्मीर में दो आतंकियों ने सेना के कैंप पर हमला कर दिया था और अब ऎसी ही एक खबर मणिपुर से आ रही है. जिसके बाद से बीएसएफ ने ऑपरेशन शुरू कर दिया है.

लगातार दो बम विस्फोट से दहला मणिपुर !

ख़बरों के मुताबिक़ शनिवार सुबह मणिपुर में उग्रवादियों ने एक के बाद एक कुल दो बम विस्फोटों से मणिपुर को दहला दिया. हालांकि इन हमलों में सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों समेत सुरक्षाकर्मी बाल-बाल बच गए. हमले में किसी के भी घायल होने या मरने की खबर नहीं है.

जानकारी के मुताबिक़ सुबह सात बजे के करीब कुछ अज्ञात उग्रवादियों ने इंफाल के पूर्वी जिले में बीएसएफ के एक कैंप के पास स्थित नोनग्रेन गांव के पास एक बम विस्फोट कर दिया. बम विस्फोट करते ही उग्रवादी फरार हो गए. इसके फ़ौरन बाद राजकीय और केंद्रीय बलों ने उग्रवादियों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है. इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी भी उग्रवादी संगठन ने नहीं ली है.

वहीँ मणिपुर के चूड़ाचांदपुर जिले में सिलशी गांव के पास भी उग्रवादियों ने एक बम विस्फोट कर दिया, हालांकि इस हमले में भी किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं आयी. बम विस्फोट के तुरंत बाद पुलिस ने अतिरिक्त बलों को इलाके में सर्च ऑपरेशन के लिए भेज दिया है. पुलिस के मुताबिक़ उग्रवादी सीमा के पास ‘नो मैन्स लैंड’ में फरार हो गए.

सुप्रीम कोर्ट ने बांधे सेना के हाथ !

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मणिपुर में उग्रवादियों के आतंक के कारण यहां पिछले कई वर्षों से AFSPA लगा हुआ है. दरअसल कुछ ही वक़्त पहले मोदी सरकार उग्रवादियों को जड़ से उखाड़ने के लिए एक्सेस पावर का इस्तेमाल करने का फैसला लिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट को ये फैसला मंजूर ही नहीं हुआ और उसने जुलाई 2016 को फैसला सुना दिया कि सेना या पुलिस वहां अत्याधिक बल का इस्तेमाल नहीं कर सकती और न्यूनतम फोर्स का इस्तेमाल करके केवल आत्मरक्षा ही करती रहे. सीधे-सीध कहा जाए तो आतंकियों और उग्रवादियों के खिलाफ कोई ऑपरेशन ना चलाये.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ मोदी सरकार ने क्यूरेटिव पेटिशन दाखिल की थी, जिसमे केंद्र ने कहा था कि इस फैसले पर फिर से विचार किया जाए नहीं तो उग्रवादियों के खिलाफ सेना के आपरेशन में असर पडेगा. यहां तक कि ये आदेश AFSPA के प्रावधानों पर भी असर डाल रहा है. यदि केवल आत्मरक्षा ही करनी है तो AFSPA लगाने का फायदा ही क्या हुआ?

केंद्र की ओर से AG ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि जिस राज्य में उग्रवादियों का विद्रोह चल रहा हो, वो लगातार बम धमाके कर रहे हों, ऐसे मामलों में जरुरत आत्मरक्षा की नहीं बल्कि हमले करने की होती है. यदि यहाँ सुप्रीम कोर्ट सेना को एनकाउंटर ऑपरेशन नहीं चलाने देता तो इसका असर उतर पूर्वी राज्यों और जम्मू कश्मीर में पडता है जहां AFSPA लगा हुआ है. ऐसे इलाकों में सेना को आपरेशन चलाने के लिए आत्मरक्षा नहीं बल्कि हमला करना होता है.

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की क्यूरेटिव पेटिशन !

लेकिन अभी दो ही दिन पहले 27 अप्रैल 2017 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की क्यूरेटिव पेटिशन को खारिज कर दिया. यानि चाहे बम धमाके होते रहें, सेना व् बीएसएफ के जवान मरते रहें, मासूम व् निर्दोष लोग उग्रवादियों के हाथों मारे जाते रहें लेकिन सेना अतिरिक्त बल का इस्तमाल करके उनका एनकाउंटर नहीं कर सकती. उन्हें ख़त्म नहीं कर सकती. केवल हाथ पे हाथ रख कर आत्मरक्षा करने की ही अनुमति उन्हें दीं गयी है.

जानकारों के मुताबिक़ बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों, राजनीति के साथ-साथ न्यायपालिका में बैठे वामपंथी विचारधारा के लोगों के कारण ही मोदी सरकार के आतंकियों, नक्सलियों व् उग्रवादियों को ख़त्म करने के मिशन में रुकावट आती है. लोग इस तरह के हमलों में सीधे प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी पर उंगलियां तान देते हैं और कार्रवाई ना करने का दोष देते हैं, हालांकि जब मोदी सरकार कार्रवाई करती है तो यही उच्च पदों पर बैठे यही वामपंथी मोदी सरकार को रोक देते हैं.

इसी साल गणतंत्र दिवस के दिन भी मणिपुर में उग्रवादियों ने हमले किये थे. आये दिन हमले होते ही रहते हैं लेकिन माननीय अदालत के मुताबिक़ उग्रवादियों एनकाउंटर नहीं किये जा सकते. बहरहाल इन बम धमाकों के बाद बीएसएफ की ओर से सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया है, लेकिन जानकारों के मुताबिक़ जबतक बीएसएफ व् सेना को छूट नहीं दीं जाती तबतक इस तरह के हमले बार-बार होते ही रहेंगे.

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