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मोदी सरकार के इन कामों को देखकर देश का हर नागरिक अगली बार भी उन्ही को वोट देगा

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नई दिल्ली : पीएम मोदी भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री हैं, ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि आप खुद कहेंगे जब आप जानेंगे मोदी सरकार की इन योजनाओं के बारे में. बेटियों को बचाने के लिए ना केवल पीएम मोदी ने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान की शुरुआत की बल्कि बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए भी कई योजनाएं शुरू की हैं. अक्सर इन योजनाओं के बारे में लोगों को ज्यादा ना मालूम होने के कारण वो इनका लाभ नहीं उठा पाते. ऐसे में हम आपको आज इन योजनाओं के बारे में बताएँगे.


भाग्य श्री योजना

इस योजना की शुरुआत 8 मार्च, 2015 को महाराष्ट्र में की गई, महाराष्ट्र सरकार के अनुसार इस योजना को अब जल्द ही “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना से भी जोड़ दिया जाएगा. यह योजना उन परिवारों के लिए है जो गरीबी रेखा के नीचे आते हैं. इस योजना के तहत सरकार की ओर से बच्ची के लिए 21,200 रुपए जमा किए जाते हैं. बच्ची जब 18 वर्ष की होती है तब उसे एक लाख रुपये दिए जाएंगे.

सुकन्या समृद्धि योजना

इस योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए लॉन्च किया, इसके अंतर्गत स्कूलों में पढ़ने वाली 10 वर्ष की छात्राओं के खाते खुलवाए जाते हैं. बच्ची के 14 वर्ष के होने तक इस खाते में 1000 रुपए से लेकर 1.5 लाख रुपए तक जमा कर सकते हैं. जमाकर्ता को खाता खुलने के बाद एक बैंक पासबुक मिलती है. इसमें चार वर्षों तक पैसे जमा करने होंगे, जो बच्ची के 21 वर्ष के होने पर मैच्योर होकर उसे मिल जाएंगे.

लाडली लक्ष्मी योजना

इस योजना के तहत रजिस्ट्रेशन करवाने पर 1 लाख रुपए का प्रमाण पत्र ऑनलाइन बनता है, जिसे डिजिटल हस्ताक्षर के साथ जारी किया जाता है. बच्ची की शिक्षा के लिए समय-समय पर ई-पेमेंट द्वारा इस रकम का भुगतान किया जाएगा. बच्ची के 6 वीं कक्षा में आने पर 2000 रुपए, 9 वीं कक्षा में 4000 रुपए और 11 वीं कक्षा में 7500 रुपए दिए जाएंगे. 12 वीं कक्षा के दौरान और बच्ची के 21 वर्ष का होने तक 200 रुपए का भुगतान हर महीने होगा, लेकिन इसकी शर्त ये है कि 18 वर्ष की आयु तक बच्ची का विवाह नहीं होना चाहिए.

धनलक्ष्मी योजना

संकीर्ण विचारों के चलते बच्ची को बोझ समझ के कुछ परिवारों में भ्रूण में ही मार दिया जाता है. इसलिए कन्या भ्रूण हत्या को रोकने और बच्चियों को शिक्षित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से “धनलक्ष्मी योजना” लॉन्च की गई है. इस योजना के तहत बच्ची का जन्म पंजीकरण, बीमारियों से बचाव के लिए उसका टीकाकरण, उसकी शिक्षा और 18 वर्ष का होने के बाद उसका विवाह होने पर ही एक लाख रुपए का बीमा दिया जाता है.


मुख्यमंत्री शुभलक्ष्मी योजना

इस योजना को राजस्थान सरकार ने शुरू किया है. राज्य में बच्चियों के जन्म को बढ़ावा देने के लिए और मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए इस योजना की शुरुआत की गयी है. इस योजना के तहत 1 अप्रैल या इसके बाद राजकीय एवं अधिस्वीकृत चिकित्सा संस्थानों में संस्थागत प्रसव करवाना होगा. बच्ची का जन्म होने पर 2100 रुपये का चेक दिया जाएगा. बीमारियों से रक्षा के लिए बच्ची को सभी जरूरी टीके लगवाने पर और बच्ची के एक वर्ष का होने पर 2100 रुपए का एक और चेक दिया जाएगा. बच्ची के पांच वर्ष की होने पर बच्ची की मां को 3100 रुपए का चेक भी दिया जाएगा.

लाडली बेटी योजना

इस योजना को जम्मू-कश्मीर के लिए लॉन्च किया गया है. इस योजना के अन्तर्गत राज्य सरकार बच्ची के जन्म पर उसकी मां को 7 हजार 300 रुपए देगी. बच्ची के जन्म पर उसके नाम का खाता भी खुलवाएगी और अगले 14 सालों तक हर महीने उसके खाते में 1000 रुपए जमा करवाएगी. बच्ची के 21 वर्ष के होने पर उसे 6.5 लाख रुपए की राशि दी जाएगी. इस योजना को उन्हीं लोगों के लिए शुरू किया गया जो बेहद गरीब है और जिनकी वार्षिक आय 75 हज़ार रुपए से कम है.

कन्या विवाह योजना

इस योजना को लगभग सभी राज्यों के लिए शुरू किया गया है, लेकिन हर राज्य में इसके अन्तर्गत दी जाने वाली रकम अलग-अलग है. छत्तीसगढ़ में जो लोग परिवार गरीबी रेखा के नीचे आते हैं उनके लड़के-लड़कियों की शादी के लिए 15 हज़ार रुपए दिए जाते हैं. इसके अलावा 1 हज़ार रुपए का चेेक, प्रमाण-पत्र और गृहस्थी का जरूरी सामान भी दिया जाता है. इतना ही नहीं बल्कि विधवा और परित्यक्ता को 30 हज़ार रुपए भी दिए जाते हैं.

बेटी है अनमोल योजना

ये योजना हिमाचल प्रदेश में शुरू की गयी है, इसके तहत राज्य सरकार गरीबी रेखा के नीचे आने वाले परिवार में बच्ची के जन्म पर 10,000 रुपए बैंक खाते में जमा करवाती है. 12 वीं कक्षा तक की पढ़ाई के लिए इन बच्चियों को 300 रुपये से 1200 रुपए तक की स्कॉलरशिप दी जाती है.

गर्ल प्रोटेक्शन स्कीम

इस योजना को लड़कियों के विकास के लिए आंध्र प्रदेश में शुरू किया गया है. इस योजना के अन्तर्गत कुछ नियम व् शर्ते रखी गयीं है, जिन्हें पूरा करने पर 30 हज़ार से लेकर 1 लाख रुपए तक की रकम दी जाती है. इस योजना को अनाथ और अक्षम बच्चियों को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है.


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