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आतंकियों व् नक्सलियों को मोदी सरकार का बड़ा झटका, इसे देखकर अपना सर पीट रहे हैं देश के दुश्मन

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकियों व् नक्सलियों के खिलाफ सीधी लड़ाई छेड़ी हुई है. आतंकियों व् नक्सलियों की हर तरकीब व् साजिश का तोड़ निकालने के लिए सरकार पूरी कोशिशों में लगी हुई है. ऐसे में मोदी सरकार के हाथ अब एक बड़ी सफलता भी लगी है, जिसके बाद नक्सलियों व् आतंकियों के होंसले पस्त होते दिखाई दे रहे हैं.

आतंकियों व् नक्सलियों के लिए बड़ा झटका

दरअसल पहले तो नोटेबंदी करके पीएम मोदी ने नक्सलियों व् आतंकियों की कमर तोड़ दी. कालाधन रद्दी हो जाने के कारण हथियार खरीदने के लिए पैसों की कमी पड़ने लगी तो देश के इन दुश्मनों ने एक नयी तरकीब निकाली. चोरी-छिपे घात लगाकर सेना पर हमला करने के बाद वो ना केवल हमारे जवानों के शवों को क्षत-विक्षत कर डालते हैं, बल्कि सेना के हथियार भी भारी मात्रा में चुरा ले जाते हैं. इन्ही हथियारों का इस्तमाल सेना के खिलाफ करते हैं.

आतंकियों व् नक्सलियों की इस साजिश का तोड़ निकालने के पीछे काफी वक़्त से विचार किया जा रहा है और अब आतंकियों से सेना के हथियारों का जखीरा बचाए रखने के लिए भारतीय सेना ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसके बारे में जानकर आतंकियों की हवा टाइट हो जाएगी.

बायोमीट्रिक सिस्टम व् जीपीएस ट्रैकर से लैस होंगे हथियार

दरअसल अब एक ऐसी तकनीक खोज ली गयी है, जिससे माओवादियों या आतंकवादियों द्वारा लूटे गए हथियारों को ट्रैक किया जा सकता है. इसके साथ-साथ जवानों के हथियारों को बायोमीट्रिक सिस्टम से लैस भी किया जाएगा, जिसके बाद सेना व् सीआरपीएफ के हथियारों का इस्तेमाल नक्सली नहीं कर पायेंगे.

पश्चिम सिंहभूम जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात पुलिस व सीआरपीएफ जवानों को बहुत जल्द बायोमीट्रिक सिस्टम से लैस ट्रैकिंग वाले हथियार दिये जायेंगे. ऐसा किये जाने के बाद से पुलिस से लूटे गये हथियार का इस्तेमाल नक्सली नहीं कर पायेंगे और लूटे गये हथियार को पुलिस आसानी से ट्रेस कर पायेगी, जिससे नक्सलियों के छिपने के ठिकानों के बारे में भी पता चल जाया करेगा.

आधिकारिक सूत्रों ने टाइम्स ऑफ इंडिया को इस बात की जानकारी दी कि सीआरपीएफ कुछ निजी कंपनियों के साथ संपर्क कर रही है ताकि यदि कोई आतंकी या नक्सली उनके हथियार लेकर भाग जाए तो जीपीएस ट्रैकर/RFID चिप या बायॉमीट्रिक सॉफ्टवेयर के जरिए उसे ट्रैक किया जा सके और उसे निष्क्रिय किया जा सके.

ऐसे हथियार सुरक्षाबलों व् सेना के पास आ जाने से आतंकियों व् नक्सलियों का मनोबल पूरी तरफ से टूट जाएगा. नोटेबंदी के कारण कमजोर हुए नक्सली व् आतंकियों के पास हथियार ना होने के कारण देश में बड़े हमले होने की संभावना भी ना के बराबर हो जायेगी.

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