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जाति मतभेद भूल कर जाटों और गुर्जरों ने दिया मोदी का साथ, खिला दिया कमल, कांग्रेस का सूपड़ा साफ़

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नई दिल्ली : प्रधानमन्त्री मोदी के विरोधियों का मुह एक बार फिर हरियाणा के फरीदाबाद में काला हो गया. ये एक गुर्जर बाहुल्य इलाका है और इसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता है. यहाँ कांग्रेस के बड़े नेता का नाम है “अवतार सिंह भड़ाना”. 2014 के लोकसभा चुनावों में भी मोदी लहर के चलते यहां कांग्रेस की हार हुई थीं.

और अब नोटबंदी के बाद माना जा रहा था कि यहां के गुर्जर कांग्रेस को बहुमत में वोट देंगे, मगर यहां के समझदार लोगों ने नगर निगम चुनावों में कांग्रेस का सूपड़ा ही साफ़ कर दिया, बहुमत तो दूर की बात है. यानी कि फरीदाबाद भी अब पूरी तरह से कांग्रेस मुक्त हो गया है.

फरीदाबाद नगर निगम के चुनावों में 25 सीटों में से बीजेपी ने 23 सीटों पर जीत हासिल की है, बाकी दो सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों को मिली हैं, कांग्रेस की तो हर सीट पर जमानत ही जब्त हो गयी है.

ऐसा ही एक कमाल लोकसभा चुनावों में भी हुआ था. आमतौर पर जाट और गुर्जर आपसी मतभेदों के कारण एक दूसरे के उम्मीदवारों को वोट नहीं देते थे. 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की तरफ से कृष्णपाल गुर्जर को सांसद के तौर पर चुनाव में खड़ा किया गया था, मोदी को जीता कर देश का प्रधानमन्त्री बनाने के लिए फरीदाबाद के जाटों ने जाती को नज़रअंदाज़ करते हुए कृष्णपाल गुर्जर को वोट देकर लोकसभा चुनाव जितवा दिया था.

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