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बराक ओबामा का पीएम नरेंद्र मोदी को बाद धोखा

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नई दिल्ली। बराक ओबामा और नरेंद्र मोदी की दोस्ती की पूरी दुनिया मिसाल देती है मगर इस दोस्ती पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। भारत और अमेरिका के बीच में जिस बात को लेकर मतभेद हो गया है वो है बलूचिस्तान का मुद्दा। भारत बलोच लोगों का पक्ष ले रहा है और बलूचिस्तान की आज़ादी का समर्थन करता है जबकि दूसरी ओर अमेरिका ने बलूचिस्तान की आज़ादी का समर्थन करने से साफ़ इनकार कर दिया है।

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जॉन किर्बी नें बयान दिया है कि अमेरिका किसी भी प्रकार से बलूचिस्तान कि आज़ादी का समर्थन नहीं करता। किर्बी से जब पत्रकारों नें बलूचिस्तान में हो रहे मानवाधिकारों के हनन पर अमेरिका के रुख के बारे में सवाल किया तो उन्हों कहा कि वो पकिस्तान कि एकता और अखंडता का सम्मान करते हैं और अमेरिका बलूचिस्तान कि आज़ादी का समर्थन नहीं करता हैं।

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गौरतलब हैं कि पकिस्तान ने 1948 से ही बलोच लोगों का शोषण करना शुरू कर दिया था। हज़ारों बलोच लोगों कि आजतक हत्या कर दी गयी हैं और उनकी महिलाओं का रेप हुआ हैं। जिसको लेकर पीएम मोदी नें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले कि प्राचीर से पकिस्तान के कब्जे वाले गुलाम कश्मीर, गिलगित और बलूचिस्तान में हो रहे मानवाधिकार के उलंघन का मुद्दा साडी दुनिया के सामने उठाया था। जिसे लेकर बलोच लोगों में ख़ुशी कि लहार दौड़ गयी थी।

मगर बलूचिस्तान पर अमेरिका का ये रुख भारत के लिए एक परेशानी का कारन बन सकता हैं क्युकी पीएम मोदी बलूचिस्तान के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाना चाह रहे थे। वही दूसरी ओर चीन अमेरिका के इस रुख से बहुत खुश है।

अब आपकी बारी

क्या आपको लगता है कि पीएम मोदी अपने प्रयासों से बलूचिस्तान को आज़ादी दिलवा पाएंगे? अपने विचार हमें कमेंट के माध्यम से बताएं।

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