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नतीजों के बाद अखिलेश और राहुल में तनातनी… सपा ने कहा पनौती हैं राहुल गांधी !

akhilesh-rahul

नई दिल्ली : यूपी चुनाव में समाजवादी पार्टी में पहले तो पारिवारिक कलह हो गयी और उसके बाद अखिलेश ने अपनी डूबती नैय्या बचाने के लिए हड़बड़ाहट में राहुल से हाथ मिलाकर कांग्रेस से गठबंधन कर लिया. अब जबकि बीजेपी भारी बहुमत से चुनाव जीत रही है तो सपा और कांग्रेस का याराना भी टूट रहा है. “यूपी को ये साथ पसंद है” नारे के साथ प्रचार में उतरे अखिलेश का चेहरा चुनावी नतीजे देख कर उतर गया है. साफ हो गया कि यूपी को राहुल-अखिलेश का नहीं बल्कि मोदी-शाह का साथ ज्यादा पसंद है.

हार के जिम्मेदार राहुल ?

सपा की ओर से अब खुलकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर हमले किये जाने शुरू हो गए हैं. मुलायम सिंह यादव ने तो चुनाव से पहले ही आगाह किया था कि राहुल के साथ गठबंधन सपा को ले डूबेगा. लेकिन गद्दी तब तक अखिलेश के पास आ चुकी थी और अखिलेश इस दांव को खेलना चाहते थे. जिसके चलते उन्होंने राहुल के साथ गठबंधन कर लिया.

कई सपा नेताओं ने अखिलेश को चेतावनी भी दी थी कि राहुल की अगुवाई में कांग्रेस जहां से भी चुनाव लड़ी है वहीँ अपनी जमानत जब्त करवाई है लेकिन अखिलेश ने अपने आगे किसी की नहीं सुनी. अब नतीजे देखने के बाद सपा नेताओं ने हार का ठीकरा राहुल के सर फोना शुरू कर दिया है. अखिलेश सरकार के मंत्री रविदास मेहरोत्रा के मुताबिक़ कांग्रेस की वजह से ही सपा को ये दुर्दिन देखने पड़ रहे हैं.


रविदास मेहरोत्रा के मुताबिक़ राहुल की वजह से चुनाव में सपा की भी धज्जियां उड़ गयी. वहीँ कांग्रेसी प्रवक्ताओं ने हार को स्वीकार करना शुरू कर दिया है. यूपी में कुछ इलाकों से सपा कार्यकर्ताओं और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबरें भी आ रही हैं. अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने भी सलाह दी थी कि कांग्रेस को 105 सीटें देने से सपा पहले ही 105 सीटें हार जायेगी. उनकी वो भविष्यवाणी सच साबित हो गयी है, जिसके बाद कुछ सपा कार्यकर्ताओं ने भी अखिलेश के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया है.

सबसे हैरानी की बात तो ये है कि कई मुस्लिम बहुल इलाकों में भी बीजेपी की जीत हुई है, जिससे अखिलेश और राहुल दोनों ही परेशान लग रहे हैं. वहीँ अखिलेश के प्रचार में लगे लालू यादव भी नतीजे देखकर चुप हो गए हैं. कुल मिलाकर देखा जाए तो प्रदेश की जनता ने दिखा दिया है कि वो तुष्टिकरण और जातिवाद की राजनीति नहीं बल्कि विकास की राजनीति चाहती है.


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