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पाकिस्तानी परमाणु हथियारों पर बलोचों ने की सर्जिकल स्ट्राइक, पाक सरकार समेत सेना को भी बड़ा झटका

नई दिल्ली : पाकिस्तान से भारत तो त्रस्त है ही लेकिन पाकिस्तान के अपने ही लोग भी उससे खासे परेशान हैं. पाकिस्तान और चीन के खिलाफ बलूचिस्तान के लोगों में जबरदस्त आक्रोश है. यूँ तो पिछले कई दशकों से बलोच कार्यकर्ता पाकिस्तान पर वहां मानवाधिकारों के उलंघन करने का आरोप लगाते आये हैं लेकिन अब पाकिस्तानी परमाणु हथियारों को लेकर उन्होंने दुनियाभर में पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.


पाकिस्तानी परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ दुनिया भर में सड़क पर उतरे बलोच

बलोच कार्यकर्ताओं ने बलूचिस्तान में पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम और चीन की ओर से क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किए जाने के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं. ये विरोध प्रदर्शन दुनियाभर में किये जा रहे हैं. जर्मनी, कनाडा, अमेरिका, स्वीडन, ब्रिटेन, नीदरलैंड और नॉर्वे समेत दुनिया भर में बलोच कार्यकर्ता पाकिस्तान के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं और पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं.

इससे भारत को भी खासा लाभ होने की संभावना है, क्योंकि भारत भी पाकिस्तान पर आतंकवाद फैलाने के आरोप लगाता आया है और बलोच कार्यकर्ताओं के विरोध प्रदर्शन से दुनियाभर में पाकिस्तान की थू-थू हो रही है. दुनियाभर में लोगों को पाकिस्तान की असलियत का पता चल रहा है. पाकिस्तानी सेना काफी लंबे वक़्त से बलूचिस्तान के लोगों पर कहर और जुल्म ढहा रही है.

पाकिस्तान कर रहा है बलोचों का शोषण

बलूचिस्तान के स्थानीय लोगों का शोषण किया जा रहा है, उनके प्राकर्तिक संसाधनों की लूट की जा रही है, बलोचों की आवाज को दबाया जा रहा है और उनको कुचला जा रहा है. बलूचिस्तान की जनता पाकिस्तान से आजादी के लिए व्यापक आंदोलन चला रही है. इसी के तहत “फ्री बलूचिस्तान मूवमेंट” के कार्यकर्ता जर्मनी की राजधानी बर्लिन समेत कई पश्चिमी देशों में पाकिस्तान के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. बर्लिन में तो इन प्रदर्शनकारियों ने बाकायदा पाकिस्तान के खिलाफ रैली भी निकाली है.

इस रैली में बलोच कार्यकर्ताओं के हाथों में बड़े-बड़े बैनर थे, जिनपर पाकिस्तान के विरोध में नारे लिखे गए थे. आजादी के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की मांग है कि पाकिस्तान, बलूचिस्तान से परमाणु हथियारों को हटाए क्योंकि इससे बलूचिस्तान के पर्यावरण को नुक्सान पहुंच रहा है. बता दें कि पाकिस्तान ने 28 मई 1998 में बलूचिस्तान के चघाई हिल में परमाणु परीक्षण किया था.


रेडिएशन से पूरा इलाका तहस-नहस

इस परिक्षण को रेगिस्तानी इलाके में करने की जगह ऐसे क्षेत्र में किया गया, जहां वनस्पतियां व् वन्य जीवन फल-फूल रहा था. इस परिक्षण से फैले रेडिएशन के कारण क्षेत्र की वनस्पतियां नष्ट हो गई थीं और वन्यजीवों को काफी नुकसान पहुंचा. खतरनाक परमाणु एडिएशन से क्षेत्र का सारा वातावरण दूषित हो गया और स्थानीय निवासी कई भयानक बीमारियों की चपेट में आ गए.

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बलोच कार्यकर्ताओं के मुताबिक़ पाकिस्तान के परमाणु हथियार ना केवल बलूचिस्तान बल्कि दुनिया भर के लिए बड़ा खतरा हैं. बलोच कार्यकर्ताओं ने अमेरिका की ट्रंप सरकार से मांग की है कि जब तक पाकिस्तान बलूचिस्तान को आजाद नहीं करता है, तब तक अमेरिका पाकिस्तान को आर्थिक व् सैन्य सहायता देना बंद करे.

बलोच कार्यकर्ताओं ने कहा कि अमेरिका समेत दुनिया भर के देशों को बलोचों का समर्थन करना चाहिए. सीरिया के कुर्द की तरह बलोच भी सेकुलर हैं और दुनिया भर में हर तरह के आतंकवाद एवं धार्मिक कट्टरपंथ का विरोध करते हैं. इतने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के कारण पाकिस्तान की बड़ी बदनामी हो रही है.


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