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भारत ने अपनी कई गुना बढ़ी ताक़त का मनवाया लोहा इस दुनिया के सबसे बड़े बैंक को, 53 साल बाद भारत के सामने झुकने को हुआ मज़बूर

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नई दिल्ली : भारत का कद जो पिछले देशों में नहीं था वो आज दिन पर दिन कई गुना बढ़ता ही जा रहा है. भारत आज तेज़ी से वैश्विक शक्ति बनने की और बढ़ चला है इसका सबूत खुद बड़े बड़े अंतर्राष्ट्रीय संगठन दे रहे हैं. वर्ल्ड बैंक, IMF , वर्ल्ड इकनोमिक फोरम , के बाद अब दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बैंक से भारत के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी आयी है जिसे देख आप भी हैरान हो उठेंगे.


भारत की बढ़ती ताकत का दमदार नमूना देख गर्व से फूले नहीं समायेंगे आप

अभी मिल रही बड़ी खबर के मुताबिक बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) की ताकतवर वैश्विक सलाहकार परिषद (GAC) की मीटिंग इतिहास में पहली बार इस बार भारत में होने जा रही है. भारत की पूरी दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था देखते हुए इस बार भारत को चुना गया है. कारोबार, शिक्षा और लोक नीति जैसे क्षेत्रों की 14 जानीमानी हस्तियों से बने इस बोर्ड की भारत में यह पहली मीटिंग होगी जो कारोबारी दुनिया में भारत की बढ़ती ताकत का एक और नमूना है.

एक तरफ पाकिस्तान के बैंक टेरर फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों के चलते अमेरिका से लात मार कर निकाले जा रहे हैं. जिससे पाकिस्तान की मट्टी पलीत हो रही है. वहीँ आज पीएम मोदी के राज में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बैंक , बैंक ऑफ़ अमेरिका भारत की ओर उम्मीदों भरी नज़रों से देख रहा है. एक वक़्त वो भी था जब देश भर के वामपंथियों ने पीएम मोदी को अमेरिका का visa न दिया जाय इसकी चिट्ठी लिखकर गुज़ारिश करी थी.

कांग्रेस की विफलता, 53 सालों बाद अब भारत की आयी याद

आपको जानकर हैरानी होगी कि बैंक ऑफ़ अमेरिका भारत में पिछले 53 सालों से मौजूद है. लेकिन एक बार भी उसने इस मीटिंग के लिए भारत को नहीं चुना. हमारी पिछली लचर, घोटालेबाज़ सरकारों की बदौलत ये थी भारत की इज़्ज़त दुनिया की नज़र में और आज यही बैंक ऑफ़ अमेरिका भारत में अपना फायदा ढूंढ रहा है, और भारत में अपने फायदे के लिए मीटिंग करने को मचल रहा है.  वक़्त कितनी तेज़ी से बदल रहा है. भारत के सामर्थय का अनुमान पूरी दुनिया को हो रहा है.


आपको बता दें अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी की अध्यक्षता वाले इस बोर्ड में बैंक ऑफ़ अमेरिका के सीईओ ब्रायन मोयनिहेन के अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी समेत विभिन्न देशों के कुल 12 बिजनस और पॉलिसी लीडर्स होंगे. बोफा की ग्लोबल अडवाइजरी काउंसिल की हर साल दो दिन की बैठक होती है जो इस बार 28 फरवरी ओर 1 मार्च को भारत के वित्तीय राजधानी यानी कि मुंबई में आयोजित होने जा रही है.

बैंक ऑफ़ अमेरिका(बोफा) के अधिकारीयों ने बताया इस महीने के आखिर में मीटिंग होगी. बोफा अमेरिका का दूसरा बड़ा बैंक है. दिसंबर के आखिर में इसकी कुल संपत्ति 2.28 लाख करोड़ डॉलर (करीब 146 लाख करोड़ रुपये) थी. दुनियाभर के बैंकों को ग्लोबल स्ट्रैटिजी और ऑपरेशंस के मसले पर सलाह देती है और उन्हें दुनियाभर में संबंधों और अवसरों के मोर्चे पर मदद करती है। यह स्थानीय बाजार में पैदा होनेवाले अवसरों पर भी अपना नजरिया पेश करती है.

1964 में अपनी पहली शाखा मुंबई में खोली थी

जॉन केरी को अक्टूबर 2017 में जीएसी का चेयरमैन नियुक्त किया गया था. इसने 1964 में अपनी पहली शाखा मुंबई में खोली थी. अभी मुंबई के अलावा दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नै में भी इसके ब्रांच हैं जो मुख्य रूप से वहां की कंपनियों को सेवा मुहैया कराते हैं.

पूरी दुनिया में भारत का हो रहा बोलबाला

एक वक़्त दस साल पहले का था जब भारत की अर्थव्यवस्था इतनी ज़्यादा खतरे में थी कि उसकी वजह से अन्य देशों की अर्थव्यस्था भी खतरे में पड़ गयी थी. इसके चलते भारत को अलग-थलग करके एक ग्रुप में डाल दिया गया था. जो आर्थिक रूप से खतरनाक देश थे. और आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था है ओर उसका पूरी दुनिया में बोलबाला हो रहा है.


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